आजम के घटिया बयान, जब भी बोले जहर ही उगला
   दिनांक 09-अप्रैल-2019
अपने घटिया और विवादित बयानों के लिए आजम खान सुर्खियों में रहते हैं. ओछी बयानबाजी के लिए आजम पर कई एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं पर वह सुधरने को तैयार नहीं है.
 सपा नेता आजम खान अपने बेतुके और घटिया बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं. वह चाहे सत्ता में हों या न हों लेकिन वह गाहे—बगाहे ऐसा बयान देते रहते हैं जिस पर विवाद होना लाजमी है.खुद को मुसलमानों का सबसे बड़ा हिमायती होने का दावा करने वाले आजम अपने बयानों से मुसलमानों को भी शर्मसार कर चुके हैं. वह सेना के जवानों के शौर्य को भी हिंदू मुसलमानों में बांटने वाला बयान दे चुके हैं. अभी हाल ही में, बालाकोट की सर्जिकल स्ट्राइक पर विवादित बयान देते हुए आज़म खान ने कहा कि "पहली बार ऐसा हुआ है कि सर्जिकल स्ट्राइक के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं यानी फौजियों की जिंदगियों पर वोट गिने जा रहे हैं. सरहदों का भी सौदा हो गया है. खून का सौदा हो गया है, वर्दियों का सौदा हो गया है."
रामपुर के अधिकारियों के बारे में घटिया बयान देने के मामले में उन पर एफ.आई.आर दर्ज हुई. उसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को "नीच" कहने के मामले में भी उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज हो चुकी है.
भारतवर्ष के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में वह इतने घटिया और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते रहते हैं जिसे यहां पर लिखा नहीं जा सकता है. प्रधानमंत्री के बारे में उन्होंने कहा कि " भाजपा समर्थित पार्टियों में मोदी की पहचान गोधरा के हीरो की तरह है."
आजम खान ने 5 अप्रैल को एक जनसभा में मर्यादा की सभी हदें पार करते भाषण दिया. जिला प्रशासन के अधिकारियों के बारे में अमार्यादित टिप्पणी की. अधिकारियों के बारे में उन्होंने कहा कि "लानत है ऐसी मां की कोख पर जिन्होंने ऐसे लोगों को जन्म दिया है" आजम खान के खिलाफ इस मामले में रामपुर जनपद में एफ.आई.आर दर्ज हुई है. इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में अपशब्द कहने के मामले में भी आजम पर एफ.आई.आर दर्ज हो चुकी है.
वर्ष 2013 में केदारनाथ में आई आपदा से भारी तबाही हुई थी. उसके बाद ,आज़म खान ने एक जनसभा में कहा था "गुजरात में मुसलमानों को मरवाया गया. मगर कुछ ही सालों बाद केदारनाथ में हिन्दुओं के साथ जो हुआ वह अल्लाह का न्याय है."
27 दिसंबर 2018 को तीन तलाक के मुद्दे पर आज़म खान ने कहा था "मुसलमानों के लिए कोई कानून मान्य नहीं है. मुसलमान सिर्फ कुरान मानता है. जो कुरान में कहा गया है, मुसलमान वही मानेगा. जो लोग कुरान को जानते हैं, उनको मालूम है कि तलाक की पूरी प्रक्रिया कुरान में दी हुई है.”
वर्ष 2017 में आज़म खान ने सेना के जवानों को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि “कारगिल का युद्ध मुसलमान सैनिकों की वजह से जीता गया था.” उनके इस बयान की खूब भर्तस्ना हुई थी। इस मामले में रामपुर के भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने रामपुर जनपद के थाना सिविल लाइन्स में 30 जून वर्ष 2017 को एफ.आई.आर दर्ज कराई थी. आजम के इस विवादित बयान की सी. डी. भी पुलिस को उपलब्ध कराई गई थी।
‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाओं पर 24 जुलाई 2018 को प्रतिक्रया देते हुए आज़म खान ने कहा था “मुसलामानों को डेयरी का व्यवसाय बंद कर देना चाहिए. कुछ नेताओं को कहते हुए मैंने सुना है कि मुसलमान गाय को अगर छूएगा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतना पडेगा.”
