''योग अब विश्वभर में एक आन्दोलन बन गया है''
   दिनांक 20-जून-2019
पांचवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह मनाने के लिए पूरे विश्व में जिस प्रकार की तैयारियां चल रही हैं वे अद्दभुत हैं. आगामी 21 जून को पूरा भारत ही नहीं पूरा विश्व योगमय होने जा रहा है. यूं हमारे देश में योग की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है. विश्व योग दिवस मनाने के बहुत बहुत पहले से भारत में योग को अपनाने और योग शक्तियों के अनेक उल्लेख मिलते हैं. योग की शुरुआत भारत से हुयी और बाद में वह धीरे धीरे विश्व के अन्य देशों में पहुंचा. आधुनिक काल में स्वामी विवेकानंद के बाद कुछ जिन अन्य योग गुरुओं ने देश में योग को लोकप्रिय बनाया उनमें स्वामी रामदेव और डॉ. एच. आर. नागेन्द्र के नाम प्रमुख हैं. स्वामी रामदेव जहां उत्तर भारत से योग की बड़ी मुहिम चलाते हुए दुनिया भर में मशहूर हुए. वहां डॉ. नागेन्द्र ने अपना योग अभियान दक्षिण भारत से शुरू किया और बाद में वह भी योग को दुनियाभर में ले गए. डॉ. एच आर नागेन्द्र जह़ां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योग गुरु के रूप में विख्यात हैं. वहां उनका बेंगलुरु स्थित योग संस्थान और योग विश्वविद्यालय योग उपचार और योग पर हुए शोध के लिए विश्व का सबसे बड़ा नाम है. यहाँ तक योग को ‘विश्व योग दिवस’ के रूप में मनाने और दुनियाभर में एक दिन एक साथ योग करने का बड़ा सपना सबसे पहले डॉ. नागेन्द्र ने ही देखा था. आज डॉ नागेन्द्र ‘स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान’ के अध्यक्ष और इस योग विश्वविद्यालय के कुलपति भी हैं. साथ ही आयुष मंत्रालय की टास्कफोर्स के अध्यक्ष और ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के निदेशक भी वही हैं. इस बार ‘विश्व योग दिवस’ पर क्या ख़ास है. पिछले पांच वर्षों से विश्व योग दिवस मनाते हुए हालात कितने बदले हैं. ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब तलाशने के लिए जब हमने डॉ. एच. आर. नागेन्द्र से बातचीत करनी चाही तो पता लगा इस बार ‘विश्व योग दिवस’ के अवसर पर वह ब्रिटेन में रहेंगे. जहाँ योग को लेकर वह ब्रिटिश संसद ‘हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ को संबोधित भी करेंगे.
यहां प्रस्तुत है डॉ. एच आर नागेन्द्र से लंदन से फ़ोन पर हुई वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सरदाना की बातचीत के प्रमुख अंश -
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योग गुरु के रूप में विख्यात डॉ. एच आर नागेन्द्र
आप इस बार पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर लन्दन में रहेंगे. आपके वहां क्या क्या कार्यक्रम हैं ?
सन 2015 में विश्व योग दिवस की शुरुआत होने के बाद मैं लगातार तीन साल भारत में ही विभिन्न आयोजन में शामिल रहा. लेकिन पिछले वर्ष मुझे इस दिन न्यूयॉर्क में बुलाया गया था और इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुझे ब्रिटेन ने आमंत्रित किया है. योग को लेकर वहां मेरे विभिन्न कार्यक्रम हैं. जिसमें सबसे अहम् कार्यक्रम 20 जून शाम को ब्रिटिश पार्लियामेंट- ‘हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ में मेरा संबोधन है. जिसमें मैं योग और इसके महत्व को लेकर सभी के सम्मुख अपनी बात रखूँगा. ब्रिटेन की पीएम भी इस दौरान वहां मौजूद रहेंगी. इसके बाद एक कार्यक्रम 21 जून को सुबह 10 बजे एक ओपन सेमीनार है. फिर 21 जून शाम को लन्दन के नेहरु सेंटर ऑडिटोरियम में भी योग पर एक बड़ा कार्यक्रम होगा. साथ ही 22 जून को पूरे दिन लन्दन के हाई कमीशन ऑफिस ऑडिटोरियम में भी, आईसीसीआर के माध्यम से योग कांफ्रेंस है.
