‘विकास से नफरत करते हैं विभाजन की राजनीति करने वाले’
    दिनांक 17-मई-2019
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में राजनीति के कितने और कैसे रंग हो सकते हैं, मुद्दों की कैसी विविधता, गठबंधनों के कैसे साम्य या विसंगतियों के कितने प्रकार हो सकते हैं, इन सब की छटा, झलकियां दिखाने के बाद 17वीं लोकसभा के चुनाव थम ही चुके हैं। सातवें और अंतिम चरण के मतदान से पहले हमने बात की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से। प्रशासनिक कार्यों में सतत डूबे रहने वाले योगी भाजपा में वैचारिक राजनीति के चुस्त और सतर्क सिपहसालार गिने जाते हैं। सर्वसमावेशी हिंदुत्व के प्रति स्पष्ट आग्रह, क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों में संतुलन और प्रशासनिक क्षमताओं पर पकड़ रखने के साथ कठोर परिश्रम, यह योगी जी की पहचान है। भाजपा के शीर्ष स्टार प्रचारकों में शुमार योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तरह सैकड़ों रैलियों और सभाओं को संबोधित किया है। इन सारी व्यवस्थाओं, चुनावी आपाधापी के बीच वह तत्परता से उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के प्रशासनिक मसलों पर निर्णय भी करते चलते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र काशी में प्रचार के मोर्चे पर डटे योगी आदित्यनाथ से काशी के सर्किट हाउस में मौजूदा गठबंधन राजनीति की संभावनाओं, केंद्र सरकार के कार्य, इस चुनाव के अनुभवों और उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन के मुद्दों पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर और वरिष्ठ संवाददाता अश्वनी मिश्र ने विस्तार से बात की। प्रस्तुत हैं वार्ता के प्रमुख अंश:-
बंगाल में एक अफरा-तफरी की सी स्थिति दिखाई दे रही है। पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली पर हमला हुआ, उन्हें और आपको कई बार हैलीकाप्टर उतारने की अनुमति राज्य सरकार से नहीं मिली। आप कल वहां से रैली करके आए हैं। ऐसे में आपकी ओर से बयान आता है कि ‘अब रण होगा’, इसका क्या अर्थ है?
मुझे लगता है कि बंगाल में भाजपा ने लोकतंत्र को बचाने के लिए जो अपनी रणनीति बनायी है, वह बंगाल के आमजन की खुशहाली के लिए है, वहां के विकास के लिए है। जिन लोगों ने बंगाल के लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा है, उनके हक को मारा है, वे लोग कभी नहीं चाहेंगे कि बंगाल में कोई लोकप्रिय सरकार आए। सुशासन और विकास को लाने वाली सरकार आए। वे सदैव इसी प्रयास में रहेंगे कि बंगाल में इसी तरह का अफरा-तफरी का माहौल बना रहे। बंगाल का आम नागरिक शासन की सुविधा से इसी तरह वंचित बना रहे और ये लोग राजनीति की रोटी सेकते रहें। आज वहां बहुत परिवर्तन देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी के विकास, सुशासन, राष्ट्रवाद के मुद्दे ने और अमित शाह जी के संगठनात्मक रूप ने देश के अंदर एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है। संगठनात्मक रणनीति का कौशल भी वहां देखने को मिल रहा है। हर जगह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और आम जनमानस भी ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते दिख रहे हैं। आज बंगाल में व्यापक परिवर्तन दिख रहा है। यही ममता बनर्जी की बौखलाहट का कारण है।
भाजपा पर आरोप लगता है कि वह समाज को तोड़ने का काम करती है और दूसरी तरफ जातीय राजनीति का आधार लेकर बने गठबंधन हैं। आप इन गठबंधनों के समाजशास्त्र और राजनीतिशास्त्र को कैसे देखते हैं?
