ईवीएम के बहाने विपक्ष के खतरनाक इरादे, नतीजों के बाद फैलाई जा सकती है अराजकता
   दिनांक 22-मई-2019
19 मई को आखिरी दौर के मतदान के बाद तमाम चैनलों के एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनती दिख रही है। इसके बाद से पूरे विपक्ष के जो तेवर हैं, उससे इस आशंका को बल मिलता है। विपक्ष की रणनीति ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने की तो है ही। लेकिन इस बार इरादे खतरनाक हैं।

रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नतीजों के बाद सड़कों पर खून बहाए जाने की धमकी दी है 
 
22 मई को पटना में एक प्रेस कान्फ्रेंस हुई। महागठबंधन के घटक रालोसपा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने धमकी दी-ईवीएम यानी इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन के जरिये वोट लूटने की कोशिश हुई, तो सड़कों पर खून बहेगा। यह महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस थी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, राजद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामचंद्र पूर्वे, हम के प्रदेश अध्यक्ष बीएल वैश्यंत्री और वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने उपेंद्र के सुर में सुर मिलाए। तो क्या 23 मई को चुनाव नतीजों के बाद देश भर में अराजकता की कोई साजिश तैयार हो चुकी है। 19 मई को आखिरी दौर के मतदान के बाद तमाम चैनलों के एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनती दिख रही है। इसके बाद से पूरे विपक्ष के जो तेवर हैं, उससे इस आशंका को बल मिलता है। विपक्ष की रणनीति ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने की तो है ही। लेकिन इस बार इरादे खतरनाक हैं।
देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ईवीएम और वीवीपेट के सौ प्रतिशत मिलान की याचिका को पहले ही खारिज कर चुकी थी। लेकिन विपक्ष एग्जिट पोल के बाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अवकाशकालीन बेंच ने कड़े शब्दों के साथ याचिका खारिज की। ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने के लिए विपक्ष किस हद तक जा सकता है, इसके लिए कांग्रेस नेता राशिद अल्वी के बयान पर जरा गौर करें। अल्वी कहते हैं कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जान-बूझकर कांग्रेस को जिताया गया। जिससे लोकसभा चुनाव के समय ईवीएम को जिम्मेदार न ठहरा सकें। अब जरा सोचिए कि बौखलाहट इस हद तक है कि लोकसभा चुनाव का नतीजा आया नहीं और कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि हमें तो तीन राज्यों में ईवीएम से साजिश के तहत जितवाया गया।
चुनाव के नतीजे आने से पहले जरा देश के माहौल और विपक्षी नेताओं की गतिविधियों पर निगाह डालना जरूरी है। यह आपको बता देगा कि संकेत ठीक नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में मतदान के बाद से हिंसा हो रही है। चुन-चुन कर भाजपा के वोटरों को तृणमूल के कार्यकर्ता निशाना बना रहे हैं। चुनाव नतीजे आने के बाद वहां क्या होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। आंध्र प्रदेश में करारी हार की तरफ बढ़ रहे मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हर विपक्षी नेता के दरवाजे पर जा रहे हैं। जब हार तय दिख रही है, तो विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग करके नायडू क्या रणनीति बना रहे होंगे, आप समझ सकते हैं। जरा उनके बयान पर गौर कीजिए। नायडू कहते हैं-फोन टैप करने की तरह ही ईवीएम से छेड़छाड़ करना आसान है। सभी पार्टियां इस सोच में हैं कि कैसे ईवीएम को बचाया जाए। नायडू के ये विचार तब नहीं थे, जब वह इसी ईवीएम के नतीजों से चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता ईवीएम मशीनों के स्ट्रांग रूम की निगरानी कर रहे हैं। अकेले 21 मई को ट्विटर पर दस से ज्यादा वीडियो अपलोड किए गए, जिसमें दिखाने की कोशिश की जा रही है कि ईवीएम बदली जा रही हैं। हालांकि ये सारे वीडियो फेक यानी फर्जी निकले। इनमें अधिकतर वीडियो पुराने हैं और ईवीएम के चुनाव पूर्व या बाद के परिवहन के हैं। आजमगढ़ में पुलिस ने ईवीएम को लेकर अफवाह फैलाते एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। एक और मजेदार आंकड़ा है, जिसका जवाब विपक्षी दल नहीं दे रहे। राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, छत्तीसगढ़, पंजाब, कर्नाटक में विपक्षी दलों की सरकार है। वहां की पुलिस उनकी अपनी है। खुद उनकी अपनी निगरानी में ईवीएम रखी हुई हैं। यानी ढाई सौ से ज्यादा लोकसभा सीटों की ईवीएम विपक्षी दलों की सरकारों की निगरानी में हैं।
ईवीएम की विशेषताएं
- चुनाव आयोग के अनुसार ईवीएम कंप्यूटर नियंत्रित नहीं है, वो अपने आप में स्वतंत्र मशीन हैं। वो इंटरनेट या किसी अन्य नेटवर्क के साथ किसी भी समय जुड़ी नहीं होती हैं इसलिए रिमोट या अन्य किसी डिवाइस के जरिए उन्हें हैक करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
- आयोग का कहना है कि ईवीएम में वायरलैस या किसी बाहरी हार्डवेयर पोर्ट के लिए कोई फ्रीक्वेंसी रिसीवर नहीं है, इसलिए हार्डवेयर पोर्ट, वायरलेस, वाईफाई या ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए किसी प्रकार की टेम्परिंग या छेड़छाड़ संभव नहीं है।
- कंट्रोल यूनिट (सीयू) और बैलेट यूनिट (बीयू) से केवल एन्क्रिप्टेड या डाइनामिकली कोडिड डेटा ही स्वीकार किया जाता है। सीयू द्वारा किसी अन्य प्रकार का डेटा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- आयोग के अनुसार जिन ईवीएम मशीनों का प्रयोग किया जाता है वह स्वदेशी तरीके से बनाई गई हैं। पब्लिक सेक्टर की दो कंपनियां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बंगलुरु एवं इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद में ये मशीनें बनाती हैं।
- ईवीएम मशीनों के सॉफ्टवेयर प्रोग्राम कोड ये दोनों कंपनियां आंतरिक तरीके से तैयार करती हैं।
उन्हें आउटसोर्स नहीं किया जाता। प्रोग्राम को मशीन कोड में कन्वर्ट किया जाता है।
- हर माइक्रोचिप के पास मेमोरी में एक पहचान संख्या होती है। उन पर निर्माण करने वालों के डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं। माइक्रोचिप को हटाने की किसी भी कोशिश का पता लगाया जा सकता है।
हर ईवीएम का होता है सीरियल नंबर
- चुनाव आयोग का कहना है कि हर ईवीएम का एक सीरियल नंबर होता है। निर्वाचन आयोग ईवीएम-ट्रेकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके अपने डेटा बेस से यह पता लगा सकता है कि कौन सी मशीन कहां पर है, इसलिए ईवीएम में किसी तरह की गड़बड़ नहीं हो सकती। 
वीवीपैट
- ईवीएम की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग वीवीपैट (वोटर वेरीफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट) मशीन की मदद ले रहा है। उल्लेखनीय है कि ईवीएम पर सवाल उठाए जाने के बाद ही वीवीपैट का इस्तेमाल किया गया। इस मशीन को ईवीएम मशीन के साथ जोड़ा जाता है। जैसे ही वोट दी जाती है तत्काल एक कागज की पर्ची बाहर निकलती है जिस पर इस बारे में छपा होता है कि किसी उम्मीदवार को वोट दी गई है। साथ में उसका चुनाव चिह्न भी छपा होता है। यह व्यवस्था इसलिए है कि किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस बार मतगणना में ईवीएम से पांच प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा। ये मशीनें औचक तरीके से चुनी जाएंगी।