 
इस बार ‘विश्व ह्रदय दिवस’की थीम ‘दिल के लिए योग’ है. ऐसे में आप योग में ऐसे कौन कौन से मुख्य आसन लोगों को बताएंगे जिससे दिल स्वस्थ और मजबूत रह सके.?
जी इस बार योग की थीम में हमने दिल को महत्व दिया है. इसके लिए हम सभी को तनाव कम करने और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने के सुझाव और उपाय विशेष रूप से बताएँगे. इसके लिए हमने एक विशेष योग प्रारूप तैयार किया है. जिसमें शवासन, प्राणायाम और ध्यान लगाने जैसे आसन और क्रियाएं शामिल की हैं. असल में इस समय पूरी दुनिया में दिल के लिए योग को केन्द्रित किया जा रहा है. हम तो इसमें काफी काम कर रहे हैं, जिससे योग के छोटे छोटे आसन और विभिन्न अन्य क्रियाओं के माध्यम से दिल को स्वस्थ और प्रसन्न रखा जा सकता है.
आप बरसों से योग साधना और योग के माध्यम से उपचार में जुटे हैं. यहां तक यह भी माना जाता है कि ‘विश्व योग दिवस’ मनाने का सुझाव आपने ही प्रधानमंत्री मोदी को दिया था. तभी उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र संघ में रखा ?
यह कहना शायद सही नहीं होगा. असल में केंद्र में मोदी सरकार आने से भी पहले श्री श्री रविशंकर के घर पर हम कुछ लोगों ने मिलकर साल में एक बार योग दिवस को विश्वभर में बड़े स्तर पर मनाने का प्रस्ताव रखा था. इस मीटिंग में मेरे साथ स्वामी रामदेव और अमृता सूर्यानंद भी शामिल थे. कांग्रेस-यूपीए सरकार के समय हमने इस प्रस्ताव को संसद में भी रखवाया और कई देशों को भी इसके लिए पत्र लिखा. लेकिन बात बनी नहीं. जब केंद्र में मोदी सरकार आई तब हमने यह सब मोदी जी को बताया. मोदी जी ने इस सुझाव को तुरंत गंभीरता से लिया. साथ ही इसके महत्व को समझते हुए उन्होंने इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र संघ में इतनी ख़ूबसूरती के साथ रखा कि वहां नया इतिहास बन गया. पहली बार में ही संयुक्त राष्ट्र के 177 देशों ने तभी इस प्रस्ताव पर सहमती दे दी. अब तो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से 225 से भी अधिक देश ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मना रहे हैं.
आप ‘विश्व योग दिवस’ के आरम्भ से ही एक अहम कड़ी के रूप में जुड़े हैं. देश दुनिया में ‘विश्व योग दिवस’ शुरू होने के बाद इन पिछले पांच बरसों में आपने योग की दुनिया में क्या बदलाव महसूस किये हैं ?
बहुत बदलाव हुए हैं. देश में भी विदेशों में भी. अब दुनिया में योग को लेकर बड़ी जागरूकता देखने को मिल रही है. अब योग एक आन्दोलन की तरह हो गया है. योग में जिस तरह लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है, लोग जिस तरह योग के महत्व और लाभ को अब समझ रहे हैं वह अद्दभुत है.
 
आप योग की इस विश्वव्यापी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे ?
निश्चय ही प्रधानमंत्री मोदी को. हमारे प्रधानमंत्री ने योग को देश में बढ़ावा देने के साथ इसे संयुक्त राष्ट्र संघ में ‘विश्व योग दिवस’ के रूप में मान्य कराके बहुत ही महान कार्य किया है. सन 1893 में अमेरिका में दिए अपने एक एतिहासिक भाषण से, स्वामी विवेकानंद ने भारत का लोहा मनवाया था. स्वामी विवेकानंद का नाम भी नरेन्द्र था. सन 2014 में भारत के एक और नरेन्द्र ने, हमारे पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने एक भाषण देकर भारतीय संस्कृति के मूल योग को दुनिया भर में फैला दिया है. सभी लोग इसे मान रहे हैं. पीएम मोदी के फिर से पीएम बनने से भारत के लिए अच्छे दिन जारी रहेंगे.
