गहरी साजिश पर कसा शिकंजा
   दिनांक 02-जुलाई-2019

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पिछले साल दिल्ली और अमरोहा से पकड़े गए दस आतंकियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। एनआईए ने इसमें चौंकाने वाले खुलासे किए हैं
पाञ्चजन्य ब्यूरो : 
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हाल ही में आईएसआईएस प्रेरित ‘दिल्ली-अमरोहा मॉड्यूल’ के दस आतंकियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। इनमें मौलाना मुफ्ती के साथ नौ अन्य आरोपी शामिल हैं। आरोपपत्र में जांच एजेंसी ने इनके खतरनाक मंसूबों का खुलासा किया है। इन्होंने ‘ऑपरेशन बर्बादी’ नाम से दिल्ली को दहलाने की योजना बनाई थी। साथ ही, केरल से कोलकाता तक ऐसी ही साजिश रची जा रही थी।
पिछले साल ‘दिल्ली-अमरोहा मॉड्यूल’ के आतंकियों के पास से बरामद हथियार और विस्फोटक 
26 दिसंबर, 2018 को इन आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों और मीडिया के एक धड़े ने बिना सच जाने इन्हें ‘मासूम’ करार दिया था। साथ ही कहा था कि एनआईए ने सुतली बमों के साथ बच्चों को गिरफ्तार किया है। पर एनआईए के आरोपपत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिहादी मानसिकता की जड़ें कितनी गहरी और खतरनाक हैं। एनआईए का दावा है कि उसके पास आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। एजेंसी ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 17 स्थानों पर छापेमारी कर इन आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये किसी बड़े हमले को अंजाम देते, इससे पहले ही एनआईए के हत्थे चढ़ गए। एजेंसी ने जिस मॉड्यूल को ध्वस्त किया, उसे इन आरोपियों ने ‘हरकत उल हर्ब-ए-इस्लाम’ नाम दिया था। एनआईए के अनुसार, ये आतंकी आईएसआईएस से प्रेरित थे और उसी की तर्ज पर इन्होंने देश में दहशत फैलाने के मॉडयूल बनाया था। इस मॉड्यूल में शामिल आतंकी सोशल मीडिया के जरिये विदेश में बैठे आईएसआईएस आतंकियों और समर्थकों के संपर्क में थे।
मौलाना मुफ्ती के अलावा एनआईए के आरोपपत्र में जाफराबाद (दिल्ली) का मुफ्ती मोहम्मद सुहैल मुख्य आरोपी है। मूल रूप से अमरोहा (उ.प्र.) के रहने वाले सुहैल के कई फर्जी नाम हैं, जैसे- हजरत, सुहैल कासमी और अबू बशीर अलखुरासानी। सुहैल आतंकी गतिविधियों के लिए अपना नाम बदलता रहता था। अन्य आरोपियों में जाफराबाद के ही अनस युसूफ उर्फ अनु उर्फ तलहा, जुबैर मलिक उर्फ जुबैर दुजाना, राशिद जफर रक उर्ख अबू किताल अल खुरासानी व मो. फैज, हापुड़ का मो. साकिब उर्फ साकिब इफ्तिखार, मेरठ के मो. अबसार उर्फ मौलवी अबसार व नईम उर्फ नईम चौधरी, अमरोहा के सईद व मो. गुफरान निवाली तथा मेरठ के नईम उर्फ मोहम्मद नईम उर्फ नईम चौधरी शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न धाराओं में आरोपी बनाया गया है। इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए, 122 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 17, 18, 18बी, 20, 21, 23, 38 व 39, विस्फोटक अधिनियम की धारा 4 व 5 और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 26 और 29 के तहत अभियुक्त बनाया गया है।
 कोलकाता पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए संदिग्ध
‘ऑपरेशन बर्बादी’ और मुफ्ती सुहैल
पूछताछ के दौरान एनआईए को पता चला कि ‘ऑपरेशन बर्बादी’ के तहत ये आतंकी देश में सिलसिलेवार विस्फोट करने की तैयारी में थे। सुहैल, जिसे एनआईए ने मुख्य आरोपी बनाया है, का परिवार 30 साल पहले अमरोहा से आकर दिल्ली के जाफराबाद में बस गया था। सुहैल के परिवार में दीनी तालीम का माहौल है। वह मजहब को लेकर बेहद कट्टर है। उसने इस्लामिक तालीम अमरोहा के मदरसा जामा मस्जिद से ली और आगे की पढ़ाई देवबंद के एक मदरसे से की। इसके बाद वह दिल्ली के एक मदरसे में बच्चों को तालीम देने लगा। उसके पिता भी मदरसे में पढ़ाते हैं।
लॉन्चपैड था अमरोहा
