राम जन्म भूमि पर हमले के दोषी पांच आतंकियों को आजीवन कारावास
   दिनांक 19-जून-2019
अयोध्या में रामजन्मभूमि परिसर पर पांच जुलाई 2005 में हुए आतंकी हमले के मामले में चार आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. जबकि एक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “जो आतंकी बरी हुआ है उसके खिलाफ ऊपर की अदालत में अपील की जायेगी.”
  
6 दिसम्बर 1992 को आयोध्या में विवादित ढांचा ढहा दिया गया था. विवादित ढांचा गिराए जाने के विरोध में आतंकियों ने योजना बनाई थी कि राम जन्म भूमि पर बम विस्फोट करके मंदिर को क्षति पहुंचाई जायेगी. इस घटना के बाद पूरे हिन्दुस्थान में कानून एवं व्यवस्था बिगड़ जायेगी. इस घटना को अंजाम देकर देश को एक बड़े दंगे की आग में झोकने की साजिश कई वर्षों से रची जा रही थी. इस साजिश को मूर्त रूप देने के लिए 5 जुलाई वर्ष 2005 को 6 आतंकी मार्शल जीप से अयोध्या पहुंचे. विस्फोट करके जीप को उड़ा दिया. इस विस्फोट में एक फिदायीन वहीं पर मारा गया. हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए वाहन में विस्फोट करने के साथ आतंकी मंदिर परिसर की तरफ बढ़ने लगे थे. विस्फोट की आवाज सुनते ही सी. आर. पी. एफ. और पी. ए. सी. के जवानों ने बड़ी ही तत्परता से उन पांचों आतंकियों को ढूंढ निकाला. आमने-सामने मुठभेड़ हुई जिसमे पांच आतंकी और तीन आम नागरिक मारे गए. मारे गए आतंकियों के कब्जे से रायफल, चीन की बनी हुई पिस्टल, ग्रेनेड, राकेट लांचर एवं नोकिया मोबाइल बरामद हुआ था. नोकिया फोन को सर्विलांस पर लगाया गया. संदिग्ध लोगों से पूछ-ताछ की गई. इस मामले में षड्यंत्र रचने वाले पांच और आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया. 14 साल बाद अब इनमें से चार को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “जो आतंकी बरी हुआ है उसके खिलाफ ऊपर की अदालत में अपील की जायेगी.”
अयोध्या जनपद के थाना राम जन्म भूमि में 11 वीं वाहिनी पी.ए.सी के दल नायक, कृष्ण चन्द्र सिंह ने घटना की एफ.आई.आर दर्ज कराई थी. एफ.आई.आर के मुताबिक़ “करीब सवा नौ बजे सफ़ेद मार्शल जिसका नंबर UP- 42 T- 0618 था. राम मंदिर के थोड़ा पहले जहां जैन मंदिर स्थित है. वहां पर मार्शल आकर रूकी. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता जोरदार धमाका हुआ. जीप के परखचे उड़ गए. बैरीकेडिंग भी तितर – बितर हो चुकी थी. इस हमले में एक फिदायीन मर चुका था.”
फैजाबाद जनपद न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने आरोप पत्र दायर किया. 8 दिसंबर 2006 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुकदमे को इलाहाबाद जनपद न्यायालय में भेजने का आदेश दिया. इसके बाद इन पांचों आतंकियों को प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में लाया गया. मुकदमे की पूरी सुनवाई नैनी सेन्ट्रल जेल के अन्दर बनी विशेष अदालत में की गयी. इलाहाबाद जनपद न्यायालय के अपर जिला जज एवं अधिवक्तागण जेल के अन्दर जा कर सुनवाई करते थे. फैसला भी जेल के अन्दर बनी विशेष अदालत में सुनाया गया. कोर्ट ने अपने फैसले में आसिफ उर्फ़ इकबाल को मुख्य साजिशकर्ता माना. दूसरे आतंकी ,डॉ. इरफ़ान पर यह दोष सिद्ध हुआ कि उसने हमला करने आये पांचों आंतकियों को अपने यहां शरण दी थी. तीसरे आतंकी, मोहमद नसीम ने सिम कार्ड और ए.के-47 खरीदा थी. चौथे आतंकी शकील ने वाहन मुहैया कराया था जिसमें असलहा ले जाया गया था. ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में मो. अज़ीज़ को बरी कर दिया. अज़ीज़ पर आरोप था लश्कर – ए – तयैबा का आतंकी इनके घर पर आता था. मो. अज़ीज़ के बरी हो जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “सरकार इस मामले का विधिक परिक्षण करायेगी और ऊपर की अदालत में इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी. इसके साथ ही इस मुक़दमें की पैरवी पर सरकार नजर बनाये रखेगी."
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में यह सफल रहा है कि आरोपियों को संदेह का लाभ नहीं मिलना चाहिए. भगवान राम के मंदिर पर हमला करने वालों को सजा तो उसी समय मिल गयी थी. मगर षड्यंत्र रचने वालों को सजा मिलने में 14 साल का समय लग गया.