अक्सर देखा जाता है की ‘विश्व योग दिवस’ को तो हम बहुत ही उत्साह से मनाते हैं लेकिन उसके बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है. योग को लेकर कोई बड़ी चर्चा या योग के प्रसार को लेकर कुछ नहीं होता ?
ऐसा नहीं है, असल में पूरे साल आयुष मंत्रालय से लेकर हम सभी योग गुरु कुछ न कुछ करते रहते हैं. इस बार भी 21 जून को योग दिवस मनाने के बाद 27 जून को ही मानव संसाधन मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के साथ मिलकर योग को लेकर एक बड़ा कार्यक्रम दिल्ली में रखा है. इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में चल रहे योग पाठ्यक्रमों के साथ इस सब को देश भर में और भी व्यापक स्तर पर करने की योजना पर बात होगी. जिसमें सभी विश्वविद्यालय के उपकुलपति इसमें शामिल होंगे. इसके अलावा मानव संसाधन मंत्रालय ने ‘इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर योगा साइंसेज’ के नाम से बेंगलुरु में एक बहुत बड़ा संस्थान खोला है, सरकार ने इसका अध्यक्ष मुझे ही बनाया है. योग को बढ़ावा देने के लिए यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है. जल्द ही बेंगलुरु में भी योग को लेकर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा.
आप स्वयं भी बेंगलुरु में बरसों से योग सिखा रहे हैं और योग पर शोध के साथ योग के माध्यम से उपचार भी कर रहे हैं. योग दिवस पर आप अपने ‘ एस व्यासा’ (‘विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान और विश्वविद्यालय’) के माध्यम से क्या ख़ास करते हैं ?
हम अपने संस्थान की ओर से योग दिवस पर पूरे देश में योग्याभ्यास सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं. साथ ही दुनिया के कई देशों में भी. इसमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु सहित कई शहरों के साथ देश के कई जिलों में योग की कार्यशालाओं के साथ योग पर सेमिनार आदि भी शामिल हैं. यहां यह भी बता दें कि योग दिवस के बाद हर तीन महीने में हम यह सब फिर से करते हैं जिससे यह सब योग दिवस तक ही सीमित न रहे.
‘विश्व योग दिवस’ शुरू होने के बाद क्या विदेश में भी कहीं भारत संग मिलकर कोई शैक्षिक पाठ्यक्रम शुरू हुए ?
बिलकुल अभी हाल ही में हमारे संस्थान ‘एस व्यासा’ (विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान) के साथ चीन के एक विश्वविद्यालय से भी गठजोड़ किया है. चीन की एक काफी बड़ी यूनिवर्सिटी है ‘वाईएमयू’. वहां योग का पाठ्यक्रम तो पहले ही शुरू हो गया था. अब तो वे हमारे साथ मिलकर एक योग महाविद्यालय ही शुरू कर रहे हैं. उस कॉलेज का नाम ‘व्यासा चाइना योगा कॉलेज’ रखा गया है.
आप पीएम मोदी के योग गुरु हैं. हाल फिलहाल में क्या उनसे कोई मुलाकात हुयी ?
(हँसते हुए) मुलाकात तो होती रहती है.
अभी उनके फिर से पीएम बनने के बाद उनसे कोई मुलाकात हुयी. या योग दिवस की तैयारियों को लेकर.?
फिर से पीएम बनने के बाद तो उनसे अभी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई. लेकिन चुनाव के दिनों में मुलाकात हुयी थी. हां उनकी विजय के बाद उनसे बात हुई थी. मैंने उनको पत्र लिखा था बधाई का, तो उनका जवाब आया था. उन्होंने लिखा कि योग को लेकर साथ मिलकर बहुत से कार्यक्रम करने हैं. असल में पिछले कुछ समय से बीच बीच में मुझे विदेशों में जाना पड़ रहा है. योग को लेकर मैं दिल्ली की कई मीटिंग में बराबर शामिल हुआ हूँ. लेकिन पीछे चीन में होने के कारण पिछली एक मीटिंग में शामिल नहीं हो पाया था. लेकिन मुझे फ़ोन पर उस मीटिंग की जानकारी दे दी गयी थी. जिस तरह की तैयारियां हैं, इस आयोजन के पीछे जिस तरह की अच्छी भावना है उसे देख लगता है कि यह विश्व योग दिवस तो अच्छा रहेगा ही, साथ ही भविष्य में भी योग को अपनाने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी.