एबीपी न्यूज बताए प्रधानमंत्री मोदी के गम्भीर आरोप पर उसका पक्ष क्या है ?
   दिनांक 07-अप्रैल-2019
जैसे—जैसे लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण की तारिख नजदीक आ रही है। कुछ चैनलों के बोल बिगड़ते जा रहे हैं। बौखलाहट इस हद तक दिख रही है कि वे खबर दिखाने से पहले तथ्यों की जांच तक नहीं कर रहे। प्रधानमंत्री के साक्षात्कार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वे हटा देते हैं और जब सोशल मीडिया पर उनकी लानत—मलानत होती है फिर वे संपादित हिस्सा प्रसारित कर देते हैं। अब चैनल को बताना चाहिए कि यदि यह हिस्सा पांच अप्रैल की सुबह प्रसारित साक्षात्कार का ही है फिर इसे सुबह चलाया क्यों नहीं गया?
शुक्रवार, 05 जुलाई को आनंद बाजार पत्रिका (एबीपी न्यूज) पर सुमित अवस्थी और रूबिका लियाकत द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लिया हुआ साक्षात्कार पूरे दिन सुर्खियां बटोरता रहा। साक्षात्कार प्रसारित होने के बाद इसका एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसमें मोदी एबीपी पर गम्भीर आरोप लगाते हुए नजर आए। कुछ दिनों से दिल्ली के पत्रकारों के बीच लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और एबीपी—आज तक के बीच खबरों को लेकर पैसों की लेन—देन की बात चल रही है। इस बीच राहुल—प्रियंका के फ्लॉप शो को भी जिस तरह सफल बताकर प्रचारित करने का काम एबीपी—आज तक ने किया है। इससे लुटियन दिल्ली में जो बात चर्चा का विषय है, उस पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। एबीपी—आज तक जैसे प्रतिष्ठित खबरिया चैनलों को झूठी और एक पक्षीय खबरों को दिखाते हुए समझना चाहिए कि इस तरह दर्शकों के बीच उनकी विश्वसनीयता संदिग्ध होगी। फिर सबसे तेज, आपको रखे आगे जैसे स्लोगन समाज के बीच उपहास का विषय बनेंगे।
 
एबीपी ने संपादित हिस्से को प्रसारित करते हुए कहा — राफेल पर एबीपी न्यूज के सवाल से नाराज हुए प्रधानमंत्री। जबकि चैनल यह नहीं बताता कि जिस हिस्से को उसने सोशल मीडिया के दबाव में आकर प्रसारित किया। उसे मूल साक्षात्कार से संपादित क्यों किया गया था?
साक्षात्कार के जिस हिस्से को हटाया गया था, उस हिस्से में प्रधानमंत्री साक्षात्कार ले रहे सुमित अवस्थी और रूबिका लियाकत से कह रहे हैं कि ''मैं एबीपी पर आरोप लगाता हूं...'' यह हिस्सा साक्षात्कार में प्रसारित नहीं हुआ। इस हिस्से में एंकर रूबिका लियाकत प्रधानमंत्री से पूछती हैं— ''क्या यह झूठ है कि आपने अनिल अंबानी को रफाल का सौदा कराके फायदा नहीं पहुंचाया है?''
