चर्च और यौनाचार: सलीब तले, सिसकती नन
   दिनांक 02-जून-2019
- सतीश पेडणेकर                                   
भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो एक बात स्पष्ट हो है कि चर्च अब प्रार्थनास्थल नहीं रहे, बल्कि यौनशोषण के अड्डे बन गए हैं। एसोसिएटिड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया से ननों के यौन शोषण की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे यह बात साफ है कि यह एक वैश्विक समस्या है। चर्च में पादरी, ब्रदर और ननों के पदानुक्रम में नन सबसे निचले पायदान पर हैं, जिसके कारण उन्हें पुरुषों के अधीन काम करना पड़ता है और यही उनके शोषण की सबसे बड़ी वजह है। मगर कैथोलिक चर्च में यौन शोषण की कई तरह की समस्याएं सिर उठा रही हैं। मसलन बाल यौन शोषण, समलैंगिकता, स्वीकारोक्ति (कन्फेशन) के वक्त यौन शोषण आदि। कैथोलिक ईसाई मत में सबसे बड़ा संप्रदाय है, उसमें तो यौन शोषण जैसे रोजमर्रा की बात हो गई है।
 
अमेरिका और आॅस्ट्रेलिया में आस्था की आड़ में पादरियों ने महिलाओं या ननों के साथ ही नहीं बल्कि मासूम बच्चियों को भी यौन शोषण का शिकार बनाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई पादरी अपनी पहुंच और प्रभाव के चलते कानून के लंबे हाथों को छोटा साबित कर चुके हैं। उनके खिलाफ चर्च या कानून के पास शिकायत दर्ज करवाना और न्याय पाना कोई आसान बात नहीं है। भारत के संदर्भ में जालंधर के बिशप फ्रांक्को मुलक्कल और झारखंड के खूंटी में अभी पिछले दिनों पादरी अल्फोंस आइंद के मामले देखे जा सकते हैं।
ईसाइयत के बारे में जो लोग असलियत नहीं जानते, वे अक्सर यह कहते देखे जा सकते हैं कि ‘चर्च सेवा भावना से काम करते हैं’। जबकि ईसाइयत में यौन शोषण को बुराई और पंथ के रास्ते से भटकाव माना गया है। लेकिन इतनी घटनाओं के सामने आने से साफ होता जा रहा है कि ईसाई पादरी यौन अपराधों में गहराई तक लिप्त हंै। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वयं पोप अब तक इस पर चुप रहे थे। इससे कैथोलिक चर्च और पोप की छवि तो धूल में मिली ही, चर्च और ईसाई मिशनों में ‘दुष्कर्मों की पाठशाला’ कायम हुई है, इसकी भी पोल खुल चुकी है। इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिका-यूरोप के मीडिया ने ‘वैटिकन सेक्स स्कैंडल’ का नाम दिया है।
भारत में भी चर्च यौन अपराधों का बुरी तरह से शिकार हो चुका है। लेकिन उसके कुछ ही मामले सामने आ पाते हैं। चर्च का मजबूत तंत्र उन्हें दबा देता है। फिर भी कुछ मामले उभर ही आते हैं। कुछ समय पहले केरल के कन्नूर जिले में पादरी द्वारा एक लड़की के साथ बलात्कार की घटना से जुड़े तथ्यों को छुपाने के लिए पांच नन सहित आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पिछले दिनों वहां के अस्पताल में 16 साल की एक लड़की ने एक लड़के को जन्म दिया था। ‘चाइल्डलाइन’ में पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पादरी को गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता की मां ने कहा था कि फादर रोबिन उर्फ मैथ्यू वडक्कनचेरिल ने पिछले साल उसकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया था। इस मामले ने एक बार फिर ईसाइयत और चर्च को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया। इस पूरे मामले में देश-विदेश का मीडिया खामोश रहा। कारण, यह मामला ईसाइयत से जुड़ा है। इससे पहले केरल के कोच्चि के एक कॉन्वेंट स्कूल के प्रधानाचार्य फादर बेसिल कुरियाकोस को एक 10 साल के लड़के के साथ कुकर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह बच्चा किंग्स डेविड इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ता था। मां-बाप की शिकायत के बाद 65 साल के इस पादरी को गिरफ्तार किया गया था।
