राहुल हुए फेल, कांग्रेस के लिए भी बने बाधा
   दिनांक 24-मई-2019

महात्मा गौतम बुद्ध जब वैराग्य के लिए महल से निकल रहे थे तभी खबर आई कि उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है. उनके मुख से निकला -"राहुलो जातो !" उस समय वहां पाली भाषा का प्रचलन था. पाली भाषा में 'राहुलो जातो' का अर्थ है कि बाधा उत्पन्न हो गई. इसीलिए गौतम बुद्ध के बेटे का नाम राहुल पड़ा. वर्तमान समय में राहुल गांधी भी कांग्रेस के लिए एक बड़ी बाधा बन चुके लगते हैं. इस बार के लोकसभा चुनाव में अपने पिता राजीव गांधी की परम्परागत सीट भी राहुल गांधी हार गए. पूरे उत्तर प्रदेश में एक सीट रायबरेली को छोड़कर हर एक सीट पर कांग्रेस चुनाव हार गई. अधिकतर सीटों पर तो कांग्रेस तीसरे नंबर पर भी नहीं पहुंच पाई. प्रियंका गांधी ने हर जतन किये मगर उनका भी जादू नहीं चला. मध्य प्रदेश से आये ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कोई कमाल नहीं दिखा सके. यह कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार है. इसके बाद कांग्रेस के भीतर राहुल के इस्तीफे की मांग उठना भी लाजिमी ही है. भाजपा के केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली के शब्दों में कहें तो " राहुल गांधी , किसी राष्ट्रीय पार्टी के ऐसे पहले अध्यक्ष हैं जिनके हिस्से में इतनी ज्यादा हार दर्ज हो चुकी है." कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कई प्रदेशों एवं लोकसभा का चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी का राजनीतिक करियर अब दाव पर लग चुका है.
अमेठी एक ऐसी सीट रही है जहां पर लोकसभा चुनाव में ही राहुल गांधी जाते थे और वहां के लोगों को यह बताते थे कि अमेठी से तो उनके परिवार का बहुत लगाव रहा है. चुनाव के दौरान प्रचार करके वापस लौट जाते थे. अमेठी की जनता ने हमेशा राहुल गांधी को चुनाव जिताया. मगर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जब स्मृति ईरानी वहां से चुनाव लड़ीं तो अमेठी की जनता को भरोसा हो गया कि स्मृति ईरानी अमेठी का विकास करेंगी. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को सफलता नहीं मिली मगर उसके बाद वह लगातार अमेठी जाती रहीं और वहां की जनता के सीधे संपर्क में बनी हुई थीं. विगत, पांच वर्षों में स्मृति ईरानी ने अमेठी में ठप पड़ चुके विकास को गति प्रदान की. वहां पर सड़क, शिक्षा एवं अस्पतालों की स्थिति को बेहतर कराया. अमेठी की जनता को यह समझ में आ गया कि विगत कई दशकों से उन्हें छलावा ही मिल रहा था. धरातल पर विकास तो वर्ष 2014 के बाद दिखाई देना शुरू हुआ. गत 5 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनाव हरा कर ट्वीटर पर लिखा कि "कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों ...."
पांचजन्य ने चुनावी कवरेज के दौरान लगातार इस बारे में दावा किया कि राहुल गांधी चुनाव हार रहें हैं. राहुल गांधी पिछले लोकसभा चुनाव में ही हार की कगार पर पहुंच चुके थे. मतदान के समय वह मतदान केंद्र में अन्दर प्रवेश करके मतदाताओं को हाथ का पंजा दिखा कर कांग्रेस को वोट देने के लिए प्रार्थना कर रहे थे.
इस बार भी जिस दिन अमेठी लोकसभा का चुनाव हो रहा था. उन्होंने मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की थी मगर उनकी सारी कोशिशें नाकाम हो गयीं. राहुल गांधी ने अपनी हार स्वीकार की. जनता का फैसला आने के बाद उन्होंने राफेल संबंधी आरोप की बात नहीं की.
यह बेहद शर्मनाक हार है. राहुल गांधी को चुनाव शुरू होने से पहले ही यह अंदाजा हो गया था कि वह चुनाव हार सकते हैं. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बहुत करीबी मुकाबले में वह चुनाव जीत पाए थे. राहुल गांधी ने अमेठी के स्थानीय नेताओं से विचार विमर्श भी किया था. एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हुआ था जिसमे अमेठी में कोई कांग्रेस के नेता उन्हें सलाह दे रहे हैं कि राहुल जी आप कोई और सीट तलाश कर लीजिये.
राहुल गांधी वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़े. यह मुस्लिम और ईसाई बहुल क्षेत्र हैं इसलिए राहुल गांधी के लिए वायनाड लोकसभा सीट ढूंढी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा में कहा कि “राहुल गांधी को चुनाव जिताने के लिए दूरबीन से खोज कर के वायनाड सीट निकाली गई है.” आपातकाल के बाद कांग्रेस की जो दशा हुई थी. उससे भी खराब स्थिति में कांग्रेस पहुंच चुकी है.
राहुल गांधी ने इस बार के चुनाव में एक नया धमाका करने की कोशिश की गई थी. उन्होंने अपनी बहन प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी थी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जिम्मा ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया था. कांग्रेस ने इस बात को बड़े ही जोर - शोर से प्रचारित किया कि प्रियंका गांधी आ गई हैं. अब कांग्रेस की राजनीति में एक नया बदलाव आयेगा. तब उत्तर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने एक बयान दिया था कि “प्रियंका गांधी हर चुनाव में आती रहीं हैं. वह केवल अमेठी और रायबरेली में ही प्रचार करके लौट जाती थीं. इस बार वह पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटों पर प्रचार करेंगी. इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है.” सिद्धार्थ नाथ सिंह का यह आकलन बिल्कुल सच साबित हुआ. जनता ने प्रियंका गांधी को नजदीक से जा कर देखा तो मगर उनकी पार्टी के किसी प्रत्याशी को वोट नहीं दिया.
राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति और बेतुके बयानों के कारण जनता ने उन्हें नकार दिया. राहुल गांधी देश में सरकार बदलने की बात करते हैं और स्वयं को “पी एम मटेरियल” मानते है मगर वह अपनी अमेठी लोकसभा सीट हार गए. पूरे देश ने राहुल गांधी की राजनीति को स्पष्ट रूप से नकार दिया है.