"नामदारों" के लिए घर की जागीर थी नौसेना !
   दिनांक 10-मई-2019
 
आईएनएस विराट और युद्धपोतों का इस्तेमाल तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ लक्षद्वीप के एक निर्जन टापू पर छुट्टी मनाने के लिए किया. इंडिया टुडे ने इस हाई प्रोफाइल पिकनिक का खुलासा 1988 में ही कर दिया था. आज कांग्रेस के पक्ष में खड़े होने वाले इस बात का जवाब क्यों नहीं देते कि उस समय सरकार और नौसेना ने इसका खंडन क्यों नहीं किया.
 
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों के साथ विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विराट से पिकनिक के मसले ने देश के सामने कई महत्वपूर्ण सवालों को लाकर खड़ा कर दिया है. पहला, तो वही जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा-क्या देश के संसाधन, सेना किसी परिवार की जागीर की तरह इस्तेमाल की जाती थी. दूसरा, ताबेदारों का एक तबका, जो कांग्रेस राज में पुरस्कृत होता रहा और अब इन संवेदनशील मसलों पर पूरी बेशर्मी के साथ बचाव में उतर आता है. इन सवालों के बीच एक चीज निर्विवाद रूप से स्थापित है कि आईएनएस विराट और युद्धपोतों का इस्तेमाल तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ लक्षद्वीप के एक निर्जन टापू पर छुट्टी मनाने के लिए किया. जिसने जुबान खोलने की कोशिश की, उसे खामोश कर दिया गया. इंडिया टुडे ने इस हाई प्रोफाइल पिकनिक का खुलासा 1988 में ही कर दिया था. आज कांग्रेस के पक्ष में खड़े होने वाले इस बात का जवाब क्यों नहीं देते कि उस समय सरकार और नौसेना ने इसका खंडन क्यों नहीं किया.
कैसे बना ये मुद्दा
दिल्ली के रामलीला मैदान में 8 मई की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राजीव गांधी और उनके परिवार ने भारतीय नौसेना के तत्कालीन इकलौते विमानवाहक पोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल निजी छुट्टियां मनाने के लिए किया. उन्होंने कहा था-निजी टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करके राजीव गांधी ने आईएनएस विराट का अपमान किया. लक्षद्वीप के बंगराम टापू पर दस दिन की छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट का इस्तेमाल किया गया. इस पिकनिक में राजीव गांधी के इटली से आए ससुराल पक्ष के रिश्तेदार और दोस्त शामिल थे. आईएनएस विराट भारतीय नौसेना की रीढ़ था. इकलौता विमानवाहक पोत. लेकिन यह दस दिन तक उस द्वीप के पास डेरा डाले रहा, जहां राजीव गांधी सपरिवार छुट्टियां मना रहे थे. जनवरी 1988 की इस पिकनिक में आईएनएस विराट के साथ कई युद्धपोत और पनडुब्बी भी छुट्टी मना रहे विशिष्ट लोगों की सेवा में तैनात थीं. अब जबकि बार-बार ये बात सामने आ रही है कि कांग्रेस ने हमेशा देश की सुरक्षा से समझौता किया, ये खुलासा बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है.
 
कौन हैं, जो बचाव में हैं...
इससे पहले मोदी राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर एक कहकर कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख ही चुके थे. दूसरा हमला उससे ज्यादा घातक था. ऐसे समय में जबकि चुनाव का मुख्य मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा है, देश के सामने एक ऐसा तथ्य आ गया कि एक परिवार ने नौसेना के मुख्य हथियारों को दस दिन तक अपनी सेवा में लगाए रखा. इस दौरान भारतीय समुद्री सीमाओं की निगरानी भगवान भरोसे थी. कांग्रेस नेताओं के तो खैर जवाबी बयान आने ही थे, लेकिन ऐसे-ऐसे लोगों के चेहरे से मुखौटे उतरे, जो उच्च सरकारी पदों पर बैठे रहे हैं. इंडिया टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल ने ट्वीट किया कि आईएनएस विराट पर उस समय तैनात रहे युवा अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि अभ्यास की योजना इस तरह से बनाई गई थी कि राजीव गांधी लक्षद्वीप में छुट्टी मना सकें. इन अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उच्चाधिकारियों ने जुबान बंद रखने की सलाह दी. इस ट्वीट पर किसे एतराज हुआ. निरुपमा राव को. जी हां, वही निरुपमा राव जो भारतीय विदेश सेवा के आला पद से सेवानिवृत्त हुई हैं. उन्होंने राहुल कंवल को ट्वीटर पर जवाब दिया कि ये निहायत गैर जरूरी है. हम इस तरह सेना का राजनीतिकरण क्यों कर रहे हैं. कौन राजनेता इस पर आमादा है. मैंने हमेशा आपको पत्रकार के रूप में सराहा है, लेकिन मुझे निराशा हुई.
 
