एक्सक्लूसिव: ग्वादर में हमला, बड़ी तादाद में पाकिस्तानी-चीनी मारे गए
   दिनांक 13-मई-2019
                                                                                                                           -  ग्वादर से पुतन ग्वादरी
बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे संगठन बीएलए ने जिम्मेदारी ली। बलूचिस्तान की आजादी के लिए आगे ऐसे और हमलों की चेतावनी
ग्वादर के फाइव स्टार होटल पर्ल कंटिनेटल होटल पर एक बड़ा हमला हुआ है जिसमें बड़ी तादाद में पाकिस्तानी और चीनी लोग मारे गए हैं। इनमें पाकिस्तानी फौज के तमाम लोग भी मारे गए हैं। इस हमले को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने अंजाम दिया है। संगठन बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है और उसने घटना के फौरन बाद ही इसकी जिम्मेदारी ली और साफ कहा कि हमने जिस मकसद से यह हमला किया, उसे हमारे लोगों ने पूरा किया। हालांकि पाकिस्तान की हुकूमत यह साबित करने में जुटी है कि इस हमले में किसी भी विदेशी की मौत नहीं हुई।
ग्वादर के इस होटल पर 11 मई को हमला हुआ। बलूचिस्तान के मंत्री जियाउल्लाह लंगू ने हमले के बाद ही कहा कि इसमें किसी विदेशी की मौत नहीं हुई। उन्होंने कहा, “चार हथियारबंद लोगों ने होटल के के दरवाजे पर तैनात सुरक्षा गार्ड पर हमला कर दिया और बाद में उन सभी को मार गिराया गया।” इसके अलावा ग्वादर के पुलिस चीफ असलम बंगुलजई ने कहा कि हमले में एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई। इसके साथ ही दावा किया कि चारों हमलावरों को होटल में अंदर सीढ़ियों पर मार गिराया गया और सेना का कहना है कि यह ऑपरेशन करीब पांच घंटे चला।
बालाकोट जैसा झूठ
पाकिस्तान की हुकूमत का मक्कारी में जवाब नहीं। इस मामले में भी वह बालाकोट की तरह ही गलतबयानी कर रहा है। जिस तरह बालाकोट में इंडियन हमले में बड़ी तादाद में दहशतगर्द मारे गए थे और पाकिस्तान था कि यह मानने को तैयार नहीं था, वैसे ही इस मामले में भी वह हकीकत को छिपा रहा है। बालाकोट के मामले में उसने तरह-तरह के बहाने बनाकर एक महीने से ज्यादा वक्त तक वहां मीडिया को जाने नहीं दिया, यहां के हालात भी कुछ वैसे ही हैं। किसी मीडियाकर्मी को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा. इस बीच, यह भी खबर आ रही है कि हमले के बाद ग्वादर अथॉरिटी के दफ्तर में पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तानी एडमिनिस्ट्रेशन और चीनी अफसरान के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। ग्वादर डेवलपमेंट अथॉरिटी के ही एक शख्स ने यह जानकारी दी। उसका अंदाजा है कि इन बैठकों में पर्ल कंटिनेंटल होटल में हुए हमलों के बाद फौजी इंतजामात पर बातचीत हुई।
सेना ने अस्पताल को घेरा
बेशक, पाकिस्तानी हुकूमत जो भी कहे, हकीकत यह है कि इस हमले में बड़ी तादाद में चीनी और पाकिस्तानी लोग मारे गए हैं। घायलों को ग्वादर डेवलपमेंट अथॉरिटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पाकिस्तान सेना ने अस्पताल को चारों ओर से घेर रखा है और वहां किसी मीडिया वालों या बाहर के लोगों को जाने नहीं दिया जा रहा है। इसी अस्पताल में अपने एक रिश्तेदार का इलाज करा रहे एक शख्स ने कहा, “अस्पताल के जिस हिस्से में होटल पर हमले में जख्मी लोगों को दाखिल कराया गया है, वहां किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। सेना