इसलिए कुलभूषण जाधव को फंसाना चाहता है पाकिस्तान
   दिनांक 19-जुलाई-2019
 
कुलभूषण जाधव को भारतीय जासूस तथा आतंकवादी सिद्ध करके फांसी की सजा देने के षडयंत्र के पीछे पाक फौज के कई उद्देश्य हैं. आतंकवाद फैलाने के आरोपों से अपनी खाल बचाने की जुगत भिड़ा रही पाकिस्तानी फौज एक तीर से कई निशाने साधना चाह रही है. 
बड़े षडयंत्र की कड़ी है कुलदीप जाधव मामला
 
कुलभूषण जाधव के अपहरण और उसके बाद किए जा रहे प्रहसन की पटकथा पाकिस्तानी फौज ने लिखी है. एक सोची-समझी योजना के तहत ईरान से कुलभूषण जाधव का अपहरण किया गया. अपहरण के बाद कई हफ्तों तक चुपचाप नकली सबूत गढ़े गए. कुलभूषण जाधव के नकली पासपोर्ट तैयार किए गए. फिर उसे दुनिया के सामने भारतीय जासूस के रूप में प्रस्तुत किया गया. बिना किसी कानूनी मदद के कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने अपनी सैनिक अदालत में ले जाकर खड़ा कर दिया, और पाकिस्तान में आतंक फैलाने की साजिश का आरोप लगाकर फांसी की सजा सुना दी. भारत मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में गया, जहां भारत की आपत्तियों को मद्देनजर रखते हुए पाकिस्तान के तौर-तरीकों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना गया. भारत ने कुलभूषण जाधव को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, और पाकिस्तान की एक और करारी हार हुई है, लेकिन पाकिस्तान का खाकी एस्टेब्लिशमेंट इतनी आसानी से कुलभूषण जाधव को हाथ से निकलने नहीं देना चाहता. कुलभूषण जाधव को भारतीय जासूस तथा आतंकवादी सिद्ध करके फांसी की सजा देने के षडयंत्र के पीछे उसके कई उद्देश्य हैं.
1- आतंकवाद पर भारत के कूटनीतिक दबाव को संतुलित करना -
पिछले 5 सालों में भारत ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर जो कूटनीतिक दबाव बनाया है, उससे अब उसकी कमर टूटने लगी है. पाकिस्तानी फौज भले ही अलमस्त है, पर पाकिस्तान के अंदर और बाहर से दबाव बढ़ता जा रहा है. हाफिज सईद मामले में भारत ने पाकिस्तान पर बड़ी कूटनीतिक जीत दर्ज की है. संयुक्त राष्ट्र परिषद में बैठा चीन बार बार हाफिज सईद को बचा ले जाता था. लेकिन इस बार अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने चीन को मजबूर कर दिया, और बेमन से ही सही, चीन भी पीछे हट गया. उधर आपसी मुलाकातों में चीन के विदेश विभाग के अधिकारी पाकिस्तानियों से कहने लगे हैं, कि वो पाकिस्तानी हरकतों पर और अधिक पर्दा नहीं डाल सकते. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं. पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता रोक दी गई है. आधुनिक एफ -16 विमान लाख मिन्नतों के बावजूद पाकिस्तान को मिल नहीं रहे हैं. आतंकी फंडिंग के मामले में पाकिस्तान पर लगातार शिकंजा कस रहा है. फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने आतंकियों के धन स्रोतों को बंद करने के लिए पाकिस्तान को अक्टूबर तक का समय दिया है. इस समय अवधि में पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया तो उसे काली सूची में डाला जा सकता है. तब पाकिस्तान के लिए हालातों को संभालना बहुत कठिन हो जाएगा. इसीलिए आतंकी फंडिंग के मामले में हाफिज सईद की गिरफ्तारी की नौटंकी की गई है. और इसीलिए कुलभूषण जाधव को भारतीय आतंकवादी सिद्ध करना पाकिस्तानी फौज को बहुत जरूरी लग रहा है.