आज कॉन्वेंट स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आधुनिक दौर में लोग इन्हें शिक्षा के बेहतर विकल्प के तौर पर चुनते हैं। जबकि इनका असली रूप कुछ और ही बयान करता है। 2014 में केरल के त्रिशूर में सेंट पॉल चर्च के पादरी राजू कोक्कन को एक 9 साल की बच्ची से बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसने कम से कम तीन बार चर्च के अंदर इस बच्ची से दुष्कर्म किया था। 2014 में ही फरवरी से अप्रैल के बीच केरल के अंदर ही तीन कैथोलिक पादरी बच्चों से बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किए गए। ज्यादातर मामलों में ईसाई संगठनों ने शर्मिंदा महसूस करने के बजाय अपने पादरियों का बचाव किया। अभी कुछ समय पहले ही केरल के एर्नाकुलम में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के आरोपी 41 साल के पादरी एडविन फिगारेज को एक साथ दो उम्र कैद की सजाएं सुनाई गई थी। पादरी द्वारा बच्ची को संगीत सिखाने के नाम पर उसके साथ कई महीने तक दरिंदगी की गई थी। केरल की एक पूर्व नन ने अपनी आत्मकथा में चर्च में हुए यौन शोषण का जिक्र किया। अपनी आत्मकथा ‘ननमा निरंजवले स्वस्ति’ में सिस्टर मैरी चांडी (67) ने लिखा कि  ‘‘एक पादरी ने उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की, इसका विरोध करने पर उन्हें चर्च छोड़ना पड़ा। चर्च में जिंदगी आध्यात्मिकता के बजाय वासना भरी ज्यादा थी।’’ इससे पहले एक नन सिस्टर जेस्मी की पुस्तक ‘आमेन:द ऑटोबायॉग्रफी ऑफ ए नन’ ने तहलका मचा दिया था। कैथोलिक चर्च के बारे में प्रोफेसर मैथ्यू शेल्म्ज का अध्ययन आंखें खोलने वाला है। उन्होंने एक लेख में माना था कि भारत भर में फैले कैथोलिक चर्च में नन और बच्चों के साथ यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं। दूरदराज के इलाकों में चल रहे मिशनरी प्रकल्पों में यौन शोषण के ज्यादातर मामले दबे रह जाते हैं, क्योंकि पीड़ित अक्सर गरीब तबके के लोग होते हैं और उन्हें पैसे देकर चुप करा दिया जाता है।
आमतौर पर इस तरह की घटनाओं को यह कहकर दबाने की कोशिश की जाती है कि भारत में ‘अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए जान-बूझकर इस तरह की झूठी खबरें’ फैलायी जा रही हैं। सवाल यह नहीं है ये खबरें झूठी हैं या सच्ची। सवाल ये है कि ननों के यौन उत्पीड़न की घटनाओं की खबरें पूरी दुनिया से आ रही हैं। अगर इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है तो चर्च ‘झूठे आरोप’ लगाने वाली ननों के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं करता? और अगर इन खबरों में सच्चाई है, तो आरोपित पादरियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
भारत में चर्च के कमरों में ननों के साथ दुष्कर्म का लंबा इतिहास रहा है। आमतौर पर जो खबरें सामने आती हैं, उनमें उससे काफी कम चीजें पता चलती हैं, नन खुलकर अपने साथ हुए यौन शोषण को बयां नहीं करतीं। लेकिन एक अध्ययन से पता चला है कि सालों से नन चर्च में यौन शोषण का शिकार होती आ रही हैं। भारत में किसी चर्च के पादरी द्वारा जब किसी नन का यौन शोषण किया जाता है तो अधिकांश मामलों में नन यही कहती हैं कि पादरी ने ‘उन्हें गलत तरीके से छुआ’। दरअसल, वेटिकन को लंबे समय से एशिया, यूरोप, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में पादरियों और बिशपों द्वारा यौन उत्पीड़न के बारे में पता है, लेकिन उसके इसे रोकने के लिए बहुत कम काम किया है।
अब एसोसिएटिड प्रेस ने भारत जैसे देशों में ननों की स्थिति की जांच की और चर्च के भीतर यौन शोषण के दशकों पुराने इतिहास को उजागर किया है। ननों ने पादरियों के यौनाचार के बारे में विस्तार से बताया और लगभग दो दर्जन अन्य लोगों- नन, पूर्व नन और पुजारियों और अन्य-ने कहा कि उन्हें ऐसी घटनाओं का प्रत्यक्ष ज्ञान था। फिर भी भारत में चर्च में ननों से दुष्कर्म का पैमाना अस्पष्ट बना हुआ है। कई ननों का मानना है कि चर्च में ननों से दुर्व्यवहार आम बात है।