देखिए, उलटा चोर कोतवाल को डांटे। ‘जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखीतिन तैसी।’ जिन्होंने सदैव बांटा है, विभाजन की राजनीति की है, जाति, मत, मजहब के आधार पर विभाजन किया है और बाद में जब उन्हें अवसर मिला तो केवल अपने और अपने परिवार के लिए ही बेईमानी की सभी हदों को पार करते हुए, भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा करते हुए संपत्ति अर्जित की। दरअसल विकास से नफरत करते हैं विभाजन की राजनीति करने वाले। ऐसे लोगों को कैसे अच्छा लग सकता है, जब मोदी जी किसी गरीब को मकान देते हैं, जब किसी गरीब को बिजली का ‘कनेक्शन’ देते हैं, गरीब महिला को गैस का ‘कनेक्शन’ देते हैं, किसी गरीब को शौचालय देते हैं। जब मोदी जी किसी किसान को प्रतिवर्ष बीज-खाद की आवश्यकता की पूर्ति के लिए 6,000 रुपए सालाना देने की व्यवस्था करते हैं। जब मोदी जी नौजवानों को आर्थिक स्वावलंबन के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री स्टैंडअप, प्रधानमंत्री स्टार्टअप योजना लागू करते हुए उनके आर्थिक स्वावलंबन का कार्य करते हैं। देश के 50 करोड़ लोगों का 5,00000 रुपए का स्वास्थ्य बीमा नि:शुल्क किया जा रहा है। विभाजनकारी मानसिकता के साथ जीने वाले लोग इन चीजों को पसंद नहीं कर सकते हैं। यह उनकी बौखलाहट है। जो स्वयं विभाजन करते रहे हैं उन्हें विकास और राष्ट्रहित के मुद्दे अच्छे नहीं लगते।
आप भाजपा के स्टार प्रचारक हैं। धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। आप अब तक कितनी रैलियां कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में लगभग 260 से ऊपर सभाएं और रैलियां हुई होंगी।
इस बार के चुनाव और पहले के चुनाव में क्या अंतर महसूस करते हैं?
चुनाव बिल्कुल स्पष्ट है। यह पहला चुनाव है, जिसमें आम जनता आगे और प्रत्याशी पीछे है। जनता मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार के काम और मोदी जी के नाम के आधार पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार दिखती है। मुझे लगता है कि लोकतंत्र में आमजन की जागरूकता का एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत हुआ है।
विरोधी कहते हैं कि सारा चुनाव राष्ट्रवाद के नाम पर घुमा दिया गया और असल मुद्दे पीछे छूट गए। आप इसको कैसे देखते हैं?
देखिए, भारत में इसे राष्ट्रवाद नहीं राष्ट्रभाव कहना होगा क्योंकि यह यूरोप के राष्ट्रवाद की तरह कोई संकीर्ण अवधारणा नहीं है। भारत का राष्ट्रभाव रामराज्य की अवधारणा है। जहां पर किसी भी प्रकार का भेदभाव किए बगैर हर प्रकार की सुरक्षा, शासन की सुविधा और उसके लिए स्वावलंबन के लिए कार्य करना। हमारा राष्ट्रभाव है देश के 130 करोड़ जनता को सुरक्षा देना। बिना भेदभाव के शासन की योजनाओं को गरीब तक, किसान तक, नौजवानों तक, महिलाओं तक पहुंचाना है। हमारा राष्ट्रभाव बिना भेदभाव के शासन की योजनाएं प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने का है। जाति, मत, क्षेत्र, भाषा, आदि के आधार पर बिना भेदभाव किए सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना हमारा राष्ट्रभाव है। भारतीय जनता पार्टी तो विकास के मुद्दों के आधार पर विकास, सुशासन और राष्ट्रभाव की बात कहती है। इस देश को राष्ट्रभाव की आवश्यकता है और इसलिए है कि सुरक्षा देश के लिए सर्वोपरि है। यह चुनाव पंचायत, नगर पंचायत का नहीं है। यह चुनाव देश का चुनाव है। देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। भारतीय जनता पार्टी ने सदैव इस बात को माना है कि देश पहले है उसके बाद दल है। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रभाव को मुद्दा बनाया है। लेकिन जो लोग आतंकवाद के प्रति सहानुभूति व्यक्त कर रहे हैं, उन लोगों से पूछा जाना चाहिए कि उनकी आखिर रणनीति क्या है?