पाकिस्तान की मुश्कें कसता भारत का कूटनीतिक दबाव
2- ईरान के बढ़ते दबाव को कम करना -
पाकिस्तान एक कट्टर सुन्नी देश है, ईरान उसकी पश्चिमी सीमा से सटा शिया राष्ट्र है. पाकिस्तान ईरान के कट्टर दुश्मन, वहाबी सऊदी अरब का पिछलग्गू भी है. पाकिस्तान ईरान संबंधों पर इसकी छाया है. पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा अफगान जिहादियों का गढ़ है. अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, हक्कानी गिरोह, अल कायदा और इस्लामिक स्टेट पाकिस्तान जैसे दुर्दांत जिहादी आतंकी संगठन यहां पर फल फूल रहे हैं. ये सब शियाओं को गैर मुस्लिम और 'वाजिबुल क़त्ल' याने कत्ल करने योग्य समझते हैं. इसी इलाके में पाक फौज ने ईरान में आतंक मचाने वाले सुन्नी जिहादी संगठन जैश-अल-अदल को पनाह दे रखी है. जैश-अल-अदल ने नवंबर 2018 में ईरान के 14 सैनिकों (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) का अपहरण कर लिया था. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ईरान की, अयातुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में हुई इस्लामी क्रांति के प्रतीक है, और ईरान का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा संस्थान है, जिसके अंतर्गत वह खुफिया तंत्र भी आता है, जो सारी दुनिया में शिया सत्ता के हितों और इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए खुफिया कार्रवाई करता है।
जैश-अल-अदल लगातार ईरान में उत्पात मचा रहा है. ईरान इसे लेकर पाकिस्तान से बहुत नाराज है, और लगातार दबाव बना रहा है. ऐसे में यदि कुलभूषण जाधव, जिसे आईएसआई ने ईरान से अगवा किया है, आतंकी सिद्ध कर दिया जाता है, तो पाकिस्तान को ईरान से यह कहने का अवसर मिल जाएगा कि ईरानी धरती से भी पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी कार्रवाई हो रही है.
3- स्वयं को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करना-
पाकिस्तान आज दुनिया में बदनाम नाम है. यूरोप और अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के लोग वहां खुद को हिंदुस्तानी बतलाते हैं. पाकिस्तान से वहां जाने वाले प्रवासी, कलाकार, उद्योगपति और राजनयिक भी संदेह की नजरों से देखे जाते हैं और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहते हैं. यूरोप और अमेरिका में हुए दर्जनों आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से आकर जुड़े हैं. बहुतेरे आतंकी हमलों में पाकिस्तानी मूल के या पाकिस्तान आए, अथवा पाकिस्तान में प्रशिक्षित हुए जिहादियों का हाथ रहा है. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए 9/11 के हमले का एक महत्वपूर्ण सूत्र भी पाकिस्तान से जुड़ा था. एक दशक तक अमेरिका के नेतृत्व में नाटो देश ओसामा बिन लादेन को ढूंढते रहे और लादेन मिला पाकिस्तान के ऐबटाबाद में, पाक सैन्य प्रशिक्षण संस्थान के सामने बने विशाल बंगले में आराम से रहता हुआ. खूंखार तालिबानी मुखिया मुल्ला उमर को अमेरिकी अफगानिस्तान में ढूंढ रहे थे, और वो कराची के सरकारी अस्पताल में , आईएसआई की सुरक्षा में अपना इलाज करवा रहा था. आज सारी दुनिया पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक मानती है. ऐसे में कुलभूषण जाधव को फाँसकर वह स्वयं को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है.
अपनी ही लगाई आग में झुलसता पाकिस्तान
 
4- पाकिस्तान के अंदर होने वाले आतंकी हमलों का दोष भारत पर मढ़कर लोगों के आक्रोश को कम करना -
पाकिस्तान आज खुद के पैदा किए गए आतंकवाद से झुलस रहा है. पाकिस्तानी जनरलों और आईएसआई ने अखिल इस्लामवाद ( पैन इस्लामिज्म ) का नारा देकर इस्लामी जिहाद का परचम बुलंद किया, लेकिन व्यवहारिकता के धरातल पर यह सारा ताना-बाना शिया,सुन्नी , वहाबी, पंजाबी, सिंधी, पठान, मोहाजिर और कबीलों की दरारों में बंटा हुआ है. तालिबान भी कोई एक आतंकी संगठन नहीं है, बल्कि अलग-अलग आतंकी संगठनों का सामूहिक नाम है. ये सब आपस में लड़ते हैं, और एक दूसरे के लोगों को मारते हैं. एक दूसरे की मस्जिदों में आत्मघाती धमाके करते हैं. एक दूसरे के उत्सवों और जनाज़ों में बम फोड़ते हैं. इनकी इस आपसी रंजिश का इस्तेमाल पाक फौज इन्हें नियंत्रण में रखने के लिए करती है. फलस्वरूप पाकिस्तानी शहर खून से नहा रहे हैं, और बारूद से सन रहे हैं. कभी-कभी इसकी चपेट में फौजी भी आ जाते हैं. याद करें पेशावर के सैनिक स्कूल पर पाकिस्तान तालिबान का वह हमला, जिसमें दर्जनों बच्चों को मौत के घाट उतार दिया गया था. ऐसे मौकों पर जो आक्रोश उबलता है, उस आक्रोश को भारत की ओर मोड़ते रहना पाक फौज के लिए जरूरी है. इसलिए कुलभूषण जाधव को बलि का बकरा बनाया जा रहा है.
