राहुल जानते हैं सेना के खर्च पर मौज—मस्ती हुई इसलिए मौन हैं
   दिनांक 09-मई-2019
 
ये आरोप नहीं सचाई है। आइएनएस विराट, एक पनडुब्बी, हैलीकॉप्टर, छोटी बोट्स और एक सैटेलाईट दस दिन तक गांधी परिवार की सेवा में तैनात रहा, जिस पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आपत्ति जताई थी। इंडिया टुडे 31 दिसंबर 1988 की रिपोर्ट में ये छपा था।
इंडिया टुडे द्वारा 31 दिसंबर 1988 की रिपोर्ट में यह फोटो छापे गए थे
युद्धपोत आइएनएस पर सवार होकर राजीव गांधी, सोनिया , सोनिया की माता आर. मायनो, सोनिया की बहन-जीजा, सोनिया के मामा, दो अन्य विदेशियों के साथ लक्षद्वीप पहुंचे। उनके साथ राहुल-प्रियंका और उनके चार दोस्त, राजीव के मित्र अमिताभ बच्चन सपरिवार, अजिताभ बच्चन की बेटी और अरुण सिंह के परिवार के लोग शामिल थे। उस समय अजिताभ बच्चन के खिलाफ बड़े फॉरेन एक्सचेंज घोटाले की जांच जारी थी।
मामला खुला जब कोचीन एअरपोर्ट पर इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर ने अमिताभ बच्चन की फोटो खींच ली। अमिताभ उसे धमकाते रहे लेकिन तब तक फोटोग्राफर 3-4 फोटो खींच चुका था। फिर मामला खुलता चला गया, और जनता व सेना के खर्च पर गांधी परिवार की अय्याशी का राज़ फाश हो गया।
भारतीय नौसेना के गौरव आईएनएस विराट पर सवार होकर घूमने गया था गांधी परिवार 
रिपोर्ट बतलाती है कि एक पूरा द्वीप इन शाही मेहमानों के लिए आरक्षित था। दस दिन इन राजसी मेहमानों ने फिशिंग-बोटिंग करते, धूप स्नान करते, आस-पास के द्वीपों की हैलीकॉप्टर से सैर करते, कांच के पेंदे वाली बोटों से समुद्र में घूमते और सेवन स्टार सुविधाओं का आनंद उठाते बिताए।
गांधी परिवार के निजी खानसामे की देखरेख में दो विशेष कुक और 5 हेल्पर खाने-पीने की व्यवस्थाएं देख रहे थे। शराब (वाइन और लिकर) का एक बड़ा कन्साइनमेंट मेहमानों के लिए पहुंचाया गया। चिकन की आपूर्ति के लिए एक पोल्ट्री फ़ार्म स्थापित किया गया। अन्य इंतजामों में शक्कर, समुद्र से ताज़ी पकड़ी गई मछली, लक्षद्वीप के विशेष फल, मक्खन,ब्रेड के सौ लोव्स, कैडबरी चॉकलेट, 300 बोतल मिनरल वाटर, काजू-बादाम, अमूल चीज़, मसाले, स्वीट लाइम, 105 किलो बासमती चावल, ताज़ी सब्जियां आदि थे। आपूर्ति के लिए जहाज और हैलीकॉप्टर लगे थे।
बाद में इस सुल्तानी शौक की लीपा-पोती करने के लिए मीडिया में छपवाया गया कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा से लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा मिला है। प्रधानमंत्री की पत्नी के रूप में सोनिया गांधी के शाही खर्चे चर्चा का विषय बनते रहे। उसके लिए पैसा कहां से आता था ये अज्ञात है।
सोनिया की मित्र रह चुकीं वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका तवलीन सिंह ने अपनी किताब 'दरबार' में इसका जिक्र किया है, कि कैसे सोनिया गांधी कीमती कश्मीरी शाल दर्जनों की संख्या में खरीद डालती थीं। समाजवाद के उस दौर में वो मंहगे फर कोट, शाहतूश शाल और महंगे परिधानों से सजी घूमतीं थीं और महंगे गिफ्ट भी दिया करतीं थीं| बोफोर्स घोटाले का अपराधी क्वात्रोच्ची और उसकी पत्नी अक्सर पीएम आवास में मेहमान होते थे और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों से बदसलूकी किया करते थे।
आज कांग्रेस ऐसे अत्यंत गंभीर आरोपों पर मौन है। राहुल गांधी पर एक के बाद एक घोटालों के गंभीर आरोप लग रहे हैं। राहुल और उनकी माता पर नेशनल हैराल्ड घोटाले का मुक़दमा भी चल रहा है। जमानत पर घूम रहे राहुल गांधी बिना सबूत प्रधानमंत्री को चोर बोल रहे हैं। उनकी योजना थी कि वो बार-बार दोहरा कर इस सफ़ेद झूठ को स्थापित कर देंगें पर पांसे पलट गए हैं।
अब कांग्रेस प्रधानमन्त्री मोदी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर तिलमिलाई घूम रही है| उसके समर्थक वामपंथी पत्रकार लीपापोती कर रहे हैं कि जो लोग दुनिया में नही है क्या सिर्फ वही एक मुद्दा बचा है ? उन पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। जवाब ये है कि जो लोग दुनिया में नहीं हैं , उनके नाम पर दशकों से वोट भी तो बटोरे जा रहे हैं। उनकी बेटी चुनावी रैलियों में बोलती घूमती है कि "मैं अपनी दादी जैसी दिखती हूँ।" उनके 'सपूत' राफेल-राफेल चिल्लाते घूम रहे हैं, और सुप्रीमकोर्ट में माफ़ी मांगकर, बाहर आते ही फिर वही राग अलाप रहे हैं। योग्यता की ऐसी मिसालों और हद पार करते झूठ के कारण दफना दिए पुराने राज़ बाहर आ रहे हैं। राहुल गांधी एक झूठ के दम पर चुनावी किला फतह करना चाह रहे थे, लेकिन वो और उनकी फौज पुराने स्याह राजों के दल-दल में धंसती जा रही है।
एक अति महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अतीत में भारत को किस प्रकार शासित किया गया ये जानने का अधिकार भारत की जनता को है। सच सामने लाए ही जाने चाहिए। इसलिए आपातकाल के काले अध्याय की, 'विराट टैक्सी' की, बोफोर्स घोटाले की, नेशनल हैराल्ड की, क्वात्रोच्ची चाचा की, मिशेल मामा की, कोलगेट, टू जी, जीजाजी सबकी चर्चा होनी स्वाभाविक है।