कांग्रेस की अ-न्याय योजना
   दिनांक 30-अप्रैल-2019
न्याय योजना के बारे में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बड़ी ही बारीकी से तथ्य को छिपाया है. हर जगह राहुल गांधी भाषण दे रहे हैं कि गरीबों को 72 हजार रूपया वार्षिक दिया जाएगा. जबकि घोषणा पत्र में दो स्थान पर यह लिखा गया है कि धन का इंतजाम केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलकर किया जाएगा. राहुल अपने भाषणों में राज्य की हिस्सेदारी के तथ्य को हर जगह छिपा रहे हैं. तथ्य छिपाना झूठ बोलने से ज्यादा बड़ा अपराध माना जाता है.
न्याय योजना जिसे राहुल गांधी “गरीबी पर सर्जिकल स्ट्राइक” बताते घूम रहे हैं. वह योजना भी एक छलावा निकली. कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ही बड़ी बारीकी से यह लिख रखा है कि अकेले केंद्र सरकार गरीबों के खाते में 72 हजार रूपया वार्षिक, जमा कराने का आर्थिक भार वहन नहीं करेगी. अत्यंत चालाकी से घोषणा पत्र में इससे बचने का रास्ता निकाला गया है ताकि भविष्य में कोई भी बात हो तो यह तर्क दिया जा सके कि घोषणा पत्र में पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि अकेले केंद्र सरकार के भरोसे गरीबों को 72 हजार रूपया वार्षिक देने की बात नहीं हुई थी.
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कई वायदे किये हैं. उसमे नौवां वायदा है न्याय योजना का. उसमे साफ़ लिखा है कि “ यह सच है कि तीव्र और व्यापक आधार वाला विकास, गरीबी को कम करेगा और मध्यम या दीर्घावधि में गरीबी को खत्म कर देगा. दूसरी तरफ निर्णायक और लक्ष्य केन्द्रित हस्तक्षेप, एक दशक के भीतर गरीबी को पूरी तरह समाप्त कर सकता है, इसलिए कांग्रेस 2030 तक गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित कर रही है. कांग्रेस का मानना है कि भारत की जी.डी.पी. का आकार और कुल व्यय (राज्य और केन्द्र सरकार को मिलाकर) हमें इजाजत देता है कि हम देश के सबसे गरीब लोगों को, राजकोषीय लक्ष्यों से विचलित हुए बिना, नकद हस्तांतरण की महत्वाकांक्षी योजना चला सकते हैं.”
योजना के पहले पैराग्राफ के आखिरी वाक्य में कोष्ठक के भीतर लिखा हुआ है कि राज्य और केंद्र सरकार को मिलाकर, अर्थात यह कि गरीबों के खाते में वार्षिक 72 हजार रूपया पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों से आर्थिक मदद ली जायेगी. केंद्र सरकार इस योजना का खाका बनाने के बाद राज्य सरकारों की हिस्सेदारी तय करेगी. यह भी अत्यंत विवादित विषय है कि राज्य सरकारों की भागीदारी कितने फीसदी होगी. इसके बारे में घोषणा पत्र में उल्लेख नहीं किया गया है.
इस घोषणा पत्र के नौवें अध्याय का गौर से अध्ययन करें तो यह साफ़ हो जाता है कि कांग्रेस की न्याय योजना सिर्फ मुंगेरी लाल के हसीन सपने के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है. घोषणा पत्र पढ़कर ही यह स्पष्ट हो जा रहा है कि आर्थिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के लिए इस प्रकार की किसी भी योजना को लागू करना श्रेयस्कर नहीं रहेगा. कांग्रेस स्वयं घोषणा पत्र में लिख रही है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलाकर, मगर कोई भी कांग्रेस का नेता इस बात को भाषण में नहीं कह रहा है. राहुल गांधी हो या अन्य कांग्रेस का कोई बड़ा नेता सभी यह कह रहे हैं कि न्याय योजना लागू होगी और गरीबों के खाते में 72 हजार रूपये वार्षिक जमा करा दिए जायेंगे.
यही नहीं, इस योजना के तहत सबको एक साथ रूपया देने का वायदा नहीं किया गया है. न्याय योजना कुछ चरणों में लागू की जायेगी. घोषणा पत्र में लिखा गया है कि -- शुरूआत के तीन महीने कार्यक्रम को पूरी तरह से डिजाइन किया जायेगा तथा प्राथमिक चरण के बाद अगले छः महीने कार्यक्रम की योजना, क्रिन्यावयन पद्धति तथा सफलता को जांचा-परखा जायेगा, उसके बाद कार्यक्रम को पूरी तरह शुरू किया जायेगा. कार्यक्रम को चरणवद्ध तरीके से लागू किया जायेगा. धन का इंतजाम राज्य और केंद्र सरकार मिलकर करेंगे.