राहुल की पार्टी ने बुजुर्ग कांग्रेसियों के साथ जो किया वह भुलाया नहीं जा सकता
   दिनांक 08-अप्रैल-2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चोर कहते-कहते राहुल गांधी की जुबान इतनी ज्यादा बहकती चली गयी कि अब वो किसी बुजुर्ग के सम्मान की चर्चा करते हुए भी ‘ अर्मादित भाषा’ का इस्तेमाल करने लगे हैं। बहुत ही फूहड़ तरीके से बेशर्मी वाले बोल बोलने लगे हैं राहुल गांधी। उप-प्रधानमंत्री रह चुके 91 वर्ष के लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल अभी भी सांसद हैं। वर्तमान राजनीति में न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी बल्कि अन्य किसी भी दल में उनकी उम्र के गिने-चुने नेता ही हो सकते हैं। भाजपा ने फैसला किया है कि 75 वर्ष की आयु पार कर चुके किसी भी नेता को {विशेष परिस्थियों को छोड़कर} वो चुनाव नहीं लड़ाएगी। किसी भी पार्टी का ये अंदरूनी मामला हो सकता है। पर राहुल एक चुनावी सभा में बेहद फूहड़ भाषा का इस्तेमाल किया।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राहुल गांधी की भाषा पर गंभीर आपत्ति जताते हुए नसीहत दी है कि लालकृष्ण अडवाणी जी हमारे लिए पिता के समान है। सुषमा ने अपने ट्वीट में कहा कि राहुल जी कृपया भाषा की मर्यादा को कायम रखें, उनका बयान आहत करने वाला है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के चंद्रपुर की रैली में मोदीजी का संदर्भ देते हुए आडवाणी जी के लिए अभ्रद शब्दों का प्रयोग किया।
कांग्रेस में बुजुर्गों को अपमानित करने की बहुत पुरानी परंपरा रही है। पुरानी पीढ़ी के लोगों को याद है कि कांग्रेस का विभाजन करके इंदिरा गांधी ने कितने बुजुर्ग कांग्रेसियों को अपमानित किया था। सोनिया गांधी के इशारे पर कांग्रेसियों ने तो पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव का पार्थिव शरीर तक कांग्रेस मुख्यालय में जनता के दर्शन हेतु रखे जाने का आग्रह ठुकरा दिया था। पार्थिव शरीर जब नरसिंह राव के परिजन लेकर आये तो कांग्रेस मुख्यालय के मुख्यद्वार बंद करा दिए गए। राव के परिजन बहुत ही दुखी मन से कुछ देर बाद शव लेकर वहां से चले गये। यहां तक कि सोनिया गांधी के इशारे पर नरसिंह राव का अंतिम संस्कार तक दिल्ली में नहीं होने दिया गया। राव के परिजन दिल्ली में ही उनकी समाधि बनवाना चाहते थे परंतु सोनिया गांधी के इशारे पर उनकी वह ख्वाहिश पूरी नहीं होने दी गयी।
कांग्रेस के लंबे समय तक खजांची रहने के बाद अध्यक्ष बने सीताराम केसरी के साथ कांग्रेस मुख्यालय में ही जो कुछ हुआ, उसे देश भला कैसे भूल सकता है। राजीव गांधी की मृत्यु के बाद कांग्रेस का नेतृत्व संभालने वाले केसरी को अपमानित कर सोनिया गांधी ने उनको कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटवाया। कहा जाता है कि सोनिया गांधी के इशारे पर कांग्रेस मुख्यालय के बाथरूम में केसरी को धक्का देकर बंद कर दिया गया था। ये साजिश तब रची गयी जब सोनिया गांधी को लगा कि पार्टी की कमान अब उनके खुद के हाथ में आना जरूरी है। कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी उस दिन तब तक बाथरूम में बंद रहे जब तक कि सोनिया गांधी को आनन-फानन में अपना नया अध्यक्ष नहीं चुन लिया। अभूतपूर्व था कांग्रेस अध्यक्ष का ये चुनाव जब आउटगोइंग अध्यक्ष को बाथरूम में बंद करके “सम्मानित” किया गया।
सत्ता और पार्टी पर कब्जा करने के लिए नेहरू-गांधी परिवार ने शुरू से ही साम-दाम-दंड-भेद की नीति को पूरी बेशर्मी से अपनाया। इसके लिए कई बार तो इसके भी आगे के कारनामों की चर्चा की जाती रही है। पार्टी और सत्ता कब्जाने के लिए उन नेताओं को रास्ते से हटाने में नेहरू परिवार ने कभी भी संकोच नहीं किया जो उनके रास्ते में रोड़ा बने। कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस को रास्ते से हटाने के लिए पं नेहरू ने गांधी जी का इस्तेमाल किया। सुभाष जी उस समय कांग्रेस के चुने हुए अध्यक्ष थे पर गांधी से दबाव बनवाकर नेहरू ने उनको इस्तीफा देकर अलग होने के लिए विवश कर दिया। भारतीय राजनीति में लोकतांत्रिक ढंग से चुने गये अध्यक्ष को हटाने की ये शायद पहली घटना थी। नेहरू ने गांधीजी से ही ‘’लोकतंत्र का गला घोटवाने’’ का दूसरा काम तब किया जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी में पूरे बहुमत से चुने गये सरदार बल्लभ भाई पटेल कांग्रेस अध्यक्ष और भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने जा रहे थे पर गांधी ने उनकी जगह पर जबरन जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनवा दिया।
1965 में ताशकंद में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जब भी चर्चा होती है तो उसे भी सत्ता के लिए साजिश ही करार दिया जाता है।
इस परिवार में सत्ता के लिए साजिश रचते समय बहुत ही सम्मानजनक तरीके से ‘खेल’ खेले जाने की बहुत लंबी फेहरिस्त है। इनके अतिरिक्त उन बुजुर्गों की भी कांग्रेस में “सम्मान” मिलने की लंबी फेहरिस्त रही है जिन लोगों ने कांग्रेस अध्यक्ष पद पर लोकतांत्रिक ढंग से पहुंचने की कोशिश की। बाद के दिनों में तत्कालीन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जितेंद्र प्रसाद ने अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का साहस दिखाया था। उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। दक्षिण के लोकप्रिय कांग्रेसी नेता वाई एस आर रेड्डी का नाम भी इसी कड़ी में लिया जाता है। उनका कद भी कांग्रेस में बढ़ता जा रहा था। उनकी भी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। ऐसी अनेक घटनाओं से कांग्रेसी राजनीति का इतिहास भरा पड़ा है।