प्रधानमंत्री जवाब देते हैं— ''आप सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं करते। यदि एबीपी न्यूज सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं करता तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा? क्या आप सीएजी को नहीं मानोगे, क्या आप फ्रांस के प्रेसिडेन्ट की बात को नहीं मानोगे? भारत सरकार ने पार्लियामेन्ट में इतनी बातें कहीं उसे भी नहीं मानोगे? आप इतने बायस्ड हैं।''
आगे मोदी एबीपी न्यूज से प्रश्न करते हुए कहते हैं— ''मैं सीधा एबीपी पर आरोप लगाता हूं, मेरा आरोप यह है कि एक झूठ जो कहीं सिद्ध नहीं हुआ। झूठ बोलने वाले से सवाल पूछने की आपकी हिम्मत नहीं है। इतनी बड़ी स्वतंत्र मीडिया की बात करने वाले लोगों ने छह महीने से एक झूठ चल रहा है। एक सवाल नहीं पूछा। पार्लियामेन्ट में हमने सारे जवाब दिए हैं। फिर भी नहीं पूछा। आप बताइए आपकी क्या मजबूरी है? आप जानें।
वहीं बेबुनियाद खबरों को बड़ी खबर बनाकर प्रचारित करने के लिए चैनल की खबर लेते हुए मोदी ने कहा— ''कहीं किसी कोने में सोशल मीडिया में भी एक आध चीज बुरी आ जाए तो आप चौबीस घंटे का हेडलाइन न्यूज बनाते हैं लेकिन इस परिवार के ऊपर सबूतों के साथ आरोप लगे हैं। जो आनलाइन उपलब्ध हैं। सबूतों के साथ। सबूतों के सोर्स वहां लिखे हुए हैं। कल देश के वित्त मंत्री ने इस रिपोर्ट के आधार पर प्रेस कांफ्रेन्स की। आपके एबीपी ने इसके ऊपर चर्चा नहीं की।''
मोदी ने बेबुनियाद जानकारी पर बिना तथ्यों के खबर चलाने का भी जिक्र करते हुए कहा— ''आपकी एबीपी एक झूठी खबर के लिए देश के प्रधानमंत्री से सवाल पूछने की हिम्मत कर सकती है। आपके सवाल का स्वागत है। लेकिन आपका एबीपी वित्त मंत्री के प्रेस कांफ्रेन्स को ब्लैक आउट करे। वित्त मंत्री अपने प्रेस कांफ्रेन्स में इन आरोपों का उल्लेख करते हैं लेकिन आप उस परिवार से सवाल नहीं पूछते। क्या मजबूरी है आपलोगों की?''
रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका वाड्रा, राहुल गांधी पर हो रही कार्रवाई को लेकर एबीपी के पूर्वाग्रह से प्रेरित सवालों पर लताड़ते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा— ''हम लीगल एक्टिविटी भी कर रहे हैं तो आप पहला सवाल वहीं से शुरू कर रहे हैं कि आप उस परिवार के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? आखिरी सवाल भी आप वही लेकर आए। आप लोगों की क्या मजबूरी है?''
फिर प्रधानमंत्री ने कैमरे के सामने कहा कि ''मैं कल वित्त मंत्री के प्रेस कांफ्रेन्स का सीधा आरोप लगाता हूं। जब राफेल पर प्रेस कांफ्रेन्स होती है आप एक सवाल नहीं पूछते उनसे। कहां से यह आरोप लगा रहे हो? किस प्रमाण के आधार पर यह सब कह रहे हो?''
चैनल ने सोशल मीडिया पर इस हिस्से के वायरल हो जाने के बाद यह स्वीकार कर लिया कि प्रधानमंत्री का आरोप साक्षात्कार का हिस्सा था। लेकिन न चैनल यह बता रहा है कि इसे किस दबाव में साक्षात्कार से बाहर निकाला गया, ना ही चैनल प्रधानमंत्री के आरोपों का कोई संतोषजनक जवाब दे पा रहा है।
 
