सपने के आधार पर खजाना पाने को किले में खुदाई करवा चुकी है कांग्रेस
   दिनांक 19-मई-2019
बाबा सोभन सरकार ने किले में 1 हजार टन सोना दबा होने का सपना देखने का दावा किया था। महज उनके सपने के आधार पर अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने बाबा शोभन के स्वप्न के आधार पर करोड़ों रूपये बर्बाद करके किले में खुदाई कराई थी
जिन लोगों को ‘रडार’ और ‘इंटरनेट’ को लेकर दिक्कत महसूस हो रही है. उन्हें सिर्फ इतना जानने की जरूरत है कि कांग्रेस के राज में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के डौंडियाखेडा गांव में एक बाबा शोभन सरकार चर्चा में आये थे. बाबा शोभन सरकार ने एक सपना देखा था कि राव राम बक्श सिंह के किले में एक हजार टन सोना दबा हुआ है. बाबा के स्वप्न के आधार पर ही भारत सरकार ने वहां पर खुदाई का फैसला कर लिया था. एक हफ्ते तक ड्रामा चला. पूरे देश के टी.वी चैनलों ने सजीव प्रसारण किया. सरकार ने करोड़ों रूपये बर्बाद किए और उसके बाद खुदाई में कुछ नहीं निकला. अंत में शोभन सरकार का सपना झूठा निकला. उस समय किसी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से यह सवाल नहीं पूछा कि आप तो अर्थशास्त्री भी हैं. एक बाबा के स्वप्न मात्र पर आपकी सरकार ने यह कैसे भरोसा कर लिया कि उन्नाव जनपद में एक हजार टन सोना दबा हुआ है? उस बाबा के इस दावे पर कैसे यकीन किया गया कि एक हजार टन सोना मिल जाने से भारत की महंगाई कम हो जायेगी?
यह मामला कोई ज्यादा पुराना नहीं है. यह वर्ष 2013 के अक्टूबर महीने का वाकया है. जब इस देश में इंटरनेट, ई-मेल और सोशल मीडिया को लोग अपने फोन पर ‘आपरेट’ कर रहे थे. इन सबके के लिए कंप्यूटर की जरूरत नहीं थी. तकनीक आधुनिक हो चुकी थी , अधिकतर सुविधाएं फोन पर उपलब्ध होना शुरू हो चुकी थी.
अत्यंत रहस्मयी हैं बाबा शोभन सरकार
बाबा शोभन सरकार की तस्वीर आज तक किसी ने नहीं देखी. वो कभी कैमरे के सामने नहीं आये और न ही उनकी रिकार्डेड आवाज ही किसी ने सुनी. बाबा , भक्तों को काफी दूर से दर्शन देते हैं. बाबा शोभन सरकार का पूरा नाम विरक्तानंद उर्फ़ शोभन सरकार है. उस समय उनकी उम्र करीब 65 वर्ष बतायी गयी थी. इनके शिष्यों का कहना था कि आम तौर पर साधु लोग जिस तरह से माथे पर तिलक आदि लगाते हैं. बाबा शोभन सरकार की वेशभूषा वैसी बिल्कुल भी नहीं है. शोभन सरकार बिल्कुल साधारण लोगों की तरह दिखते हैं. बाबा शोभन, सिर पर साफा पहनते हैं और बदन पर अंगवस्त्रम धारण करते हैं. शुरुआत के दिनों में केवल लंगोटा पहना करते थे. गांव वालों का उस समय कहना था कि वर्षों पहले बाबा रघुनन्दन दास जी ने शरीर छोड़ने से पहले भविष्यवाणी किया था कि एक चमत्कारी युवा उस गांव में आयेगा. बाबा रघुनंदन दास के ब्रह्मलीन होने के करीब 40 वर्ष बाद उस गांव में स्वामी विरक्तानंद आए. गांव वालों ने उनसे वहीं पर रूकने का आग्रह किया. गावं वालों की बात मानकर विरक्तानंद वहीं पर रूक गए. गांव वाले बाद में उन्हें शोभन सरकार के नाम से बुलाने लगे.
जिस समय खजाना ढूंढने के लिए वहां पर जन समूह उमड़ा था. उस समय उनके शिष्यों ने बताया था कि कानपुर देहात के शुक्लन पुरवा में बाबा शोभन सरकार का जन्म हुआ था. इनके पिता का नाम कैलाश नाथ तिवारी था. इन्हें 11 वर्ष की आयु में वैराग्य हो गया . एक हफ्ते से ज्यादा समय तक खुदाई चली. करोड़ों रूपया बर्बाद हुए. इस पर किसी भी सेकुलर मीडिया ने कोई हंगामा नहीं खड़ा किया. धीरे से इस बात को भुला दिया गया कि बाबा के स्वप्न के आधार पर भारत सरकार खुदाई करा रही थी.