22 नवम्बर 2014 को मुलायम सिंह यादव का जन्म दिन भव्य तरीके से मनाया गया था. इसका इंतजाम आजम खान ने कराया था. मीडिया के लोगों ने जब आजम खान से पूछा कि जन्म दिन को इतने भव्य तरीके से मनाने के लिए पैसा कहां से आया है ? तब आजम खान ने कहा था “यह पैसा तालिबान और दाउद इब्राहिम ने भिजवाया है.” अमर सिंह जब समाजवादी पार्टी में वापस आ रहे थे तब आजम खान ने कहा कि “जब तूफ़ान आता है तो कूड़ा - करकट भी साथ में लाता है.” इसके पहले जब अमर सिंह और जयाप्रदा के विवाद में आजम खान समाजवादी पार्टी से निकाले गए थे. उस समय उन्होंने कहा था "एक रक्कासा (नाचने वाली ) के लिए मुझे पार्टी से निकाला गया है." अभी कुछ समय पहले जयाप्रदा के किसी बयान पर प्रतिकिया देते हुए उन्होंने कहा कि "मै नाचनेवाली के मुंह नहीं लगना चाहता हूँ"
5 अक्टूबर 2017 को एक जनसभा में आज़म खान ने कहा कि " इस देश का नौजवान नौकरी मांग रहा है. गोरखपुर की महिलाएं अपने मासूम बच्चों की मौत का हिसाब मांगती है तब बादशाह कहते है अभी रूक जाओ मुझे गुजरात के कुछ और मासूमों को अभी तेज़ाब में जलाना है. बादशाह झूठ नहीं बोलते और जो झूठ बोलता है वो बादशाह नहीं होता.
अपने एक दूसरे बयान में वह फिर जहर उगलते हैं " मोदी जी की फ़ौज के लोगों को जो ट्रेनिंग दी गयी है. उसी पर अमल शुरू हो गया है. 6 दिसंबर 1992 को जब बाबरी मस्जिद गिराई गयी. तब वहां पर एक पक्ष था जो मस्जिद को गिरा रहा था , दूसरे पक्ष के लोगों को पुलिस ने फैजाबाद की सरहदों पर रोक दिया था. एक पक्ष ने अपनी बहादुरी दिखाई थी. जो बहादुरी 6 दिसंबर 1992 को दिखाई गयी. वही बहादुरी , वही मर्दानगी उस समय कहां थी ? जिस वक्त बाबर ने या मीर बाकी ने इस मस्जिद को बनवाना शुरू किया था. सवाल सिर्फ इतना है कि यह मर्दानगी उस वख्त कहां थी जो आज है.?
4 दिसंबर 2018 को आजम खान ने कहा कि बुलंदशहर में शहीद इन्स्पेक्टर , एखलाक 'मॉब लिंचिंग' के विवेचक रह चुके हैं. इन्स्पेक्टर की हत्या की जांच एस.आई.टी से कराई जानी चाहिए. घटना स्थल के आस - पास मुस्लिम आबादी नहीं है इसलिए देखना होगा कि वहां पर मांस लेकर कौन लोग आए थे.
16 अक्टूबर 2015 को आज़म खान ने कहा कि " स्लाटर हाउस में जिस तरह झटका देकर जानवरों का बीफ निकाला जाता है. वह इस्लामी तौर तरीके के अनुरूप नहीं है. यह इस्लाम के लिए हराम है. यही गोश्त निर्यात किया जाता है. " आज़म खान के इस बयान से गोश्त का व्यापार करने वाले काफी आक्रोशित थे. मीट कारोबारियों को इस बात का डर हो गया था कि अगर मुसलमानों ने मीट खाना छोड़ दिया तो उनका धंधा ही चौपट हो जायेगा.
आजम खान के इस बयान पर मीट निर्यात कंपनी के निदेशक सलीम अहमद ने आज़म खान के बयान पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था " अगर आज़म खान ने राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा बयान दिया है तो हम लोग इसका विरोध करते हैं. आजम खान कैसे यह बता सकते हैं कि क्या हलाल है और क्या हराम है." उस समय आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने कहा कि "भारत से इस्लामिक कंट्री में जो गोश्त निर्यात किया जाता है उसके लिए प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और एक मुस्लिम संगठन ही उस प्रमाण पत्र को जारी करता है.