तो यह होगी आजम के चुनाव हारने की वजह
   दिनांक 05-अप्रैल-2019
जयाप्रदा को रक्कासा (नाचनेवाली ) कहकर नीचा दिखाने का प्रयास किया करते थे आजम तो “पद्मावत” फिल्म देखने के बाद जयाप्रदा ने कहा था कि “खिलजी का किरदार देखने के बाद मुझे आजम खान की याद आई
 
आज़म खान ने कभी सोचा नहीं रहा होगा कि लोकसभा चुनाव में उनका मुकाबला उन जयाप्रदा से हो जाएगा जिनको आजम ने कभी रक्कासा (नाचनेवाली ) कहकर नीचा दिखाने का प्रयास किया था. वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में जब जयाप्रदा चुनाव लड़ी थीं तब आज़म खान ने रामपुर में जयाप्रदा का चुनाव प्रचार किया था. मगर बाद में आजम खान का अमर सिंह और जयाप्रदा से विवाद हो गया . वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में आज़म खान ने जयाप्रदा का जमकर विरोध किया. आज़म के विरोध के बावजूद जयाप्रदा जीत गईं. मुसलमान बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से आज़म खान ने जब जयाप्रदा का विरोध किया था तब उन्हें इस बात की जबरदस्त गलत फहमी थी कि उनके विरोध के बाद जयाप्रदा चुनाव हार जाएंगी मगर ऐसा नहीं हुआ. वह सांसद निर्वाचित हुईं. आज़म खान ने जयाप्रदा को नीचा दिखाने का हर संभव प्रयास किया. तरह - तरह के ओछे आरोप लगाए मगर उन्हें सफलता नहीं मिली. अब वही आजम खान और जयप्रदा चुनावी मैदान में एक दूसरे के आमने—सामने हैं।
 
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में आज़म खान और जयाप्रदा का विवाद इस कदर बढ़ गया था कि आज़म खान को समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया. उस समय आज़म खान ने कहा था कि “ एक रक्कासा के लिए मुझे पार्टी से निकाला गया है.” लोकसभा चुनाव के समय में जयाप्रदा को बदनाम करने की नीयत से उनके अश्लील पोस्टर और चित्र रामपुर की सड़कों पर लगवाए गए थे. उस समय जयाप्रदा ने आरोप लगाया था कि “इस तरह की ओछी हरकत आज़म खान के इशारे पर हो रही है.” कुछ समय पहले संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावत” को देखने के बाद जयाप्रदा ने कहा था कि “खिलजी का किरदार देखने के बाद मुझे आजम खान की याद आ गई. खिलजी की ही तरह मुझे आज़म खान ने चुनाव के समय परेशान किया था.”
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर रामपुर विधानसभा से आज़म खान और स्वार विधानसभा से उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म खान चुनाव लड़े. मुसलमान बहुल सीट होने की वजह से आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान , दोनों लोग चुनाव जीत कर विधायक बन गए. यही वजह थी कि इस बार के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आजम खान को प्रत्याशी बनाया . मगर सपा के इरादों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है. आजम खान के लोकसभा प्रत्याशी घोषित होते ही भाजपा ने जयाप्रदा को उनके खिलाफ उतार दिया . जयाप्रदा रामपुर से दो बार सांसद रह चुकी हैं. रामपुर में जयाप्रदा काफी लोकप्रिय हैं और वहां के लोगों के सुख - दुःख में शामिल होती रही हैं. अब आज़म खान के समर्थकों को जयाप्रदा से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है. रामपुर विधानसभा क्षेत्र को आज़म खान कई वर्षों से प्रभावित करते रहे हैं. मगर उनका प्रभाव रामपुर विधानसभा और स्वार विधानसभा तक ही सीमित रहा है. रामपुर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली मिलक और विलासपुर विधानसभा पर आज़म खान का प्रभाव एकदम नगण्य है. जबकि जयाप्रदा का, रामपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पांचों विधानसभा की जनता से संपर्क है. भाजपा नेता आकाश सक्सेना कहते हैं “इस बार आज़म खान की छवि खराब हो चुकी है. आजम खान के खिलाफ भ्रष्ट्राचार और भूमि घोटाले के आपराधिक मामले चल रहे हैं. आज़म खान कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं. स्वार विधानसभा से विधायक अब्दुला आज़म खान, दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में अभियुक्त हैं. इस मामले की विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है. पुलिस के विवेचक ने आज़म खान को फ्राड करने का दोषी मान लिया है. रामपुर की जनता यह जान चुकी है कि आजम खान ने सरकार में रह कर जनता को परेशान किया.
सपा ने आज़म खान को रामपुर लोकसभा सीट का प्रत्याशी बना कर यह सोचा था कि मुसलमान बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से रामपुर लोकसभा सीट आसानी से जीती जा सकती है मगर जयाप्रदा के चुनाव मैदान में आने से आज़म खान लड़ाई में काफी पिछड़ चुके हैं.