उत्तर प्रदेश में सिर्फ वोट वोटकटवा बनी कांग्रेस
   दिनांक 03-मई-2019
ऐसे समय में जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी माता सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा गांधी के पति राबर्ट वाड्रा घोटालों में जमानत पर हैं, ये साजिशें समझ आती हैं. रणनीति वही है, बिलो द बेल्ट वार करना. खुद राहुल गांधी ने स्वीकार किया है कि मोदी की ताकत उनकी भ्रष्टाचार मुक्त छवि है. राहुल गांधी दावा करते हैं कि मैं उनकी छवि को तार-तार कर दूंगा
ऊंचाहार में सपा के मंच पर पहुंची प्रियंका गांधी
कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, या साजिश कर रही है. चौथा चरण खत्म होते-होते कांग्रेस के नेतृत्व का नकाब उतर गया है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी ने साफ कह दिया है कि उत्तर प्रदेश में जहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत नहीं है, वहां वह भारतीय जनता पार्टी के वोट काटने के लिए चुनाव लड़ रही है. मतलब ये कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन को फायदा पहुंचाने के लिए कांग्रेस चुनाव मैदान में है. ये सपा-बसपा और कांग्रेस के बीच गठजोड़ का इकबालिया बयान है. रणनीति है कि हिंदू वोटर को कन्फ्यूज किया जाए, जिससे हिंदू वोटों का बंटवारा हो. ऐसे समय में जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी माता सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा गांधी के पति राबर्ट वाड्रा घोटालों में जमानत पर हैं, ये साजिशें समझ आती हैं. रणनीति वही है, बिलो द बेल्ट वार करना. खुद राहुल गांधी ने स्वीकार किया है कि मोदी की ताकत उनकी भ्रष्टाचार मुक्त छवि है. राहुल गांधी दावा करते हैं कि मैं उनकी छवि को तार-तार कर दूंगा.
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का जब उत्तर प्रदेश में गठबंधन हुआ, तो सबको ताज्जुब था कि कांग्रेस को दूध से मक्खी की तरह क्यों निकाल फेंका गया है. अखिलेश यादव और मायावती कांग्रेस को पूरे चुनाव के दौरान पानी पीकर कोस कर रहे हैं. कांग्रेस भी ये दिखाने की कोशिश करती रही कि हम अपने दम पर मैदान में उतरे हैं. लेकिन कांग्रेस महासचिव एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका वाड्रा गांधी के एक बयान ने परदे के पीछे के खेल को जनता के सामने ला दिया. प्रियंका गांधी एक मई को अमेठी में थी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संगठन कमजोर है यहां, हमें मजबूत बनाना है. सिर्फ जीतने के लिए राजनीति थोड़े ही होती है? मेरी रणनीति बिलकुल साफ है. 2019 में भाजपा को यूपी से हराना है. जहां हमारे उम्मीदवार अच्छा लड़ रहे हैं. जहां उम्मीदवार मजबूत हैं, वहां कांग्रेस जीतेगी. जहां हमारे उम्मीदवार थोड़े हल्के हैं, वहां हमने ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जो भाजपा के के वोट काट सकें. कांग्रेस बीजेपी के वोट काटेगी.
