ऐसी हरकते क्यों करते हैं राहुल गांधी
   दिनांक 24-जून-2019
वह जो हरकते कर रहे हैं, जो ट्वीट कर रहे हैं, वे दर्शाते हैं कि उनके साथ सबकुछ ठीक तो कतई नहीं है. ये मसला बस मनोरंजन का नहीं रह गया है. ये बहुत गंभीर मामला है क्योंकि इस बचकानी सोच के साथ कांग्रेस रचनात्मक विपक्ष की भूमिका नहीं निभा सकती.
राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान मोबाइल देखते राहुल गांधी
 क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ सब कुछ ठीक है. 2019 के लोकसभा चुनाव की हार ने कुछ तो ऐसा किया है, जिसकी गहरी चोट और उसके लक्षण बता रहे हैं कि सब कुछ ठीक नहीं है. राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने को तैयार नहीं हैं. इस्तीफा दिए बैठे हैं और मां सोनिया गांधी की गहरी नाराजगी की परवाह के बगैर इस बात पर अड़े हैं कि अध्यक्ष परिवार से बाहर का कोई नेता बने. बतौर अध्यक्ष चुनावी हार का रिकार्ड बना देने के बाद ये समझ आता है. ये भी समझ आता है कि उन्हें अब बगैर जवाबदेही के कांग्रेस को रिमोट से चलाना है. लेकिन इस सबके बीच वह जो हरकते कर रहे हैं, जो ट्वीट कर रहे हैं, वे दर्शाते हैं कि उनके साथ सबकुछ ठीक तो कतई नहीं है. ये मसला बस मनोरंजन का नहीं रह गया है. ये बहुत गंभीर मामला है क्योंकि इस बचकानी सोच के साथ कांग्रेस रचनात्मक विपक्ष की भूमिका नहीं निभा सकती.
राहुल गांधी पर क्या गुजर रही है, इसे समझने के लिए हाल ही की कुछ घटनाओं पर गौर करना जरूरी है.
21 जून को विश्व योग दिवस पर जब पूरी दुनिया पतंजलि के योग सूत्र में बंधी थी. दुनिया के कोने-कोने में योग की धूम थी. कांग्रेस इस वैश्विक आयोजन से दूर थी. ये योग से एलर्जी है या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से. ये राहुल गांधी के ट्वीट से समझिए. उन्होंने सेना की यूनिट की दो तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की. इनमें सेना के जवानों के साथ श्वान दस्ते के जांबांज कुत्ते योग मुद्राएं कर रहे थे. राहुल गांधी ने इसका मजाक उड़ाते हुए कहा- ये है न्यू इंडिया. जाहिर है, ये कुत्ते भारतीय सेना के सम्मानित सदस्य हैं. इनका मजाक उड़ाना उन लोगों तक को नागवार गुजरा, जो राजनीतिक रूप से खुद को सभी दलों से अलग रखते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में ट्वीट करके कहा कि पहले ट्रिपल तलाक की मध्ययुगीन कुप्रथा का समर्थन और फिर एक बार भारतीय सेना की तौहीन. ये नकारात्मकता है. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को सद्बुद्धि की प्रार्थना की. एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने याद दिलाया कि राहुल गांधी जिन कुत्तों का मजाक उड़ा रहे हैं, वे कुत्ते उनकी एसपीजी में काम करते हुए उनकी खुद की सुरक्षा करते हैं. अभिनेता परेश रावल तो यहां तक कह बैठे कि ये कुत्ते राहुल गांधी से ज्यादा समझदार है. मुंबई में एक वकील ने कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. आरोप लगाया है कि राहुल गांधी सेना के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भी अनादर कर रहे हैं.
 
दूसरी घटना संसद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के दौरान की है. राष्ट्रपति के एक घंटे से कुछ अधिक समय के अभिभाषण के दौरान राहुल गांधी लगातार मोबाइल पर व्यस्त थे. राष्ट्रपति का अभिभाषण संवैधानिक, संसदीय और रणनीतिक रूप से अति महत्वपूर्ण मौका होता है. राष्ट्रपति के अभिभाषण से सरकार की आगामी योजनाओं और इरादों का पता चलता है. ऐसे समय पर राहुल गांधी लगातार मोबाइल फोन पर व्यस्त रहे. हालांकि उनकी मां सोनिया गांधी का पूरा ध्यान अभिभाषण पर था. उन्होंने छह बार अपनी डेस्क भी थपथपाई. एक मौका ऐसा आया, जब प्रतीत हुआ कि राहुल गांधी अपनी मां को डेस्क थपथपाने से रोक रहे हैं. भाजपा महासचिव राम माधव ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राहुल गांधी पर निशाना साधा. कहा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण तक पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सके. उन्हें मोबाइल फोन चाहिए था, जिससे मैसेज देख सकें, गेम खेल सकें. यह बचकानी हरकत अस्थिर दिमाग को दर्शाती है.
