“मुस्लिम लीग के हरे झंडे से कांग्रेस के होश फाख्ता, केरल में सहयोगी से लगाई गुहार, राहुल की रैलियों में न लहराएं हरे झंडे
   दिनांक 04-अप्रैल-2019

कांग्रेस नेता इस कदर सहमे हुए हैं कि सोशल मीडिया और वायनाड चुनाव के लिए बनाए गए खुफिया वॉट्स एप ग्रुपों पर इन झंडों की बाबत चेतावनी जारी कर रहे हैं. केरल में कांग्रेस की अगुआई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है.
 
मुस्लिम लीग के हरे चांद सितारा झंडे से कांग्रेस पार्टी के होश फाख्ता हैं. गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नामांकन से पहले घबराए पार्टी नेताओं ने अपनी प्रमुख सहयोगी मुस्लिम लीग से आग्रह किया है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को हरे झंडे न इस्तेमाल करने की हिदायत दें. कांग्रेस को डर है कि ये हरे परचम उत्तर भारत में उसका चुनावी गणित बिगाड़ देंगे.
कांग्रेस नेता इस कदर सहमे हुए हैं कि सोशल मीडिया और वायनाड चुनाव के लिए बनाए गए खुफिया वॉट्स एप ग्रुपों पर इन झंडों की बाबत चेतावनी जारी कर रहे हैं. केरल में कांग्रेस की अगुआई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है. यूडीएफ के उम्मीदवार के तौर पर राहुल गांधी केरल की वायनाड सीट से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी बहन एवं महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी के साथ वायनाड पहुंचे. नामांकन दाखिल करते समय राहुल बहुत नर्वस थे. जिस समय वह नामांकन के पेपर का सेट निर्वाचन अधिकारी को सौंप रहे थे, तो उनके हाथ कांप रहे थे.

 
राहुल का नर्वस होना लाजिमी है. कांग्रेस को अब जमीनी हकीकत का अहसास हो रहा है. वायनाड से राहुल गांधी को चुनाव लड़ाने के पीछे सबसे अहम कारण मुस्लिमों की बड़ी आबादी था. वायनाड मुस्लिम लीग का गढ़ रहा है. कांग्रेस ने बतौर यूडीएफ उम्मीदवार राहुल गांधी को इसी गणित के तहत यहां उतारा है कि उनके पक्ष में मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण आसानी से हो सकेगा. इस समीकरण में कांग्रेस का पूरा भरोसा मुस्लिम लीग के समर्थन पर टिका है. हो भी क्यों न. मुस्लिम लीग उसकी सबसे विश्वसनीय सहयोगी मानी जाती है. कांग्रेस की चेतावनी का मिला-जुला असर दिखा. लेकिन राहुल के पहुंचने पर उनके स्वागत में अति उत्साही मुस्लिम लीग कार्यकर्ताओं ने जहां-तहां हरे झंडे लहराए. रोड शो के दौरान भी मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता भारी तादाद में मौजूद थे, और कुछ के पास हरे झंडे भी थे. हालांकि रोड शो में हरे झंडे रोकने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं तक को निर्देश थे. पार्टी को अब अहसास हो रहा है कि हरे झंडों के तले राहुल गांधी के चुनाव लड़ने का उत्तर भारत में बहुत गलत संदेश जाएगा.

 
आर्गेनाइजर के पास उपलब्ध वाट्स एप की बातचीत के स्क्रीन शॉट में एक स्थानीय कांग्रेसी नेता मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं को सलाह दे रहे हैं कि चुनावी रैलियों में वे हरे झंडे का इस्तेमाल न करें. यह बातचीत राहुल के नामांकन की पूर्व संध्या की है. बातचीत कुछ यूं है-मुस्लिम लीग के हमारे दोस्त हमें बहुत प्रिय हैं. राहुल गांधी जल्द ही वायनाड पहुंच रहे हैं. इसमें कोई शक नहीं कि हमें हरे झंडे (मुस्लिम लीग का आधिकारिक झंडा) पर बहुत नाज है. लेकिन उत्तर भारत में इस हरे झंडे अलग नजरिये से देखा जाएगा. इसलिए मैं हमारे मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि वे रैलियों से दूर रहें. अगर आप लोग आते भी हैं, तो कम से कम अपना झंडा न लाएं. वायनाड लोकसभा सीट पर यूडीएफ के चुनावी कार्य के समन्वय के लिए बनाए गए वॉट्स एप ग्रुप पर ये मैसेज डाला गया है. एक मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता ने गुस्से वाली इमोजी के साथ इस अपील का जवाब दिया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फेसबुक और ट्वीटर जैसे प्लेटफार्मों पर भी इसी तरह की अपीलें जारी की हैं.
मुस्लिम लीग, तत्कालीन आल इंडिया मुस्लिम लीग, ही वह संगठन है, जिसने हिंदू और मुसलमान के आधार पर देश के बंटवारे का आंदोलन छेड़ा था. मुस्लिम लीग की स्थापना दिसंबर 1906 में हुई थी. पाकिस्तान बनने के बाद पाकिस्तान में यह मुस्लिम लीग के तौर पर सक्रिय हुई, भारत में यह इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग बनी और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में यह अवामी लीग के नाम से जानी गई.

 
वर्ष 2003 में केरल के कुख्यात मराड नरसंहार में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने आठ हिंदू मछुआरों की नृशंस तरीके से हत्या कर दी थी. जस्टिस थॉमस पी. जोसफ आयोग ने इस मामले की जांच की. आयोग के मुताबिक मुस्लिम लीग के कुछ नेता इस हत्याकांड की साजिश से वाकिफ थे. 2003 में केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की सरकार थी. मुस्लिम लीग सरकार में सहयोगी दल के तौर पर शामिल थी. आयोग ने जांच रिपोर्ट में मुस्लिम लीग की कड़ी आलोचना की थी.
जांच रिपोर्ट के मुताबिक कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन एनडीएफ और मुस्लिम लीग के कुछ कार्यकर्ता मराड समुद्र तट पर मछुआरों के कत्ले-आम की साजिश और इसे अंजाम देने में सक्रिय रूप से शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया था कि यह संभव ही नहीं है कि इस तरह का हमले बिना स्थानीय नेतृत्व के वरदहस्त के अंजाम दिया जा सके.