के जवान न केवल अस्पताल के चारों ओर, बल्कि अंदर भी तैनात हैं। मॉर्चरी में बड़ी तादाद में लाशों को रखा गया है और ठीक उसके बाहर भी फौज का आदमी तैनात है।” वहीं एक और शख्स ने इस बात की तस्दीक की है कि अस्पताल में कई बार पुलिस अफसरान के साथ कुछ चीनी भी अंदर गए। “ चीनी लोगों को कई बार फौजी लोगों के साथ अंदर जाते देखा गया।” दरअसल, पाकिस्तान यह नहीं चाहता कि किसी भी तरह यह खबर बाहर जाए कि इस हमले में चीनी या विदेशी लोगों की मौत हुई है क्योंकि इससे यहां निवेश करने वालों में एक बेरुखी का भाव आएगा।
चीनियों का पसंदीदा होटल
पर्ल कंटिनेंटल होटल यहां बिजनेस के लिए आने वाले विदेशियों में बड़ा लोकप्रिय है। खास तौर पर चीन से आने वाले लोग यहीं रुकते रहे हैं। जब से ग्वादर में कंस्ट्रक्शन का काम हो रहा है, शायद ही ऐसा कोई दिन होगा जब होटल में चीनी न हों। फौज कह रही है कि हमलावरों के खिलाफ ऑपरेशन पांच घंटे में खत्म हो गया जबकि हकीकत है कि हमलावर 24 घंटे से अधिक समय तक होटल में रहे और इत्मीनान हो जाने के बाद ही लोगों को मौत के घाट उतारा। हमलावरों ने लोगों के आई-कार्ड वगैरह भी देखे। हां, तीसरे फ्लोर पर जब हमलावर लोगों को मार रहे थे, तब तक फौज उनके काफी करीब पहुंच चुकी थी और तब उन्होंने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। ऐसा मुमकिन है कि तीसरे फ्लोर पर चीन और पाकिस्तान के अलावा भी कुछ और लोग भी मारे गए हों। तीसरे फ्लोर पर कई ऐसे भी कमरे रहे, जिनमें हमलावर घुस नहीं पाए। उन कमरों में कौन रह रहे थे, इसका अंदाजा नहीं है।
बीएलए के मजीद ब्रिगेड ने किया हमला
इस हमले को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के मजीद ब्रिगेड ने अंजाम दिया। बीएलए का यह आत्मघाती दस्ता है जो बलूचिस्तान की आजादी के लिए अपनी जान की परवाह नहीं करते। हमले के बाद इसके प्रवक्ता बीबागर बलोच ने कहा कि बीएलए के मजीद ब्रिगेड ने इस हमले को अंजाम दिया और बलूचिस्तान की कौमी आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। प्रवक्ता ने साफ कहा कि जिस मकसद से हमारे जांबाजों ने इस हमले को अंजाम दिया, उसका मकसद सौ फीसदी हासिल किया गया। बीबागर ने यह साफ किया है कि यह हमला ग्वादर में जबरन कब्जा जमाए पाकिस्तान, इलाके के रिसोर्सेर्ज पर कब्जा करने के लिए अरबों बिलियन डॉलर खर्च कर रहे चीन और इनके अलावा उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो यहां ग्वादर में पैसे लगाना चाहते हैं। बीबागर ने कहा है कि “हमारे इस ऑपरेशन में बड़ी तादाद में चीनी और पाकिस्तानी मारे गए। इनमें पाकिस्तान फौज के भी तमाम लोग हैं। यह ऑपरेशन इस बात का सबूत है कि हम अपनी सरजमीं की आजादी, अपने हकूक के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।” यह बात काबिले गौर है कि बलूच अमनपसंद लोग हैं और तारीख इस बात की गवाह है। लेकिन, इसका यह मतलब नहीं कि बलूचों में अपनी कौमी हिफाजत के लिए हद से गुजरना नहीं आता। यहां के जो सूरते हाल हैं और मकामी (स्थानीय) लोगों में जिस तरह की नाराजगी की, जिस तरह की बेबसी है, उसमें इस तरह के और हमलों से इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, पाकिस्तान की फौज की तशद्दुद (हिंसा) जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है, बलूचों में जद्दोजहद को तेज करने का इरादा भी मजबूत होता जा रहा है।