जैसा कि राम माधव कह रहे हैं, अस्थिर दिमाग. क्या वास्तव में राहुल गांधी अस्थिर दिमागी हालत में हैं. लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान और उससे पहले कई मौकों पर उनके शब्द चयन, आंकड़ों में लगातार बदलाव, कार्यकर्ताओं को दिए जवाबों और अपनी योजनाओं को लेकर उन्होंने इस शक को पुख्ता किया है. हाल के लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी अपनी पार्टी के अंदर ही जिस तरह का आचरण कर रहे हैं, उससे भी ये बात साफ होती है कि सब कुछ ठीक नहीं है. हार के कारणों की समीक्षा के लिए कार्यसमिति की बैठक से पहले ही उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. कार्यसमिति की बैठक में भी उन्होंने साफ कर दिया था कि वह अध्यक्ष नहीं रहेंगे और न ही परिवार से कोई बनेगा. राहुल गांधी को समझाने की हर कोशिश नाकाम हो चुकी है. खबरें तो इस तरह की हैं कि सोनिया गांधी इसे लेकर बहुत नाराज हैं. लेकिन राहुल गांधी चाहते हैं कि कोई और कांग्रेस अध्यक्ष बने. कोई और नेता बन सकता है. बन भी जाएगा. लेकिन क्या कांग्रेस अध्यक्ष होते हुए वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ऊपर होगा. स्वाभाविक है, नहीं. यानी अध्यक्ष के तौर पर अपनी जवाबदेही से बचते हुए वह कांग्रेस को रिमोट से चलाना चाहते हैं. कोई भी मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति हार को स्वीकार करता है, और मजबूत होकर उभरता है. लेकिन राहुल गांधी ने बगैर जवाबदेही वाली राजनीति का चोर रास्ता चुना है.
 
राहुल गांधी को ये समझने में बहुत दिक्कत हो रही है कि ये वास्तव में न्यू इंडिया है. 72 हजार रुपये की रिश्वत या राफेल विमान सौदे में घोटाले के फर्जी आरोपों से आप जनमत तैयार नहीं कर सकते. कांग्रेस के डाटा एनालिसिस विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती ने राहुल गांधी को चुनाव के बाद सपना दिखाया था कि कांग्रेस 164 से 184 तक सीट जीतने जा रही हैं. राहुल गांधी इस डाटा से इस कदर मुतमईन थे कि उन्होंने सरकार गठन की तैयारी, मंत्रियों के नाम तय करने तक शुरू कर दिए थे. द्रमुक के स्टालिन और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार को भारी-भरकम पोर्टफोलियो तक नतीजे आने से पहले दे डाले थे. क्या कोई परिपक्व राजनेता होशो-हवास में ऐसा कर सकता है. हार के बाद भी राहुल गांधी प्रवीण चक्रवर्ती और कुछ ऐसे ही जमीन से कटे सलाहकारों के हाथ में खेलते रहे. प्रवीण चक्रवर्ती ने तो उन्हें यहां तक समझा डाला था कि कांग्रेस का डाटा ठीक है. गड़बड़ ईवीएम में है. राहुल गांधी चाहते थे कि पूरे देश में कांग्रेस सड़क पर उतरकर चुनाव में धांधली का आरोप लगाए. आंदोलन करे. लेकिन उनकी मां सोनिया गांधी ने वरिष्ठ नेताओं की सलाह का हवाला देते हुए उन्हें जैसे-तैसे रोका.
कुछ चीजें अब बहुत साफ हैं. एक तरफ देश में पूर्ण बहुमत सरकार है और दूसरी तरफ बचकाने नेतृत्व वाला विपक्ष. मजबूत और संजीदा विपक्ष सरकार पर अंकुश का काम करता है. लेकिन सरकार के सही काम में बाधा नहीं बनता. लेकिन राहुल गांधी की मौजूदा मानसिक हालत और हरकते देखते हुए ये समझ जाना चाहिए कि रचनात्मक विपक्ष की भूमिका की उम्मीद कम से कम कांग्रेस से नहीं की जा सकती.