निरुपमा राव की कूटनीतिक समझ
निरुपमा राव कांग्रेस तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की ही बहुचर्चित बीजिंग यात्रा के समय चर्चा में आईं. इसके बाद जब-जब कांग्रेस का राज आया, चंद्रमा की कलाओं की तरह प्रगति करती गईं. आखिरकार विदेश सचिव पद से रिटायर हुईं. उनके ट्वीटर टाइमलाइन को देखेंगे, तो पाएंगे कि वह हर पल कांग्रेस सेवा और बचाव के लिए तत्पर हैं. अभी इतालवी पत्रकार ने जब बालाकोट में भारतीय वायुसेना की सर्जिकल स्ट्राइक में जैश ए मोहम्मद के आतंकवादियों की मौत की पुष्टि की, तो इसे नकारने वाले छोटे से भारतीय तबके में मैडम राव भी थीं. उन्होंने इतालवी पत्रकार के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए. जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को जब अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया गया, तो यह भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत थी. लेकिन निरुपमा राव उन चंद कांस्पिरेसी थ्योरी वाले लोगों में शामिल थीं, जिन्हें ये लगता था कि मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के बदले भारत चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा बन जाएगा. अपनी इस थ्योरी को उन्होंने सार्वजनिक करने में कोई गुरेज नहीं किया. भारत बीआरआई से अलग है, इसके सम्मेलन तक का बहिष्कार करता है, पूरे प्रोजेक्ट पर आधिकारिक एतराज रखता है. इसके बावजूद श्रीमती राव की कोशिश भारत की इस कूटनीतिक उपलब्धि को एक कांस्पिरेसी थ्योरी में छिपा देने की रही. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत के विदेश मंत्रालय के सबसे बड़े पद पर किस मानसिकता और समझ के लोग बैठे रहे होंगे. आपको अगर अब भी श्रीमती राव की कूटनीतिक समझ पर संदेह है, तो एक और उदाहरण लीजिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राजीव गांधी के जीवन का अंत भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में हुआ. अब इस पर मैडम राव का ट्वीट-21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदरू में लिट्टे के आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की हत्या कर दी. उन्होंने अलगाववाद को समर्थन नहीं दिया और इसके लिए लिट्टे से भिड़ गए. वह यूनाइटेड श्रीलंका के लिए शहीद हुए. यहीं ये किस्सा समाप्त हो जाता है. इस ट्वीट के जरिये हम ये ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं कि राजीव गांधी श्रीलंका के लिए शहीद हुए थे, न कि भारत के लिए.
जो सवालों के घेरे में, वे ही दे रहे क्लीन चिट
रिटायर्ड एडमिरल एल. रामदास और आईएनएस विराट के तत्कालीन कमांडिंग आफिसर वाइस एडमिरल विनोद पसरीचा बचाव में उतरे. इन्हें बचाव में उतरना ही था. ये सवाल सिर्फ राजीव गांधी पर नहीं है. उस समय के नौसैनिक नेतृत्व पर भी सवाल है कि उन्होंने राजीव गांधी की पिकनिक के लिए कैसे देश की समुद्री सुरक्षा से समझौता किया. उन्होंने इस पूरे मसले को आधिकारिक यात्रा का जामा पहनाने की कोशिश की. कहा कि आईएनएस विराट पर राजीव गांधी प्रधानमंत्री की हैसियत से लक्षद्वीप की आधिकारिक यात्रा पर थे. वह उन्हें आईलैंड्स डवलपमेंट अथारिटी की मीटिंग में शामिल होना था. इस बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि आईएनएस विराट के साथ चार युद्धपोत और एक पनडुब्बी थी. उस पर उनका तर्क है कि यह पहले से तय अभ्यास का हिस्सा था. कितने सारे इत्तफाक एक साथ हो रहे हैं, ये सबकुछ समझ जाने के लिए पर्याप्त हैं. 
दो और पूर्व अधिकारी आए सामने