5- पाकिस्तान के अंदर भारत विरोधी उन्माद को बनाए रखना और भड़काना –
पाकिस्तान यदि शराफत से रहे तो उसे सेना रखने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन उसने एक बड़ी सेना पाल रखी है, और यह सेना पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत, और पाकिस्तान का दुर्भाग्य बन गई है. दुनिया में देशों के पास सेनाएँ हैं, पाकिस्तान में सेना के पास एक देश है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख और पाकिस्तानी जनरल पाकिस्तान की सरकार, न्याय तंत्र, नौकरशाही, व्यापार जगत , पाकिस्तानी सिनेमा, और पाकिस्तान की मुल्ला फौज, सबको अपनी उंगलियों पर नचाते हैं. पाकिस्तान से जोंक की तरह लिपटी पाकिस्तानी सेना पाकिस्तान का खून चूस -चूसकर लगातार मोटी होती गई है. अपनी दूकान चलाए रखने के लिए भारत से खतरे का हौव्वा जिंदा रखना और लोगों में भारत विरोधी उन्माद को सुलगाए रखना पाक फौज के लिए जरूरी है . काबू से बाहर होते आर्थिक हालात भी सरदर्द बने हुए हैं, महंगाई से पाकिस्तानी हलाकान हैं. इसलिए लोगों का ध्यान बँटाए रखना जरूरी है. वास्तव में कुलभूषण जाधव हिंदुओं के प्रति शाश्वत पाकिस्तानी नफरत की अभिव्यक्ति बन गए हैं, अथवा बना दिए गए हैं.
भारत के खिलाफ नफ़रत की घुट्टी

6- बलूचिस्तान की शर्मिंदगी को पोंछने का प्रयास -
अपनी ही आबादी के ऊपर टैंकों, तोपखाने, हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू जहाजों से हमला करने वाला पाकिस्तान दुनिया का इकलौता देश है. बलूचिस्तान में पाक फौज ने दशकों से तबाही मचाकर रखी है. फौजी तानाशाहों के अलावा जुल्फिकार अली भुट्टो ने भी यही किया. दूसरे शासकों ने इसमें टांग अड़ाने कि हिम्मत नहीं की. बहादुर बलूच इस हिंसाचार के खिलाफ कसकर लोहा ले रहे हैं. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे बलूच अब पाकिस्तानी अत्याचारों के खिलाफ मुखर हो गए हैं. दुनिया के पाकिस्तानी दूतावासों के सामने वह प्रदर्शन कर रहे हैं, दुनिया के अनेक पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का ध्यान भी उन्होंने आकर्षित कर लिया है. इसलिए पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव पर आरोप लगाया है कि उसे भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ने बलूचिस्तान में आतंकी कार्रवाई करने को भेजा था. ऐसा करके पाकिस्तान साबित करना चाहता है कि बलूचिस्तान में उसके कब्जे के खिलाफ होने वाला सशस्त्र विद्रोह उसके कुकृत्य की उपज नहीं है, बल्कि भारत और ईरान द्वारा प्रायोजित है.
पाक फौज से लोहा लेते बलूच
उम्मीद बनाए रखें -
कुलभूषण जाधव को न्याय दिलाने की लड़ाई अभी और चलेगी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में आए फैसले के बाद पाकिस्तान के लिए अब और मनमानी करना संभव नहीं रह जाएगा. उसकी सैन्य अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को अमान्य कर दिया गया है. पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को भारतीय दूतावास से संपर्क करने और कानूनी सहायता लेने का अधिकार देना होगा. पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव के तथाकथित कुबूलनामे का एक वीडियो प्रस्तुत किया था, लेकिन आरोपी को न्यायिक सहायता से दूर रखकर प्राप्त किए गए कुबूलनामे का कोई मतलब नहीं है. मुकदमा फिर से चलेगा. पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को मानना ही होगा. यदि वह ऐसा नहीं करता है तो भारत इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में जाएगा, जिसके पास पाकिस्तान को मजबूर करने की ताकत है. सुरक्षा परिषद में बैठा चीन भी पाकिस्तान की मदद नहीं कर सकेगा क्योंकि फैसला उसी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आया है, जिसके तहत सुरक्षा परिषद का गठन किया गया है. आने वाले महीनों में हम कुलभूषण जाधव के वापस भारत लौटने की उम्मीद लगा सकते हैं.