भारतीय सेना ने फिर की सर्जिकल स्ट्राइक
   दिनांक 17-जून-2019
नागालैंड में दशकों से उत्पात मचा रहे ईसाई आतंकी संगठन एनएससीएन के खिलाफ भारतीय सेना की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक. पड़ोसी देश बर्मा के घने जंगलों में छिपकर कार्रवाई करने वाला ये संगठन बर्मा के लिए भी ख़तरा. चीन की खुफिया एजेंसियों से हथियार और गोलाबारूद लेकर निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों पर करता है हमले. एनएससीएन नागालैंड को भारत से तोड़कर एक स्वतंत्र समाजवादी-ईसाई राज्य बनाना चाहता है.
भारत की सेना ने म्यांमार के सीमावर्ती जंगलों में छिपे आतंकियों पर बड़ी कार्यवाई की है. म्यांमार की सेना ने इसमें हमारी सेना का साथ दिया. ये स्ट्राइक भारत की मजबूत विदेशनीति का प्रमाण है. ये स्ट्राइक भारत-म्यांमार के मजबूत होते संबंधों की भी मिसाल है. म्यांमार जो कभी पूरी तरह चीन के प्रभाव में था, जहां अनेक शहरों में चीनी भाषा में लिखे साइनबोर्ड पाए जाते हैं. म्यांमार, जिसकी अर्थव्यवस्था चीन की छाया में चलती आ रही थी. चीन ने यहां सबकुछ बनाया – बांध, बंदरगाह, राजमार्ग, रेललाइन, एयरपोर्ट और हथियार. उस म्यांमार की सेना का भारत की सेना के साथ मिलकर अपनी सीमा में छिपे आतंकियों के विरुद्ध अभियान चलाना, वो भी उन आतंकियों के खिलाफ, जो चीन की मदद लेते रहे हैं, भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता भी है.
इस सर्जिकल स्ट्राइक का भारत के व्यापारिक हितों और पूर्वांचल के विकास की दृष्टि से भी बड़ा महत्त्व है. ये क्षेत्र भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है. इस इलाके में शांति स्थापित होने से भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया को सड़क और रेल मार्ग से जोड़ा जा सकेगा.
आतंक की कमर तोड़ी-
भारत ने पूर्वोत्तर में दशकों से चल रहे आतंकवाद पर कठोर और व्यापक प्रहार किया है. जिन आतंकी संगठनों पर कार्यवाई की गई है उनमे प्रमुख हैं एनएससीएन. एनएससीएन नागालैंड में सक्रिय ईसाई आतंकी संगठन है, जो नागालैंड को भारत से तोड़कर एक स्वतंत्र ईसाई राज्य बनाना चाहता है. ‘नागालैंड फॉर क्राइस्ट’ उनका ध्येय वाक्य है. एनएससीएन ने बकायदा इसकी घोषणा भी की है. यह आतंकी संगठन बम धमाकों और घात लगाकर किए गए हमलों में सैकड़ों जानें ले चुका है और नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश व मणिपुर में आतंकी कार्यवाहियां करता आ रहा है. 22 मई 2019 को इस संगठन ने अरुणाचल प्रदेश के एक विधायक तिरांग अबोह, उनके बेटे और 9 सुरक्षाकर्मियों की ह्त्या कर दी थी. हिंदू त्यौहारों को ये संगठन निशाना बनाता आया है. दीवाली की खरीददारी करते लोगों पर भी यह जानलेवा हमला कर चुका है. भारतीय सेना और सुरक्षाबलों के काफिलों पर भी एनएससीएन के आतंकी घात लगाकर हमले करते आए हैं.
 
एनएससीएन का पूरा नाम नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड है. 2005 में बीबीसी को दिए साक्षात्कार में इसके नेता थुईनगेलांग मुइवा ने कहा कि एनएससीएन का नागालैंड एक ईसाई देश होगा. ये संगठन कट्टर ईसाइयत और माओवाद का मिश्रण है. ये नक्सलियों की तरह घात लगाकर हमले करते हैं. आज़ादी के पहले अंग्रेजों की शह और मदद के आधार पर नागालैंड समेत सारे पूर्वांचल में मतांतरण का दौर चला. आज़ादी के समय इन इलाकों से मज़हब और जातीय पहचान के आधार पर स्वतंत्र देश बनने की माँग उठी. गंभीर स्थिति ये थी कि पूर्वांचल के उत्तर में चीन और दक्षिण में (तत्कालीन) पूर्वी पाकिस्तान था. दोनों अपने-अपने तरीके से इस हिस्से को अस्थिर करने की कोशिश करते रहे. दिल्ली में बैठे सत्ताधीशों की नीतियाँ भी समस्या को गंभीर बनाती रहीं. फलस्वरूप बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा भड़की. इसी बीच मज़हबी कट्टरवाद का गंधक छिड़ककर अलगाववाद के अंगारों को भी सुर्ख रखा गया. उसी में से एनएससीएन जैसे संगठन पैदा हुए.