नौसेना के ये दोनों ही पूर्व अधिकारी मूल बात को नहीं समझ रहे हैं. बात ये नहीं है कि यात्रा आधिकारिक थी या नहीं. मसला ये है कि क्या राजीव गांधी ने सपरिवार, इटली से आए रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ दस दिन पिकनिक नहीं मनाई. क्या इस दौरान आस-पास नौसेना का पूरा लाव लश्कर नहीं था. एडमिरल रामदास और वाइस एडमिरल पसरीचा बचाव करके चुके नहीं थे कि नौसेना के दो और अधिकारी इस पूरी पिकनिक के गवाह के रूप में सामने आ गए. पूर्व कमांडर वी. के. जेटली ने ट्वीट किया कि राजीव गांधी और सोनिया गांधी ने बंगराम द्वीप पर छुट्टी मनाने के लिए आईएनएस विराट से सफर किया. मैं इसका गवाह हूं. मैं उस समय आईएनएस विराट पर तैनात था. एडमिरल केबिन में गांधी परिवार के लिए खास तौर पर केबिन तैयार किया गया. यह सच है कि गांधी परिवार ने लक्षद्वीप जाने के लिए आईएनएस विराट का इस्तेमाल किया. यह छोटी बात नहीं है. वाइस एडमिरल पसरीचा हमारे कमांडिंग आफिसर थे. उन्हें तो विदेशियों के बारे में पता होना चाहिए. युद्ध पोत ने लक्षद्वीप के पास डेरा डाला. यह छोटा काफिला नहीं था. हमें बताया गया कि वे लोग आ रहे हैं और हम बंगराम जाएंगे. पोत उन्हें लेने के लिए कोच्चि गया. रात भर वे ठहरे. हेलीकॉप्टर से लक्षद्वीप के लिए रवाना हुए. इसके बाद भी वे आईएनएस विराट पर रुके. युद्धपोत ने बंगराम के पास लंगर डाल रखा था. विमानवाहक पोत कभी अकेले नहीं चलता. उसके साथ युद्धपोत होते हैं.
नौसेना के एक अन्य पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर हरेंद्र सिक्का ने एक टेलीविजन चैनल को इंटरव्यू में बताया कि गांधी परिवार जिस तरह से नौसेना के संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा था, ये अधिकारियों को पसंद नहीं आ रहा था. लेकिन उन्हें जबरन खामोश कर दिया गया. हम असहाय थे. हम आपत्ति नही जता सकते थे. नहीं तो हमें विद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाता. सिक्का का दावा है कि सोनिया गांधी विदेशी नागरिक थीं. उनकी विमानवाहक पोत पर मौजूद से तमाम लोग चिढ़े हुए थे. सिक्का के लफ्जों में. एक विदेशी सबसे गोपनीय जहाज में खुला घूम रहा था. कंट्रोल रूम तक के दरवाजे असैनिक लोगों के लिए खोल दिए गए.
1988 में हो गया था खुलासा
नौसेना को सेवा में रखकर इस प्राइवेट पिकनिक का खुलासा 1988 में ही इंडिया टुडे की पत्रकार अनीता प्रताप ने कर दिया था. लेकिन तब इस परिवार के सामने जुबान खोलने वाला कौन था. कोई खास चर्चा नहीं हुई. लेकिन अनीता प्रताप को क्या पता था कि 31 साल बाद उनका ये साहसिक आर्टिकल देश के चुनाव में एक मुद्दा बन जाएगा. उस आर्टिकल में गांधी परिवार की आईएनएस विराट से यात्रा, पिकनिक में शामिल लोगों का ब्योरा समेत सभी बातों का खुलासा कर दिया गया था. अनीता प्रताप अब नार्वे में बस गई हैं. इंडिया टुडे ने इस स्टोरी के बाबत अनीता प्रताप से बात की. उन्होंने बहुत वाजिब तथ्य रखा. उनका कहना है कि उस समय मेरी स्टोरी पर न तो सरकार ने कोई खंडन जारी किया और न ही नौसेना ने. अब अगर इस बात का खंडन किया जा रहा है, तो संदेह होना स्वाभाविक है. उनका कहना है कि आज की तारीख में इस घटनाक्रम की पुष्टि या खंडन, दोनों ही राजनीतिक रूप से ज्यादा संवेदनशील मसले हैं. और साबित होता है परिवार हित पहले
 
इस पूरे मसले में कुछ तथ्य अब तक स्थापित हो चुके हैं.
1. राजीव गांधी ने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ दस दिन तक लक्षद्वीप के टापू बंगराम पर छुट्टियां मनाईं.
2. इस छुट्टी के लिए गांधी परिवार भारत के इकलौते विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर सवार होकर लक्षद्वीप पहुंचा. चाहे आधिकारिक यात्रा पर या गैर आधिकारिक यात्रा पर.
3. पूरे दस दिन की छुट्टी के दौरान विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, इसके बेड़े में शामिल युद्धपोत और एक पनडुब्बी बंगराम के पास सेवा में तैनात रही.
4. दस दिन तक भारत की मुख्य नौसैनिक शक्ति एक छुट्टी मना रहे विशिष्ट परिवार की सुरक्षा में थी, देश की सुरक्षा में नहीं.
5. पूरा मसला साबित करता है कि इस परिवार के लिए अपने हित पहले हैं या देश की सुरक्षा.