इस दौड़ में एबीपी अकेला नहीं है।समाज में भ्रम पैदा करने की दौड़ में आज तक उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की प्रतिस्पर्धा में शामिल है। प्रधानमंत्री के चुनावी सभा के एक भाषण का अर्थ का अनर्थ करके 'आज तक' ने प्रस्तुत किया। अपनी इस गलती के लिए चैनल को अपने दर्शकों से माफी मांगनी चाहिए। शुक्रवार को प्रधानमंत्री अमरोहा में थे। अमरोहा में प्रधानमंत्री ने कहा— "मैंने कभी दावा नहीं किया कि सारे काम पूरे हो गए हैं, लेकिन इतना जरूर है कि मैं ईमानदारी से दिन-रात एक करके आपके जीवन को आसान बनाने के लिए, देश के विकास के लिए हर पल दौड़ा हूं।"
जबकि आज तक की एंकर ने ''क्या नरेंद्र मोदी के सारे वादे झूठे और चुनावी जुमले थे?'' के प्रश्न के साथ प्रधानमंत्री के बयान को तोड़ मरोड़कर कुछ यूं पढ़ा —"हमने कभी चुनावी वादों को पूरा करने की बात नहीं कही।"
यहां एंकर ने जो कहा और प्रधानमंत्री ने जो कहा, क्या दोनों बातें एक हैं? इसी प्रकार पत्रकारों के एक समूह ने उन पन्द्रह लाख रूपयों को खातों में जमा कराने का ऐसा वादा नरेन्द्र मोदी नाम के साथ जोड़ दिया जो कभी उन्होंने किया ही नहीं था। यदि पन्द्रह लाख वाली बात प्रधानमंत्री ने कभी बोली होती तो आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास एक करोड़ रूपए की राशि होती। रायपुर भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में एक करोड़ रूपए कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए रखा रह गया। वे सबूत लेकर नहीं आए। भूपेश बघेल को एक करोड़ लेने के लिए करना सिर्फ इतना था कि उन्हें रायपुर भाजपा कार्यालय में इस बात को साबित करना था कि मोदी ने प्रत्येक भारतवासी के खाते में पन्द्रह लाख रूपए देने की बात कही है। यह चुनौती बघेल को छत्तीसगढ़ भाजपा ने दी थी । पन्द्रह लाख की माला जपने वाली जोसफ गोएबल्स की संतानें इस मामले में भूपेश की मदद कर सकते थे और एक करोड़ रूपए में अपना हिस्सा हासिल कर सकते थे। लेकिन ऐसा हो न सका। शर्त के मुताबिक छह अप्रैल को यह समय समाप्त हुआ।
 
जैसा कि पहले इस आलेख में लिखा गया है, जैसे—जैसे पहले चरण की मतदान तिथि नजदीक आ रही है, सभी छद्म प्रगतिशीलों का संयम जवाब दे रहा है। न्यूज 24 पर लाइव डिबेट में कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा ने भाजपा प्रवक्ता पर कांच का गिलास फेंक कर मारा। कांच का गिलास फेंकने वाला प्रवक्ता यदि बीजेपी का होता तो यह राष्ट्रीय खबर बनती। प्राइम टाइम में विमर्श का मुद्दा बनता। द क्विंट, द वायर, द प्रिंट, स्क्रॉल, पर इस मुद्दे को राष्ट्रीय संकट बताते हुए कई संपादकीय लिख दिए गए होते। मगर अफसोस लाइव डिबेट में गिलास फेंकने वाला कांग्रेस का प्रवक्ता शर्मा था। जिस पर गिलास फेंका गया, वह भाजपा से ताल्लुक रखता था। फिर कैसी चर्चा? फिर कैसा विमर्श?
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने लाइव चैनल शो में 06 अप्रैल की रात बीजेपी के कूचबिहार से लोकसभा चुनाव उम्मीदवार निशिथ प्रामाणिक पर हमला कर दिया। इस तरह की घटना से कभी लोकतंत्र खतरे में नहीं होता क्योंकि लाइव टेलीविजन शो के ऊपर जिस नेता पर हमला हुआ है, उसका ताल्लुक भारतीय जनता पार्टी से है। विचार करने की बात है, जहां लाइव शो पर इस तरह हमला हो रहा है, उस पश्चिम बंगाल में कैमरा—लाइट—साउंड जब बंद होता होगा, उस वक्त लोकतंत्र की हालत क्या होती होगी?
एबीपी, आज तक, न्यूज 24 पर घटी अलग—अलग दिख रही घटनाएं, उस संयम के छूटने का संकेत मालूम पड़ती हैं, जो पांच साल सत्ता से बाहर रहने की वजह से 50 से अधिक सालों तक इस देश में सत्ता में रहे नेताओं और उनके समर्थकों के असंतोष से उपजा है।