एनएससीएन के आतंकी भारत के पूर्वांचल में सक्रिय दूसरे उग्रवादी संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं. आतंकी शिविरों में ये लोग साथ रहते हैं. इसमें उल्फा (यूनाइटेड लिबरेशन ऑफ़ असम), पीपल्स लिबरेशन आर्मी ऑफ़ मणिपुर, कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी, पीपल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ़ कांगलीपाक आदि हैं | पीपल्स यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट एक इस्लामी आतंकी संगठन है, जो मणिपुरी मुस्लिमों (पंगाल जनजाति) के बीच काम करता है. उल्फा देश के लिए जाना – पहचाना नाम है, जो नस्लीय हिंसा और मार्क्सवाद में विश्वास रखता है. उल्फा भी चीन की ख़ुफ़िया एजेंसी की सहायता से फलता-फूलता रहा है.
इसके अलावा जिन संगठनों के खिलाफ ये कारवाई हुई है, उनमे हैं नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ असम (एनडीएफबी), कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन. ये दोनों संगठन भी कम्युनिस्ट विचारधारा को मानते हैं.
विकास और सुरक्षा के लिए वज्र प्रहार-
म्यांमार के साथ भारत की लंबी सीमा है. 1640 किलोमीटर लंबी इस सीमा पर घने जंगल, पर्वत और कहीं आबादी भी है. म्यांमार से लगे कई राज्य हैं. अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से सटी ये अंतर्राष्ट्रीय सीमा सीमा आतंकियों और असामाजिक तत्वों के लिए वरदान है, तो उनकी रोकथाम करने वाले सुरक्षाबलों और सेना के लिए चुनौती. सीमा के उस पार साल 2018 तक 50 से अधिक उग्रवादी कैंप सक्रिय थे. फिर भारत की इस पूर्वी सीमा के उस पार शुरू हुआ ऑपरेशन सनराइज. जिनमें इन शिविरों को तबाह कर दिया गया है. दर्जनों आतंकी मारे गए हैं, और बड़ी संख्या में पकडे गए हैं. इस कार्यवाई में सेना के साथ असम राइफल्स के जवानों ने भी भाग लिया. इसके पहले जून 2015 में भी भारतीय सेना ने सीमा के उस पार हमला करके बड़ी संख्या में एनएससीएन आतंकियों का सफाया किया था. यह हमला आतंकियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले के जवाब में किया गया था जिसमें 18 भारतीय सैनिक मारे गए थे.
पिछले तीन हफ्तों में सेना द्वारा की गई कार्यवाई ऑपरेशन सनराइज का दूसरा चरण है. तीन माह पहले पूरे हुए प्रथम चरण में हमारी सेना ने अराकान आर्मी नामक उग्रवादी संगठन के खिलाफ कार्यवाई की थी. अराकान आर्मी, कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना का विरोध कर रहा था. ये एक परिवहन मार्ग है जो कोलकाता को म्यांमार के सीट्वे बंदरगाह से जोड़ेगा. इससे कोलकाता और सीट्वे के बीच की दूरी 1328 किलोमीटर घट जाएगी. साथ ही त्रिपुरा से होकर एक सड़क–रेल-नदी मार्ग भी सीट्वे बंदरगाह तक पहुंचेगा. इस मार्ग के खुलने से सातों पूर्वांचल राज्य सीधे बंगाल की खाड़ी से जुड़ जाएंगे, जो इनके आर्थिक विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा. लेकिन इस परियोजना पर आतंकी साया मंडराता रहा है. इसका मार्ग जिन क्षेत्रों से होकर गुजरता है, उनमें अराकान आर्मी, अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी, पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा पोषित जमात उल मुजाहिदीन और इंडियन मुजाहिदीन शामिल हैं. अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी ने 25 अगस्त 2017 को म्यांमार के रखाइन प्रांत में एक हिंदू गाँव पर हमला करके पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का नरसंहार किया था. कुल 99 हिंदू मारे गए थे. महिलाओं का अपहरण और जबरन इस्लाम में मतांतरण करवाया गया था. इस घटना को खा मोंग सेक नरसंहार के नाम से जाना जाता है.
शांति की आस अब फलित हो-
एक सदी से मतांतरण, जातीय हिंसा, कबीलाई संघर्षों और अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों के संघर्ष का मैदान बना हुआ पूर्वांचल, शांति और विकास की बाट जोहता रहा है. पिछले पाँच सालों में इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रारंभ हुई है. एक, यहाँ के दुर्गम इलाकों को आपस में और देश से, सड़कों-विशाल पुलों- रेल और वायुमार्ग से जोड़ा जा रहा है. दूसरा, सीमा की सुरक्षा को लगातार मजबूत किया जा रहा है. तीसरा, बंग्लादेशऔर म्यांमार के साथ आपसी समझ और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढाने की दिशा में बहुत तेजी से काम हुआ है. चौथा, दोनों देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को भी बढ़ावा दिया गया है, साथ ही खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को लेकर काफी काम हुआ है. पाँचवा, पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ जोड़कर यहां के वाणिज्य-व्यापार को गति देने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. इन प्रयासों में बाधा डालने वाले और हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ हमारी सेना कठोर कार्रवाई कर रही है, जबकि मुख्यधारा में लौटने के इच्छुक समूहों से बातचीत भी जारी है. लोकसभा चुनावों में पूर्वांचल का भारी मतदान प्रतिशत भी शांति और विकास की, क्षेत्र की आकांक्षा को अभिव्यक्त करता है. इस तरह केंद्र सरकार, स्थानीय सरकारें और जनता मिलकर आतंकी संगठनों को स्पष्ट संदेश दे रहे हैं. ऑपरेशन सनराइज इसी विश्वास का बढ़ा हुआ मजबूत कदम है.