क्षेत्रीय दल और नेतृत्व तथा राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय क्षत्रपों के लिए आप किस तरह की संभावनाएं देख रहे हैं?
भारत की राजनीति दो हिस्सों में बंट चुकी है। एक राजनीति वह है, जो विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में पूरी ईमानदारी के साथ काम कर रही है। इस राजनीति का नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी जी कर रहे हैं। दूसरी राजनीति नकारात्मक सोच वाली है। इसमें जाति, क्षेत्र, मत, मजहब के आधार पर इस देश को कमजोर करने और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का समर्थन करने वाले दल शामिल हैं। चाहे वे कांग्रेस के सहयोगी हों या गठबंधन या महागठबंधन के रूप में अन्य लोग हों, ये सभी लोग नकारात्मक सोच के साथ सामने आए हैं। मुझे लगता है कि नकारात्मकता कभी किसी का भला नहीं कर सकती। इनकी नकारात्मकता सबको ले डूबेगी।
प्रदेश में आपकी सरकार बनने के बाद गोवध पर अंकुश लगा है। गोवध रुका परंतु वह चुनावी मुद्दा भी बना, आप छुट्टा पशुओं से कैसे निपटेंगे?
पहले उत्तर प्रदेश के विभिन्न कस्बों में, विभिन्न जनपदों में व्यापक पैमाने पर अवैध रूप से गोवंश की हत्या होती थी। हमारी सरकार आई तो उस पर रोक लगा दी गई। ऐसे में बचे हुए पशु सड़कों पर घूमने लग गए थे। इसके कारण आम जनता ने आशंका व्यक्त की कि इन पशुओं से फसलों का काफी नुकसान होता है। इसके बाद जून, 2018 में सरकार ने एक व्यवस्था बना दी। इस व्यवस्था के तहत छुट्टा पशुओं को रखा जा रहा है। विगत छह महीने के दौरान चार लाख से अधिक गोवंश प्रदेश सरकार के गो आश्रय स्थलों में आ चुके हैं। उनकी देखभाल और सारी व्यवस्था सरकार कर रही है। हम गोवंश के संरक्षण एवं संवर्द्धन की योजना भी बना रहे हैं। इसलिए इस चुनाव में यह मुद्दा नहीं बन पाया।
इस बार के चुनाव में उत्तर प्रदेश में प्रमुख मुद्दे क्या हैं? विपक्ष ने कौन से मुद्दे उठाए?
उत्तर प्रदेश में विपक्ष को कोई भी मुद्दा नहीं मिला है, सिवाय जाति के। जाति-जाति की रट लगाकर ये लोग विभाजनकारी मानसिकता का प्रदर्शन पूरे चुनाव में करते रहे। प्रधानमंत्री ने गरीबों को मकान, शौचालय, गैस सिलेंडर, बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाएं जाति के आधार पर नहीं दी हैं। इसके बावजूद ये लोग प्रधानमंत्री तक की जाति ढूंढते हुए दिखाई दिए। उत्तर प्रदेश में विपक्ष के पास कोई मुद्दा ही नहीं है।
किसान की स्थिति सुधारने और कानून-व्यवस्था को कायम रखने के लिए राज्य में किस तरह के कार्य हुए?
हमारी सरकार आई तो सबसे पहला काम लघु और सीमांत किसानों का 1,00000 रु. तक का ऋण माफ किया। दूसरा काम था बहनों और बेटियों की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन। तीसरा काम था सत्ता के संरक्षण में जिन लोगों ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया था उनके लिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन करना। हमने 54,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल जमीन को भूमाफिया के कब्जे से मुक्त कराया है। चौथा काम है अनाज की खरीद के लिए नई नीति बनाना। (प्रोक्यूरमेंट की पॉलिसी)। अभी गेहूं का समय है। दो साल पहले तक एक कुंतल गेहूं के लिए किसान को बमुश्किल 800 - 900 रुपए मिल पाते थे। इस समय कोई भी किसान एक कुंतल गेहूं लेकर किसी भी क्रय केन्द्र में जाए वहां गेहूं की तुलाई होगी और आरटीजीएस के माध्यम से किसान के खाते में 48 घंटे के अंदर 1860 रु. पहुंच जाएंगे। इस तरह का एक व्यापक सुधार प्रदेश के अंदर देखने को मिला है।
प्रशासन के मुद्दे पर हिन्दू-मुस्लिम विषय साधना राज्य सरकारों के लिए चुनौती रही है, आपने उत्तर प्रदेश में इसे कैसे साधा?
