‘‘राष्ट्र के प्रति समर्पण सिखाती है संघ की शाखा’’
   दिनांक 17-जून-2019


                                                मंच पर उपस्थित (बाएं से) श्री स्वांत रंजन एवं अन्य विशिष्ट अतिथि
‘‘संघ की शाखा केवल खेल खेलने का स्थान नहीं है। संघ के तृतीय सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने कहा था कि संघ की शाखा सज्जनों की सुरक्षा का बिन बोले अभिवचन है, तरुणों को व्यसन मुक्त रखने वाली संस्कार पीठ है, आपत्ति-विपत्ति में त्वरित निरपेक्ष सहायता का आशा केन्द्र है, महिला सुरक्षा और सभ्य आचरण का आश्वासन है, दुष्ट ताकतों पर धाक जमाने की शक्ति है और सामाजिक-राष्ट्रीय कार्यों के लिए कार्यकर्ता प्रदान करने का विद्यापीठ है।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री स्वांत रंजन ने कही। वे गत दिनों उदयपुर स्थित विद्या निकेतन सेक्टर-4 में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (द्वितीय वर्ष) के समापन समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संघ का प्रशिक्षण शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक तीनों स्तर पर होता है। स्वयंसेवक समाज के प्रति समर्पण का भाव मन में धारण करता है। शांतिकाल में भी समाज का राष्ट्र के प्रति जाग्रत और सजग रहना जरूरी है। उन्होंने देश में सामाजिक तौर पर ऊंच-नीच के भाव से होने वाली घटनाओं पर कहा कि न तो यह भारतीय संस्कृति रही है, न ही कोई भी संत इसका समर्थन करता है। बाबा साहेब आंबेडकर के समता-स्वतंत्रता-बंधुता के संदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह विचार आज भी प्रासंगिक है और यही भावना समाज में रहनी चाहिए।