‘‘देश-धर्म की रक्षा के लिए सब साथ आएं’’
   दिनांक 20-जून-2019
 

 समापन समारोह को संबोधित करते श्री मोहनराव भागवत। मंच पर विराजमान (दाएं) श्री अनिरुद्ध देशपांडे
गत दिनों नागपुर स्थित रेशिमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण शिविर का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित थे रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव में स्पर्द्धा होती ही है। प्रजातंत्र है, राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने ही पड़ते हैं। स्पर्द्धा होने के कारण कई प्रकार की बातें चलती हैं, चुनावी वातावरण में खलबली रहती है। थोड़ा विक्षोभ भी आ जाता है। कुछ को ही चुनकर आना है, बाकी को पराजित होना है, यह तो स्वाभाविक प्रक्रिया है। पिछली बार जो राजनीतिक दल जीता था, वह इस बार अधिक शक्ति के साथ विजयी हुआ है। समाज ने ऐसा दिखा दिया है कि उनका काम शायद समाज को पसंद आया है। इसलिए एक और अवसर दिया। कुछ अपेक्षाएं पूरी हो गईं, कुछ शेष हैं। समाज को लगा कि एक अवसर और देने से उन अपेक्षाओं को पूरा करेंगे, तो उनका संख्याबल बढ़ा। लेकिन उनके लिए भी समझने की एक बात है कि सारी अपेक्षाएं जल्दी पूरी हों, यह उनका अधिक दायित्व बन गया है। देश की जनता और जागरूक हो रही है, स्वार्थ और भेदों से ऊपर उठकर, व्यावहारिक सूझबूझ व दृढ़ता के साथ, देश की एकात्मता, अखंडता, देश का विकास व राजनीति में शासन-प्रशासन के क्रियाकलापों में पारदर्शिता के पक्ष में मतदान कर रही है। प्रचार के सब हथकंडे अपनाने के बाद, प्रचार से कोई ढकोसला उनके आगे खड़ा करे, कितनी भी मीठी बात करे तो भी अब कोई भरमा नहीं सकता, जनता को ठगा नहीं जा सकता, यह शुभ शगुन है। श्री भागवत ने आगे कहा कि अब चुनाव समाप्त हो गए हैं, सभी को अब देश के लिए मिलकर ठीक काम करना है, चुनाव तो सिर्फ एक स्पर्द्धा है। जीत-हार हो गयी है जो होना था, वह हो गया है। देश-धर्म की रक्षा के लिए मिलकर साथ चलें, यह केवल स्वयंसेवकों का विषय नहीं है, समस्त प्रजा से जुड़ी बात है। जीत वाले जीत के गुमान में और हार वाले अपनी भड़ास निकालने के लिए अमर्यादित व्यवहार करेंगे तो उसमें देश का नुकसान है। उन्होंने कहा कि बंगाल में आज क्या चल रहा है? चुनाव बाद ऐसा कहीं होता है? क्या कहीं किसी और प्रांत में ऐसा हो रहा है? अगर गुंडा प्रवृत्ति वाले लोगों के कारण ऐसा होता है तो शासन-प्रशासन को आगे बढ़कर बंदोबस्त करना चाहिए, उसकी उपेक्षा नहीं कर सकते। क्योंकि सामान्य व्यक्ति नासमझ हो सकता है, मर्यादा तोड़कर व्यवहार कर सकता है। किंतु शासन का कर्तव्य है कि देश की एकात्मता, अखंडता के लिए, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंड शक्ति से व्यवस्था बनाए। एक अनुभवी, संघर्ष का अनुभव रखने वाला व्यक्ति यदि कुर्सी के लिए ऐसा कर रहा है तो वह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि भारत आगे बढ़ता है, हिन्दू आगे बढ़ता है, इसका अर्थ है कि जितना हम आगे बढ़ेंगे, स्वार्थ की पूर्ति करने वाली ताकतों के रास्ते बंद हो जाएंगे। आज देश आगे बढ़ रहा है, इसे आगे न बढ़ने देने वाली शक्तियां ऐसा नहीं चाहतीं, लेकिन हमारा हिन्दू समाज, भारतीय समाज आगे बढ़ेगा तो दुनिया की स्वार्थ वाली दुकानें बंद हो जाएंगी।
कार्यक्रम में विशेष रूप से पू. श्री चितरंजन जी महाराज (अगरतला), डॉ. कृष्णास्वामी (कोयम्बतूर), श्री श्रीनिवास (गोवा), श्री गोपालकृष्ण (बेंगलुरू), पूर्व विदेश सेवा अधिकारी श्री रमेश चंद्र (जालंधर), श्री यशराज एवं श्री युवराज (दिल्ली) उपस्थित रहे।