क्या प्रायोजित था राहुल गांधी का इंटरव्यू
   दिनांक 04-मई-2019
इंटरव्यू की रिकार्डिंग कांग्रेस के कब्जे में है और इंडिया टुडे ग्रुप अब सफाई दे रहा है कि साक्षात्कार सिर्फ प्रिंट के लिए हुआ था. ये बात अलग है कि इंटरव्यू की तस्वीरों में राहुल गांधी मैपल माइक पहने हैं. इंटरव्यू अपने आप में एक मजाक है. खुद राहुल गांधी इसमें कह रहे हैं कि मैं नरेंद्र मोदी की ईमानदार व बेदाग छवि को तार-तार कर दूंगा. कीचड़ उछालने की ऐसी स्वीकारोक्ति राजनीति में मिलनी मुश्किल है.
राहुल गांधी कुछ भी नया करने के लिए चलते हैं, तो वह कांग्रेस के लिए आपदा बन जाता है. चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमाम अखबारों, चैनलों को इंटरव्यू दे रहे हैं. ये इंटरव्यू सुर्खियां बटोर रहे हैं. हर क्षेत्र में मोदी को पीछे छोड़ने की ठाने राहुल गांधी ने इंडिया टुडे को एक इंटरव्यू दिया. ये इंटरव्यू अब इंडिया टुडे के लिए मुसीबत का सबब बन गया है और कांग्रेस के लिए गले की फांस. इस इंटरव्यू की रिकार्डिंग कांग्रेस के कब्जे में है और इंडिया टुडे ग्रुप अब सफाई दे रहा है कि साक्षात्कार सिर्फ प्रिंट के लिए हुआ था. ये बात अलग है कि इंटरव्यू की तस्वीरों में राहुल गांधी मैपल माइक पहने हैं. इंटरव्यू अपने आप में एक मजाक है. खुद राहुल गांधी इसमें कह रहे हैं कि मैं नरेंद्र मोदी की ईमानदार व बेदाग छवि को तार-तार कर दूंगा. कीचड़ उछालने की ऐसी स्वीकारोक्ति राजनीति में मिलनी मुश्किल है।
2019 का चुनाव अपने मध्य में आते-आते बहुत स्पष्ट संकेत देने का लगा है. इन संकेतों का असर कांग्रेस के आला नेतृत्व पर साफ नजर आने लगा है. पहले पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने ये स्वीकार कर लिया कि हम जहां नहीं जीत सकते, वहां हम भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. मतलब कांग्रेस ने ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जो भाजपा के वोट काटें. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का संगठन ढह चुका है. बचे-खुचे कार्यकर्ताओं का हौसला प्रियंका गांधी के इस बयान से धराशायी हो गया. कांग्रेस का कार्यकर्ता समझ ही नहीं पा रहा है कि वह आखिर किसलिए काम कर रहा है. इसी माहौल में कांग्रेस को दूसरी चोट लगी.
 
इंडिया टुडे ने दो मई को बड़े जोर-शोर के साथ राहुल गांधी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के टीजर चलाने शुरू किए. समां बांधा गया कि राहुल गांधी का ये इंटरव्यू बेहद सनसनीखेज होगा. इसके प्रसारण के टाइम का भी ऐलान कर दिया गया. इंडिया टुडे के ट्वीटर हैंडिल से बाकायदा इस इंटरव्यू को देखने के लिए समय की घोषणा कर दी गई. चंद घंटे बाद इंडिया टुडे ने ये इंटरव्यू अपने पोर्टल पर प्रकाशित कर दिया. अब जिस इंटरव्यू को लेकर इतना शोर मचाया गया था वह इस तरह चुपचाप प्रिंट में क्यों डाल दिया गया, ये एक नया रहस्य बन गया है. इंडिया टुडे ने ट्वीट करके सफाई दी है कि राहुल गांधी का ये इंटरव्यू प्रिंट के लिए था. इसे चैनल पर प्रसारित करने का कोई कार्यक्रम नहीं था. लेकिन इंटरव्यू की तस्वीरों में राहुल गांधी मैपल माइक पहने हैं, जो सामान्य ज्ञान की बात है कि वीडियो प्रसारण के लिए पहना जाता है. इस पर इंडिया टुडे की तरफ से कहा गया है कि राहुल गांधी का इंटरव्यू कांग्रेस ने रिकॉर्ड किया है. इसकी रिकॉर्डिंग कांग्रेस के पास है, जो चैनल को उपलब्ध नहीं कराई गई है.
