भारत की नयी उठान
   दिनांक 06-मई-2019

 
लोकतंत्र के महापर्व की प्रक्रिया के चौथे चरण में पहुंचते-पहुंचते इस उत्सव की आधी परिक्रमा पूरी हो चुकी है। कुल लोकसभा सीटों में बहुमत तय करने की दृष्टि से जरूरी आंकड़ा ईवीएम मशीनों की तिजोरी में बंद हो चुका है। इसके साथ ही विश्व परिदृश्य से भविष्य में उत्तरोत्तर मजबूत होते भारत के संकेत उभरने लगे हैं। जिस समय चीन ने संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की राह से तकनीकी रोड़ा हटाया, लगभग उसी समय दो अन्य घटनाक्रम ऐसे थे जिनपर लोगों का न ज्यादा ध्यान गया और न मीडिया में ज्यादा चर्चा हुई।
अमेरिका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन शृंगला ने वॉशिंगटन में विश्व मामलों के प्रतिष्ठित विचार समूह के मंच से एक रेखांकित करने योग्य घोषणा की। 'कारनेज एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' द्वारा आयोजित संवाद में अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर वैश्विक संतुलन को बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत न तो इस मामले पर आंखें मूंदेगा और न ही इसे बर्बाद होते हुए देखेगा। साथ ही उनका कहना था कि संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में जमीनी परिस्थितियों के अनुसार बदलाव जरूरी हो गए हैं।
इस घोषणा को बढ़ते, साख बनाते भारत के उस सकारात्मक उद्घोष की तरह देखा जाना चाहिए जो नेहरूवादी विदेश नीति तले दशकों का दबाव और उपेक्षा झाड़कर खड़ा हो रहा है। इसके अगले ही दिन अमेरिका ने एक मई को इस्लामाबाद में पत्रकारों के सामने पाकिस्तान को आईना दिखाया। दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की प्रभारी विदेश उपमंत्री एलिस वेल्स ने पाकिस्तान के इस दावे को खारिज कर दिया कि भारत उसके यहां आतंकवाद फैलाने के लिए अफगानिस्तान का प्रयोग कर रहा है। अमेरिका ने कहा कि इस बारे में कोई भी साक्ष्य पाकिस्तान के दावे के पक्ष में नहीं है। भारत के भीतर हम पाकिस्तान के ऐसे दावों की सहज ही खिल्ली उड़ाते हैं, उड़ा सकते हैं। किन्तु विश्व मंच पर किसी ऐसे आरोप का खारिज किया जाना बेहद महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण इसलिए भी क्योंकि इससे क्षेत्र में सबल होते भारत की सकारात्मक छवि जुड़ी है। कुलभूषण जाधव प्रकरण में यह आरोप बुनते हुए ही तो पाकिस्तान ने भारत को लांछित करने वाली कूटनीति का जाल बुना है! पाकिस्तान कहता रहा है कि ईरान के रास्ते उस ओर घुस आए जाधव को उसने बलूचिस्तान के अशांत-संवेदनशील भाग से गिरफ्तार किया है जबकि भारत इस तथ्य को रेखांकित करता रहा है कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव का ईरान से अपहरण किया है। अमेरिका की तरफ से एक बात और आई है जो पाकिस्तानी सेना के संदर्भ में भारत के दावे को पुष्ट करती है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से आईएसआई के संबंध हैं। अमेरिका उम्मीद करता है कि पाकिस्तानी सेना हालत में सुधार करेगी। पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को सही निर्णय लेने तथा सही कदम उठाने होंगे।
अब बात मसूद अजहर प्रकरण की। इस मामले में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव की रूपरेखा प्रस्तुत की थी और ब्रिटेन तथा फ्रांस ने इस पर सहमति देते हुए समर्थन किया था।
बालाकोट में भारतीय कार्रवाई के सबूत मांगने वाले कुछ 'समझदार' पूछ सकते हैं कि मसूद पर वैश्विक आतंकवादी का ठप्पा लगने से क्या बदलने वाला है! उनसे पूछा जाना चाहिए कि यदि यह इतनी ही बेकार की बात थी तो पिछले नौ बरस से चीन क्यों इस पर कुंडली मारे बैठा था!
मसूद और उसके संगठन को काली सूची में डालना विश्व बिरादरी का यह मान लेना है कि पाकिस्तान जैश और लश्कर जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों की कोख बन चुका है। विश्व मंचों पर नए वैश्विक संतुलन की आवाज बुलंद करता, भारत पर पाकिस्तानी आरोपों की धज्जियां उड़ाता और 'मसूद' जैसे चिर-अवलंबित मुद्दे पर 'चीन की दीवार' पार करता भारत पहले के भारत से अलग है। इसकी अंगड़ाई और उठान को दुनिया देख रही है। क्यों? चुनाव में जिन्हें लहर नहीं दिख रही वे न देखें, दुनिया वह देख रही है जो भारत में होने वाला है।
 
जय हो!