‘‘पत्रकारिता में गंगा जैसी निर्मलता का भाव रहना जरूरी’’
   दिनांक 17-जुलाई-2019

सम्मानित किए गए पत्रकारों के साथ श्री हितेश शंकर (बाएं से चौथे)
 
‘‘पत्रकारिता जीवन की आवश्यक एवं महत्वपूर्ण विधा है। समाज में इसका बड़ा महत्व है तथा नारद जी ने पत्रकारिता को दिव्यता प्रदान की थी। पत्रकारिता में तथ्यों के साथ खबर प्रकाशित करने से पाठकों में खबर की विश्वसनीयता कायम रहती है।’’ यह कहना था पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर का। वे गत दिनों सीकर में भारतीय शिक्षा संकुल में आयोजित नारद जयन्ती एवं पत्रकार सम्मान समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि झूठी खबरें देना, पत्रकारिता नहीं है। देश में सामाजिक मूल्यों को स्थापित करना ही सच्चे अर्थों में पत्रकारिता धर्म है। आज पत्रकारिता मुख्य विषयों से भटक गई है, जिससे जनहित के मुद्दे गौण हो गए हैं। पत्रकारिता में गलती, गफलत, लत से सतर्क रहना आवश्यक है। इसलिए पत्रकारिता में गंगा जैसी निर्मलता का भाव रहना जरूरी है। उन्होंने पत्रकारों का आह्वान किया कि वे खबर देने वाले की भी खबर लेने का कार्य करें। समारोह के विशिष्टि अतिथि श्री गेंदालाल ने कहा कि नारद जी अपनी स्पष्टवादिता के लिए प्रसिद्ध रहे। उन्होंने सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना के लिए जीवन पर्यन्त कार्य किया। नारद जी सत्य व मानव कल्याण के लिए निष्पक्ष भाव से कार्य करते थे तथा उनकी बात को तीनों लोकों में महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति विश्व का कल्याण करने वाली संस्कृति है। जनकल्याण के लिए पत्रकारिता का सकारात्मक उपयोग किया जाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा संकुल के निदेशक एवं नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष श्री हरीराम रणवां ने कहा कि पत्रकार सजग, स्वाभिमानी, गरिमामय होकर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में सकारात्मक सोच के साथ अपने पत्रकारिता धर्म को बखूबी निभाएं। समारोह के अध्यक्ष एवं पूर्व प्राचार्य श्री हीरालाल जांगिड़ ने कहा कि पत्रकार स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रहकर अपने कर्तव्य का पालन करें। पत्रकारिता में वह ताकत है जो समाज की दशा व दिशा बदल सकती है। उन्होंने पत्रकारों से आह्वान किया कि वे सकारात्मक खबरों को अपने समाचार पत्रों में प्रकाशित करें।