चुनाव के समय में कौन राजनीतिक दल होगा, जो ये नहीं चाहेगा कि उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष का इंटरव्यू चैनल पर प्रसारित हो. लेकिन कांग्रेस खुद इसका प्रसारण नहीं चाहती, तो दाल में कुछ काला है. असल में इस इंटरव्यू की क्वालिटी इतनी घटिया है कि ये इंटरव्यू कम, मजाक ज्यादा लगता है. इसकी ट्रांसस्क्रिप्ट पढ़कर आप समझ जाएंगे कि इस इंटरव्यू का प्रसारण कांग्रेस के लिए किसी दुर्घटना से कम नहीं होगा. इसमें राहुल गांधी तमाम मुद्दों पर बात कर रहे हैं. लेकिन हर सवाल में उनकी सुई राफेल और अनिल अंबानी पर आकर रुक जाती है. सवाल भी प्रायोजित किस्म के हैं. जैसे क्या आपकी 72 हजार रुपये देने की योजना वैसा ही वादा तो साबित नहीं होगी, जैसा कि नरेंद्र मोदी ने सबके खाते में 15 लाख रुपये डालने के लिए कहा था. ये कैसा सवाल है. यह स्थापित तथ्य है कि 2014 के चुनाव विदेशी बैंकों में काले धन की मात्रा का उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा था कि यह धनराशि अगर वापस आ जाए, तो हर आदमी के हिस्से में 15 लाख रुपये आ सकते हैं. इस सवाल से ही साबित होता है कि ये सवाल किसी रिपोर्टर का था या कांग्रेस कार्यकर्ता का.
इस इंटरव्यू में तमाम सवाल ऐसे ही हैं. लेकिन एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी सच स्वीकार कर लेते हैं. राहुल गांधी कहना चाहते हैं कि उनका विश्वास निरंतरता में है. निरंतर काम करने से कुछ भी हो सकता है. फिर वह उदाहरण देते हैं. उन्हीं के शब्दों में- मैं अपने कार्यकर्ता से पूछता हूं कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी ताकत क्या है. मेरा कार्यकर्ता मुझे बताता है कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी ताकत उनकी बेदाग और ईमानदार छवि है. तो मैं उस कार्यकर्ता को बताता हूं कि मैं नरेंद्र मोदी की इस छवि को ही तार-तार कर दूंगा. मतलब ये कि राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि उनके सारे आरोप नरेंद्र मोदी की छवि को खराब करने का प्रयास हैं. तो क्या ये मान लिया जाए कि वह राजनीति में कीचड़ उछालने का खेल खेल रहे हैं.
इस पूरे प्रकरण से एक बार फिर मीडिया के एक तबके के कांग्रेस प्रेम का मसला सामने आता है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार से गैर राजनीतिक व अनौपचारिक बातचीत की थी. ये बातचीत मोदी के व्यक्तित्व के अब तक के कई अनछुए व अनदेखे पहलुओं से रूबरू कराती है. इस बातचीत को लेकर मीडिया के एक तबके ने खूब आरोप उछाले, उंगलियां उठाईं. लेकिन इंटरव्यू फिक्सिंग जैसा स्पष्ट मामला होने के बाद इस मसले पर यही संस्थान और पत्रकारिता के कथित ठेकेदार खामोश हैं.