8 जुलाई, 2018 को केरल में एक चर्च के चार पादरियों पर एक विवाहित महिला ने सालों से कथित यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया। उसने कहा कि 16 साल की उम्र से लेकर उसकी शादी होने तक एक पादरी ने उसका यौन उत्पीड़न किया। इसने भारतीय चर्च में ‘कन्फेशन की पवित्रता’ पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। शादी के बाद जब उस महिला ने यह बात चर्च के एक दूसरे पादरी के सामने कबूल की तो उस पादरी ने भी कथित तौर पर उस महिला का यौन उत्पीड़न किया। इतना ही नहीं, जब पूरी तरह से निराश होकर यह महिला पादरी-काउंसलर के पास गई, तो वहां भी उसके साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ।
2017 में पटना में एक पादरी को बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पटना शहर में रहने वाले चर्च के पादरी चंद्र कुमार पर दो महिलाओं ने बलात्कार करने का आरोप लगाया था। एक समाज सेवी की पहल पर एक पीड़िता ने महिला थाने में मामला दर्ज कराया था। इस पादरी पर आरोप था कि वह कई महिलाओं का कन्वर्जन करके उनका यौन शोषण किया करता था। किसी तरह ये पीड़ित महिलाएं एक समाजसेवी अर्चना राय के पास पहुंचीं तब जाकर मामला पुलिस में दर्ज किया गया।
चर्च में यौन शोषण कितना घृणित रूप ले चुका है, इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि चर्च के कर्मकांड का उपयोग भी यौन शोषण के लिए किया जा रहा है। ऐसी ही एक घटना केरल के कोट्टायम शहर की है। पीड़ित महिला के पति की शिकायत पर मलंकरा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च ने उन पादरियों को सेवा से हटा दिया है। महिला के पति ने आरोप लगाया है कि इन पादरियों ने चर्च में ईसा के सामने पाप स्वीकार करने आई उसकी पत्नी के साथ यौन अपराध किया। इन पादरियों ने महिला की स्वीकारोक्ति का इस्तेमाल उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया। चर्च के जनसंपर्क अधिकारी पी.सी. इलियास ने बताया कि इस मामले में एक आंतरिक जांच शुरू हो गई है और रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर पांच पादरियों द्वारा एक महिला का यौन शोषण और उसे ब्लैकमेल करने के मामले में केरल सरकार से रिपोर्ट मांगी। दरअसल पीड़ित महिला का शादी से पहले एक पादरी ने यौन शोषण किया था जिसका खुलासा महिला ने केरल के चर्च में किया जिसके बाद उक्त पादरी और अन्य पादरियों ने उसे ब्लैकमेल करते हुए उसके साथ बलात्कार करना शुरू कर दिया। महिला आयोग ने केरल के चर्चों पर कई सवाल उठाए हैं। उसने केरल सरकार से केरल के चर्चों में बढ़ती यौन शोषण की घटनाओं की जांच केंद्रीय एजेंसी से करवाने को कहा है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि ‘कन्फेशन’ वाले मामले की जांच के दौरान उन्हें कई शिकायतें मिली हैं। आयोग ने तो चर्च में कन्फेशन (पाप स्वीकार करना) प्रथा खत्म करने तक की सिफारिश की। इस पर विवाद शुरू हो गया। पादरियों का कहना है कि इस प्रथा को बंद करने की बात करना आस्था पर प्रहार करने जैसा है।
इतना ही नहीं, अपनी यौनाचार की राह को आसान बनाने के लिए पादरी अपनी मनमर्जी के रीति-रिवाज गढ़ रहे हैं। नाइजीरिया के एक चर्च के पादरी ने निर्देश दिए कि औरतों का अंत:वस्त्र पहनना ईसा की खिलाफत है। पिछले दिनों वहां एक सभा में उक्त पादरी ने कहा कि अंत:वस्त्र पहनी औरतों को चर्च में प्रवेश नहीं देना चाहिए। पादरी रेवरेण्ड नोही लॉर्ड्स प्रोफेलर रिडेंप्शन चर्च का प्रतिनिधित्व करता है। चर्च में यौन अपराधों की बढ़ती तादाद से दुनियाभर के ईसाई हैरत में हैं और शायद इसी वजह से यूरोप में लोगों का चर्च के प्रति रुझाान तेजी से कम होता जा रहा है।