प्रदेश के अंदर कानून-व्यवस्था एक नजीर बनी। मुझे याद है आज से लगभग डेढ़ साल पहले दुर्गा पूजा और मुहर्रम एक साथ पड़ गई थी। बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने दुर्गा पूजा पर रोक लगा दी। उत्तर प्रदेश में मैंने कहा कि पहले दुर्गा पूजा होगी, उसका कार्यक्रम संपन्न होगा, उसके बाद ताजिए के जुलूस भी निकलेंगे। मैंने प्रशासन को कहा कि अगर कहीं दंगा-फसाद का माहौल बनाने की कोशिश की गई तो उससे सख्ती से निपटिए। इस तरह से दुर्गा पूजा भी हुई और ताजिए के जुलूस भी शांतिपूर्वक निकले। लेकिन ऐसे मामले में बंगाल मेंन्यायालय को दखल देनी पड़ी। न्यायालय ने बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यदि उत्तर प्रदेश में पूजा हो सकती है, तो बंगाल में क्यों नहीं? फिर वहां दुर्गा पूजा की अनुमति देनी पड़ी। कानून-व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रहने से प्रदेश के अंदर व्यापक पैमाने पर निवेश भी होता हुआ दिखायी दे रहा है। हमारा साफ संदेश है कि हम उत्तर प्रदेश का अपराधीकरण नहीं होने देंगे। अगर किसी ने कानून को हाथ में लिया तो कानून के अनुसार बहुत सख्त कार्रवाई होगी। आज यह नजीर बनी है।
अन्य अपराधों की बात हुई किन्तु प्रदेश में आर्थिक अपराध को रोकने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए किस तरह के प्रयास हो रहे हैं?
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और अपराध बीते दिनों की बात हो चुकी है। वे दिन लद गए हैं जब उत्तर प्रदेश की राजनीति का व्यापक अपराधीकरण हो चुका था। यहां पर अपराधियों का राजनीतिकरण और अपराधियों का प्राधिकरण हो चुका था। यहां पर तबादलों का औद्योगिकीकरण हो चुका था। नौकरियों का जातिकरण हो चुका था। हमने इन सबसे उबार कर आज प्रदेश को विकास के मुद्दे पर, सुशासन के मुद्दे पर और सुरक्षा के मुद्दे पर तेजी के साथ आगे बढ़ाना प्रारंभ किया है। प्रदेश की धारणा को बदलने में हम लोगों को काफी हद तक सफलता मिली है और उसका परिणाम है कि प्रदेश में व्यापक पैमाने पर निवेश हो रहा है।
एक समय निवेशकों में बहुत उत्साह का माहौल था। आज उसकी जमीनी स्थिति क्या है?
हम लोग डेढ़ लाख करोड़ से ऊपर का निवेश कर चुके हैं। एक लाख करोड़ से ऊपर का निवेश अभी वर्तमान में सामने है जिसको हम तत्काल शुरू करना चाहते हैं। डेढ़ लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश हमारे पास पाईपलाइन में है। मैं समझता हूं यह पहली बार हो रहा है कि कोई सरकार आई और दो साल के अंदर लगभग एक लाख करोड़ का निवेश करा चुकी हो। एक लाख उसकी प्रतीक्षा कर रहा हो और डेढ़ लाख आने वाले समय के लिए पाईपलाईन में हो। मुझे लगता है कि इतना निवेश पिछले 20 साल में भी नहीं हुआ था।
उत्तर प्रदेश को बेहतर बनाने के लिए आपके पास भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
उत्तर प्रदेश का समग्र विकास करना है। उत्तर प्रदेश को देश के समृद्ध राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर देना है। प्रदेश के नौजवानों की बेहतरी के लिए, उनके रोजगार और उनके स्वावलंबन के लिए ठोस कार्ययोजना लागू कर देनी है। राज्य के अंदर बिना भेदभाव के 23 करोड़ जनता की सुरक्षा, उसकी समृद्धि और उनकी खुशहाली के लिए कार्य करना है। इस दिशा में जो कार्य प्रारंभ किए गए हैं उनके परिणाम आ रहे हैं।
विरोधियों द्वारा कहा जा रहा है कि जब-जब भाजपा सरकार में आती है तो नौकरियों पर ताले पड़ जाते हैं। यह कितना सही है?
