व्यक्ति नहीं संगठन और राष्ट्र सर्वोपरि
   दिनांक 17-जुलाई-2019

दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करतीं चित्रा ताई जोशी
‘‘परिवार, समाज और राष्ट्र में सामंजस्य बिठाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का जीवन राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत होना चाहिए। व्यक्ति नश्वर है, राष्ट्र चिरंतन है। जो व्यक्ति राष्ट्र को श्रेष्ठ समझेगा, वही स्वयं को राष्ट्र का स्तर बढ़ाने का साधन मात्र समझेगा, क्योंकि व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन और राष्ट्र सर्वोपरि है।’’ उक्त बातें राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका चित्रा ताई जोशी ने कहीं। वे गत दिनों दिल्ली में ‘वैचारिक सामंजस्य : एक चुनौती’ विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लक्ष्मीबाई केलकर ने भारतीय महिलाओं के लिए जिन आदर्शों को आधार मानकर महिलाओं के संगठन (राष्ट्र सेविका समिति) की स्थापना की, वे आज भी समाज के आधारभूत अंग हैं। मौसी जी का मानना था कि राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की अहम् भूमिका है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भाषण का उल्लेख भी किया, जिसमें उन्होंने मौसी जी के उस विचार का पुरजोर समर्थन किया था कि महिलाओं को पारिवारिक दायित्व निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिंदु डालमिया ने की।