प्रियंका गांधी के बयान से साफ हो गया कि कांग्रेस के अकेले उतरने से जो मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था, उसका कांग्रेसी कोना साजिश है. देश की सबसे बुजुर्ग पार्टी की यह हालत हो चुकी है कि वह वोटकटवा भर बनकर रह गई है. प्रियंका जहां हैं, जिस बैकग्राउंड से हैं, वह यह सोच सकती हैं कि जनता उनके झांसे में आ जाएगी. आप जनता के वोट के साथ खिलवाड़ करने की योजना बनाएंगे, और जनता इसका मोहरा बन जाएगी, यह सपना सिर्फ कांग्रेस का नेतृत्व ही देख सकता है. परदे के पीछे का ये खेल सामने आने से सपा-बसपा दोनों में ही बेचैनी है. कांग्रेस नाम की आग से अपना दामन बचाने का असफल प्रयास करते हुए अखिलेश यादव ने इस बयान पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता जानती है कि भाजपा और कांग्रेस एक ही हैं. उत्तर प्रदेश की जनता महागठबंधन के साथ है. अखिलेश भले ही ये प्रतिक्रिया दे रहे हों, लेकिन प्रियंका गांधी ने अमेठी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. समाजवादी पार्टी की सभा में उन्होंने मंच से भाजपा को हराने की अपील की. समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडेय ने दो मई को ऊंचाहार में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के समर्थन में सभा का आयोजन किया. प्रियंका इसमें मुख्य अतिथि की हैसियत से शामिल हुई. कांग्रेस और सपा-बसपा के गठजोड़ का ही नतीजा है कि राहुल गांधी की संसदीय सीट अमेठी और सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से गठबंधन ने उम्मीदवार नहीं उतारा है.
प्रियंका गांधी के इस बयान और परदे के पीछे के गठबंधन पर जरा गौर कीजिए. भारतीय जनता पार्टी के वोट काटने की रणनीति के तहत कांग्रेस ने तमाम ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जो हिंदू वोटों का बंटवारा कर दें. एक ओर मायावती मुसलमानों से अपील कर रही हैं कि एकजुट होकर गठबंधन को वोट करें. दूसरी तरफ, प्रियंका की कांग्रेस हिंदुओं के वोट बांटने के लिए उम्मीदवार उतार रही है. कुछ सीटों का उदाहरण लेते हैं. मसलन रामपुर. यहां जहरीले बोल वाले सपा नेता आजम खान की राह आसान करने के लिए कांग्रेस ने संजय कपूर को मैदान में उतारा है. कैराना में सपा और बसपा की राह आसान करने के लिए कांग्रेस ने हरेंद्र मलिक के रूप में एक जाट को चुनाव में उतारा. मेरठ सीट पर गठबंधन का साथ देने के लिए हरेंद्र अग्रवाल के रूप में एक वैश्य प्रत्याशी दिया. ठीक ऐसे ही अलीगढ़ में चौधरी बिजेंद्र सिंह को कांग्रेस ने लड़ाया है. गोरखपुर से कांग्रेस मधूसूदन तिवारी को मैदान में उतारा है. आप इन प्रत्याशियों के चयन पर जरा गौर कीजिए. ये भाजपा के कोर वोटबैंक वाले उम्मीदवार हैं. इन सीटों पर कांग्रेस की रणनीति यह है कि मुस्लिम वोट एकजुट होकर गठबंधन को मिले और हिंदू मतों में बिखराव हो.
कांग्रेस की इस आत्मघाती रणनीति के पीछे यही सोच है कि किसी भी तरह मोदी को रोको. इसके लिए कांग्रेस आत्मघाती मिशन पर है. राहुल गांधी अमूमन साक्षात्कार नहीं देते हैं. लेकिन एक पत्रिका को दिए प्रायोजित साक्षात्कार में उनसे रणनीति के बारे में पूछा गया. उन्होंने कहा-मैंने प्रियंका और ज्योतिरादित्य सिंधिया को साफ कह दिया है, किसी भी कीमत पर भाजपा को हराना है. इस रणनीति का दूसरा पहलू भी राहुल गांधी की अपरिपक्वता के कारण सामने आ गया. एक सवाल के जवाब मैं उन्होंने बताया कि मैंने अपने कार्यकर्ता से पूछा कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी ताकत क्या है. कार्यकर्ता ने कहा कि उनकी ताकत बेदाग और ईमानदार छवि है. राहुल गांधी ने कहा कि मैं उनकी इस छवि को ही तार-तार कर दूंगा. अब आप समझ सकते हैं कि चौकीदार चोर और राफेल को लेकर बेसिर-पैर के आरोप किस रणनीति का हिस्सा हैं.