विकास की बयार में झूमते काशी के मतदाता
   दिनांक 22-मई-2019
                                                                                                                                                  -प्रदीप पंडित
चुनावी समय में काशी यानी नरेंद्र मोदी। गली नुक्कड़ से लेकर, चौक-चौराहों तक हर जगह हर-हर मोदी, घर-घर मोदी ही दिखाई दे रहा है।
काशी में नामांकन से पूर्व रोड शो करते नरेंद्र मोदी
  
जैसे पंछियों की कतार दर कतार एकमार्गी होकर परों को तौलती दरिया के आस-पास इकट्ठी उतरती है, वैसे ही इस समय बनारस की राजनीतिक गाथा तैयार हो रही है। वे जिन्हें बेहतरी की आकांक्षा है, बनारस के साथ देश के विकास की ओर उठते अनथक कदमों की आस है, वे सभी मजहब और विभाजित करती विचारधाराओं को अब निर्मल दिखती गंगा में बहा आए हैं। एक अर्से से बनारस के दशाश्वमेध घाट से मछलियां रुखसत हो गई थीं, अब सोल्लास गंगा मैया की आरती के समय सिर उठाए नजर आती है। मछलियां साफ पानी की निगहवाकी कर रही हैं। वैसे ही यहां की युवा पीढ़ी बीएचयू से लेकर सिंगारा बाजार तक अपने-अपने तर्कों के तरकश से नरेन्द्र मोदी के हक में दलीलें देकर तैरते वोटरों को अपने पक्ष में करने की कसरत करते दिखाई दे रहे हैं। यह किसी प्रासाद के कक्ष का नहीं पूरे चुनाव क्षेत्र का भावुक दृश्य है। इसमें रिक्शे वाले, मजदूर, ई-रिक्शाचालक, सरकारी कर्मचारी अर्थात् समाज के विभिन्न तबकों के असरदारी चेहरे शमिल हैं। ई-रिक्शा में यात्रा करते कुछेक लोगों ने बताया हमारा वोट सिर्फ मोदी के लिए है। लेकिन उन्होंने अपनी अपेक्षाएं भी बताईं। ऐसी अपेक्षा जैसे बड़े होते बच्चे सम्पूर्ण नेह और आशा में घरवालों को बताते हैं। उनमें खीज, झूंझ और बदला लेने के लिए गुस्से में बनी गुठ्ठियां नहीं थी। लेकिन बेहतरी के लिए विकास की अदम्य इच्छा थी। लंका मोहल्ले की इंजीनियरिंग की छात्रा सरिता ने बताया कि भाजपा को बेरोजगारी को भी ध्यान रखना चाहिए। बड़ा बाजार निवासी शैलेन्द्र जायसवाल की राय यह है कि विरोधियों को छोड़ दें तो शेष किसी को मोदी विजय की शंका नहीं है। यहां चर्चा सिर्फ इस बात की है कि जीत का अंतर कितना होगा। उन्होंने कश्मीर, आतंकवाद और पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि आज तक ऐसा कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ, जिसने ऐसा और इस कदर मुंहतोड़ जवाब दिया है।बनारस में समस्याएं हंै और वे सब अब तक सुलझी नहीं, लेकिन इससे प्रधानमंत्री मोदी अवगत हैं। बनारस के जन-संबोधन में उन्होंने खुद कहा कि बेरोजगारी, अतिक्रमण, जाम की समस्या और अधूरे पड़े विकास कार्य और गंगा सफाई जैसे मुद्दे आम जन-जीवन को प्रभावित करते हैं। बताना जरूरी है कि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री रहते हुए 9 बार काशी आए और उन्होंने 42 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की धनराशि की योजनाओं की आधार शिला रखी। वे कहते रहे हैं कि बनारस से उनका रिश्ता सिर्फ बैलेट का नहीं भावनात्मक है।अविनाशी काशी को अलौकिक रूप देने का महायज्ञ प्रदान करना मेरे लिए सौभाग्य है और पूरा संसदीय क्षेत्र वाराणसी नार्थ, साउथ, केन्टोनमेन्ट उन पर भगवा फहराकर ऐतबार जता रहा है।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान काशी में 42 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की धनराशि की योजनाओं की आधारशिला रखी है
 
बावजूद इसके 'विश्वनाथ कॉरिडोर' की बड़ी और जरूरी योजना पर यहां के निवासियों का उल्लेख एक दूसरी तरह की बहस खड़ी करने की कोशिश की गई। अब भी गाहे-बगाहे मोदी विरोधी विमर्श खड़ा करने का असफल प्रयास कर रहे हैं। लेकिन स्थल तक जाने पर आप हकीकत से रूबरू हो सकते हैं। वहां के लोगों ने बताया कि वास्तविकता यह है कि अंतराल से जीर्ण हो चुके मकानों की हालत इतनी खराब हो गई थी कि रहना मुश्किल हो रहा था और बेचने जाएं तो कोई उनका दाम 25-30 लाख रुपए देने को तैयार नहीं होता था। आज सरकार ने उसका मुआवजा करीब तीन गुना कर दिया है। यही वह वजह है जो इसे मुद्दा नहीं बना सकी।
 
इसलिए बनारस चुनावी गर्मी के बीच भी अपनी जमीनी सोच, अध्यात्म, संस्कृति से एक पल भी दूर नहीं दिखाई देता। मदनमोहन जैसे बनारसी शख्स का मानना है कि आज की परिस्थिति में समाजवादी पार्टी और बसपा मुसलमानों को डराकर वोट हासिल नहीं कर पाएंगे। वैसे इस समय बचे उम्मीदवारों में मोदी के सम्मुख सपा-बसपा गठबंधन की शालिनी यादव और कांग्रेस से अजय राय मैदान में है। शालिनी यादव पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता श्यामलाल यादव की पुत्रवधु हैं। शालिनी कांग्रेस के टिकट पर वाराणसी से महापौर का चुनाव लड़ चुकी हैं। वह बड़ी मुश्किल से अपनी जमानत बचा पाई थी।
 
इस बार उनके कथन और जहन में यादव, मुस्लिम और दलित वोटों का अंकगणित है जिसके चलते वे चुनौती के रूप में खुद को मान रही है। वस्तुस्थिति यह है कि इस संसदीय क्षेत्र में यादव, दलित, मुस्लिम ऐसा कोई समीकरण है ही नहीं। इसी तरह कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय भूमिहार और मुस्लिम वोटों के जरिए मोदी के सामने खड़े है। अजय स्वयं भूमिहार हैं और 2014 में भी लोकसभा चुनाव लड़े थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। इस क्षेत्र में व्यक्तिगत समीकरण थोड़ा-बहुत रोहनिया और सेतापुरी विधानसभा में है। लेकिन हकीकत में देखें तो संख्यात्मक गणित के समीकरण को संतुलित करके बैठने वालों के हाथ कुछ नहीं लगेगा। विजय फिर जनता की और लोकतंत्र की होगी।