हेडमास्टर मोदी ने नये सांसदों को पढ़ाये ये 6 पाठ
   दिनांक 26-मई-2019
एनडीए के नवनिर्वाचित संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मविश्वास से लबरेज थे। आत्मविश्वास के साथ ही उनके चेहरे पर था प्रचंड बहुमत से मिली जिम्मेदारी का भार और इस जिम्मेदारी में कोई चूक न हो, इसके प्रति सतर्कता। उन्होंने कहा भी कि प्रचंड जनादेश जिम्मेदारी को बढ़ा देता है, नये उमंग, नये उत्साह से आगे बढ़ते जाना है। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने नवनिर्वाचित सांसदों को सकारात्मक राजनीति का पाठ पढ़ाया और खुद हेडमास्टर की भूमिका में नजर आये।
 
मतदाता को सेवाभाव स्वीकार : प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भारतीय मतदाताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सत्ताभाव भारत का मतदाता कभी स्वीकार नहीं करता है। ये देश परिश्रम की पूजा करता है। ये देश ईमान को सर पर बिठाता है। यही इस देश की पवित्रता है। सत्ता में रहने पर सेवा से अच्छा कोई मार्ग नहीं है। मोदी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से मेरा आग्रह रहेगा कि मानवीय संवेदनाओं के साथ अब कोई भी हमारे लिए पराया नहीं रह सकता है। इसकी ताकत बहुत बड़ी होती है। दिलों को जीतने की कोशिश करेंगे। उन्होंने समझाया कि वाणी से, बर्ताव से, आचार से, विचार से, हमें अपने आपको बदलना होगा।
वीआईपी संस्कृति से बचें : हेडमास्टर मोदी ने सांसदों से वीआईपी संस्कृति से बचने का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि सांसदों को जरूरत पड़ने पर अन्य नागरिकों की तरह कतारों में भी खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीआईपी कल्चर से देश को बड़ी नफरत है। हम भी नागरिक हैं तो कतार में क्यों खड़े नहीं रह सकते। मैं चाहता हूं कि हमें जनता को ध्यान में रखकर खुद को बदलना चाहिए। लाल बत्ती हटाने से कोई आर्थिक फायदा नहीं हुए, जनता के बीच अच्छा मैसेज गया है।
पद के चक्कर में न पड़ें : मोदी ने नवनिर्वाचित सांसदों, खासकर पहली बार चुन कर आये सांसदों को सबक दिया कि वे कयासों के फेर में न पड़ें और जनता की सेवा का मार्ग अपनायें। उन्होंने कहा कि दिल्ली आकर अच्छे-अच्छे फँस जाते हैं। कोई भी मंत्री बनने के बहकावे में न आये। उन्होंने कहा कि इस देश में बहुत ऐसे नरेंद्र मोदी पैदा हो गये हैं, जिन्होंने मंत्रिमंडल बना दिया है। जो भी जीतकर आये हैं, सब मेरे हैं। सरकार और कोई बनाने वाला नहीं है, जिसकी जिम्मेवारी है, वही बनाने वाले हैं। अखबार के पन्नों से न मंत्री बनते हैं, न मंत्रिपद जाते हैं। लोग झूठे फोन करते हैं। मंत्री पदों के लिए मीडिया की खबरों में चल रहे नामों पर भरोसा न करें, नियमों के अनुसार जिम्मेदारी दी जायेगी। उन्होंने हिदायत दी कि आधिकारिक सूचना भी आये तो पहले एक बार पुष्टि करें।
 
छपास, दिखास की प्रवत्ति से बचें : मोदी ने नव निर्वाचित सांसदों को बड़बोलेपन और मीडिया में छपने एवं दिखने की उत्कंठा से बचने की नसीहत दी। मोदी ने कहा कि आजकल ऑफ द रिकॉर्ड कुछ भी नहीं होता है। लोग आपके बयान को रिकॉर्ड कर सकते हैं। मोदी ने कहा कि बड़बोलापन जो होता है, टीवी के सामने कुछ भी बोल देते हैं। जो बोल देते हैं तो 24-48 घंटे तक चलती है और अपनी परेशानी बढ़ती है। कुछ लोग सुबह उठकर जब तक राष्ट्र के नाम संदेश नहीं दे लेते हैं, उन्हें चैन नहीं पड़ता। मीडिया को भी पता होता है कि कुछ नमूने हैं, वहाँ सुबह पहुँचो, गेट के बाहर खड़े रहो, निकल के कुछ न कुछ तो बोलेगा ही। ऐसी-ऐसी चीजें होती है, जिनका हमसे लेना-देना नहीं होता। आपको इससे बचना चाहिए। नये सांसदों को गुर देते हुए मोदी ने कहा कि कोई कुछ पूछे तो उसे कहें कि एक घंटा रुको, जाँच करता हूँ, अन्यथा मूल बात रह जायेगी और रात तक आपका बयान और ना जाने क्या-क्या बयान आ जायेंगे। उन्होंने कहा कि नये और पुराने जो साथी आये हैं, उनसे आग्रह है, इनसे बचें।
जनता सर्वोच्च, कोई पराया नहीं : मोदी ने कहा कि जनप्रतिनिधि के लिए कोई भेदभाव की सीमा-रेखा नहीं होती। जो हमारे साथ थे, हम उनके लिए भी हैं, जो भविष्य में हमारे साथ होंगे, हम उनके लिए भी हैं। उन्होंने कहा कि हम न हमारी हैसियत से जीतकर आते हैं, न कोई वर्ग हमें जिताता है, न मोदी हमें जिताता है। हमें सिर्फ देश की जनता जिताती है। हम जो कुछ भी हैं मोदी के कारण नहीं, जनता जनार्दन के कारण हैं। हम यहाँ अपनी योग्यता के कारण नहीं हैं, जनता जनार्दन के कारण हैं।
अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतें : नरेंद्र मोदी ने सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास के लक्ष्य को अपनी नयी सरकार के मूलमंत्र के रूप में पेश करते हुए कहा कि देश में गरीब एक राजनीतिक संवाद-विवाद का विषय रहा। गरीबों के साथ जो छल चल रहा था, उस छल में हमने छेद किया और सीधे गरीबों के पास पहुँचे हैं। गरीबों के साथ जैसा छल हुआ, वैसा ही छल देश के अल्पसंख्यक के साथ हुआ है। उन्हें भ्रमित-भयभीतरखा गया। वोट बैंक राजनीति में छलावा, काल्पनिक भय बनाया गया और उन्हें दबाकर रखा गया। अच्छा होता कि माइनॉरिटी की शिक्षा, स्वास्थ्य की चिंता की जाती। 2019 में आपसे अपेक्षा करने आया हूँ कि हमें इस छल को भी छेदना है। हमें विश्वास जीतना है। हमें इस छल को छेद कर उन्हें साथ लेकर चलना है।