जो व्यक्ति इन सब चीजों के प्रति अनभिज्ञ है, वही इस प्रकार की बातें बोलेगा। उत्तर प्रदेश में दो साल में सवा दो लाख सरकारी नौकरियां युवाओं को दी गई हैं। निजी क्षेत्रों में 15 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार मिला है और नौकरियां भी मिली हैं। हमने प्रदेश में प्रधानमंत्री स्किल मिशन को तेज किया। दो वर्ष में 8 लाख नौजवानों ने इसमें नामांकन कराया। स्किल मिशन में छह लाख नौजवानों ने अपना प्रशिक्षण पूरा किया जिसमें 4 लाख नौजवानों को रोजगार भी मिल गया है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्राडक्ट’ योजना है, जिसमें परंपरागत उद्यम को बढ़ावा देने के लिए भी हम लोगों ने कार्य किया है। इसमें हम लोगों ने लगभग 5 लाख से अधिक उद्यमियों को आर्थिक स्वावलंबन की ओर अग्रसर किया है। मुझे लगता है कि दो साल में हम लोगों ने जितने रोजगार दिए और जितनी नौकरियां दीं, उतना तो 20 साल में भी नहीं हुआ था। हमारी सरकार ने पुलिस, शिक्षक आदि की नौकरियों को लेकर जो बाधाएं थीं, उन्हें भी खत्म करने का काम किया है। इन पर सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय की रोक लगी हुई थी। हमने सब जगह उचित पैरवी करके बाधाओं को दूर किया है। प्रदेश में 42,000 शिक्षकों की भर्ती लगभग पूरी हो चुकी है। इसमें 8,000 शिक्षा मित्रों का भी समायोजन हुआ है। 68,500 की भर्ती की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। कुछ शिक्षा मित्र अदालत गए हुए हैं। इस कारण वह मामला लटका हुआ है। लगभग 42,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती हो चुकी है। इन दिनों 50,000 पुलिसकर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 50,000 की भर्ती इस समय पाईपलाइन में है।
आपने मथुरा, काशी, वृंदावन, अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से सजाने-संवारने का संकल्प लिया था। यह संकल्प काशी में क्रियान्वित होता दिख रहा है। बाकी जगह ऐसा नहीं हुआ। इसके बारे में आपका क्या कहना है?
प्रयागराज का कायाकल्प कर दिया गया है। इस कारण कुंभ का शानदार आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री जी की अनुकंपा से काशी भी निखर चुकी है। ऐसे ही वृंदावन, अयोध्या जैसी अन्य धार्मिक नगरियों का भी कायाकल्प करने की दिशा में हम प्रयत्नशील हैं।
आजकल तीसरे मोर्चे को लेकर बड़ी सक्रियता दिखाई दे रही है। इस पर क्या कहेंगे?
इनके लिए कोई जगह नहीं बची है। जनता इन्हें जवाब दे चुकी है। इन लोगों के भ्रष्ट आचरण के कारण जनता ने इन्हें नकार दिया है।
पाञ्चजन्य के प्रथम सम्पादक और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की स्मृति में प्रकाशित पाञ्चजन्य के संग्रहणीय अंक की प्रति सम्पादक हितेश शंकर से प्राप्त कर भावुक हो उठे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
 
 
(विस्तार से पढ़ने के लिए पढ़ें पाञ्चजन्य का आगामी अंंक)