‘‘सच को गहराई से जानने और परखने का समय’’
   दिनांक 13-जून-2019
 

मुरादाबाद शिशु वाटिका की छात्राओं के साथ (मध्य में) श्री हितेश शंकर। मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्टजन
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में नारद जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर। इस मौके पर उन्होंने कहा कि केवल हम ही नहीं मानते कि देवर्षि नारद जी प्रथम संवादवाहक थे, बल्कि भारत का प्रथम हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ जिस दिन शुरू हुआ था, उस दिन पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया यानी देवर्षि नारद जयंती थी। उन्होंने कहा कि 1976 में उप संपादक के स्थान पर ‘सब इंस्पेक्टर’ यह तय करता था कि कौन-सा समाचार छापना है और कौन-सा नहीं। इससे समझा जा सकता है कि स्थिति क्या रही होगी। आज पत्रकारिता के मुख्य कार्य सूचना, शिक्षा एवं संचार पर बल देने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में उपस्थित उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि नारद जी की विश्वसनीयता यदि देव पक्ष में थी, तो दानव पक्ष में भी उतनी ही थी। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज वर्मा ने कहा कि देवर्षि नारद जी को एक विवादित चरित्र के रूप में प्रदर्शित किया जाता रहा है। ऐसा कैसे हुआ? नारद जी विद्वान थे। वे ज्योतिष, संगीत, इतिहास, भूगोल, खगोल, अर्थशास्त्र आदि हर विधा के मर्मज्ञ थे, फिर भी उनका चरित्र जो था वह न दिखाकर उलटा दिखाया गया। इसमें कहीं न कहीं हम और समाज दोषी हैं। क्योंकि हमने कभी सच को जानने की चेष्ठा नहीं की, जो बताया गया उसे ही सच मान लिया। यही वजह है कि आज पत्रकारिता जगत विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहा है। लेकिन अब समाज जागरूक हो रहा है। वह चीजें खुद खंगालता, परखता और सत्य की तह तक जाता है और फिर तय करता है कि सच क्या है और झूठ क्या। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित लोकसभा टीवी के वरिष्ठ पत्रकार श्री अनुराग पुनेठा ने कहा कि एक निष्पक्ष पत्रकार का दायित्व है कि वह किसी भी खबर की प्रामाणिकता को जांचने के बाद ही उसे समाज में प्रसारित करे। कार्यक्रम में शिशु वाटिका की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर वरिष्ठ छायाकार ओ.पी. रोड़ा एवं लघु फिल्म बनाकर समाज को जागरूक करने का कार्य करने वाले राकेश जायसवाल को देवर्षि नारद सम्मान से सम्मानित किया गया।