सूत्रों के अनुसार, दीनी तालीम और जमात के जरिये ही सुहैल आईएसआईएस के मुर्गों के संपर्क में आया। वह अपने साथ उठने-बैठने वाले लड़कों को यह कहकर बरगलाता था कि ‘भारत में मुसलमानों पर बहुत अत्याचार हो रहे हैं’। इस तरह वह जाफराबाद के चार युवकों को अपने साथ जोड़ने में सफल रहा। इसके बाद सुहैल ने हापुड़, मेरठ और अन्य इलाकों से युवकों को अपने साथ जोड़ा और ‘आॅपरेशन बर्बादी’ के लॉन्चपैड के रूप में अमरोहा को चुना। आरोपपत्र के मुताबिक, सुहैल की शादी 2017 में में अमरोहा के मोहल्ला दरबार कलां में हुई थी। अमरोहा में वह बतौर मुफ्ती एक मस्जिद से जुड़ा और जाफराबाद आते ही उसने चोला बदल लिया। वह किसी से नहीं मिलता-जुलता था और चुनिंदा लोगों से ही बात करता था। सुहैल आईएसआईएस के अलावा, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के संपर्क में भी था। ‘दिल्ली-अमरोहा मॉडयूल’ के मो. फैज को एनआईए ने अप्रैल में उस समय गिरफ्तार किया, जब वह जम्मू-कश्मीर में हथियारों का प्रशिक्षण लेने गया था। फैज त्राल, राजौरी और बांदीपोरा में आईईडी बनाने और हथियार चलाने का प्रशिक्षण ले चुका है।
एनआईए ने आरोपपत्र में खुलासा किया है कि आतंकियों की योजना दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हमले करने की थी। इस मॉड्यूल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हमले के लिए कई जगहों की रेकी की थी। आतंकियों ने लोकसभा चुनाव के दौरान फिदायीन हमले और आईईडी विस्फोट करने की पूरी तैयारी कर रखी थी। इनके पास से हथियारों के जखीरे के साथ एक इम्प्रोवाइज्ड मिसाइल लांचर, 98 मोबाइल फोन, 25 किलो विस्फोटक रसायन, आईईडी बनाने के लिए 120 अलार्म घड़ियों के साथ अन्य सामान बरामद किया गया। खास बात यह कि इनके पास से शक्तिशाली रिमोट भी बरामद हुए जो 100 मीटर दूर से आईईडी में विस्फोट कर सकते थे। साथ ही, इनके पास से आईएसआईएस के कुछ दस्तावेज भी मिले जिसमें बम बनाने की विधि है। दो आरोपियों के वीडियो भी मिले हैं, जिन्हें फिदायीन हमले के बाद जारी किया जाना था। इस वीडियो में दोनों आतंकी भारत को काफिरों का देश बताते हुए मुसलमानों से जिहाद की अपील कर रहे हैं। एनआईए को इनके पास से आईएसआईएस हैंडल के आॅडियो संदेश, जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की जहरीली तकरीरें और कई अन्य कुख्यात आतंकियों के संदेश भी मिले हैं।
अमरोहा से कोयंबतूर तक खतरा
एक तरफ एनआईए ने ‘अमरोहा दिल्ली मॉड्यूल’ के दस दहशतगर्दों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, तो दूसरी तरफ दक्षिण के तट पर आईएसआईएस का खतरा मंडराने लगा है। श्रीलंका में ईस्टर पर हुए आतंकी हमलों के बाद इस बात के ठोस प्रमाण मिल रहे हैं कि जिहादी मानसिकता दक्षिण में भी गहरे पैर पसार चुकी है। इसी महीने एनआईए ने तमिलनाडु और श्रीलंका के आईएस मॉड्यूल्स के बीच संपर्क सूत्र का काम करने वाले मो. अजहरुद्दीन नामक व्यक्ति को कोयंबटूर से गिरफ्तार किया है। वह श्रीलंका में हुए आतंकी हमले में शामिल फिदायीन जाहरान हाशमी से फेसबुक के माध्यम से जुड़ा हुआ था। अजहरुद्दीन फिदायीन हाशमी के जिहादी पोस्ट को दूसरों तक भेजता था। अजहरुद्दीन दिखाने के लिए टूर-ट्रैवल्स का काम करता था, लेकिन उसका असली काम आईएस की विचारधारा को फैलाना था। इसके लिए उसने फेसबुक पर खलीफा जीएफएक्स नाम से पेज बना रखा है। उसके पास से 14 मोबाइल फोन, 29 सिमकार्ड, 10 पेन ड्राइव, तीन लैपटॉप, छह मेमोरी कार्ड, चार हार्ड डिस्क के साथ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं। एनआईए अब दक्षिण भारत में लगातार छापेमारी कर रही है। श्रीलंका में हुए आतंकी हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के लिए तौहीद जमात को जिम्मेदार माना गया था। इसी संगठन की एक इकाई तमिलनाडु तौहीद जमात के नाम से काम करती है। जाहरान हाशमी दक्षिण भारत के मुसलमानों के बीच नायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। उसके वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, जिसमें वह युवाओं को जिहाद के लिए उकसा रहा है। एनआईए इन वीडियो को देखने वालों पर करीबी नजर रखे हुए है। चौंकाने वाली बात यह है कि हाशमी के वीडियो देखने वालों में अधिकतर 25 से 30 साल के युवक हैं। एनआईए ने अजहरुद्दीन के अलावा, छह अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी को आशंका है कि आईएस तमिलनाडु और केरल में युवाओं की भर्ती कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ये नौजवान इतने शातिर हैं कि आईएस के प्रशिक्षण वीडियो देखकर ही आईईडी सर्किट जोड़ना सीख चुके हैं। जांच के दौरान एक अन्य अभियुक्त के संबंध केरल के कासरगोड के आईएस मॉड्यूल से जुड़े पाए गए हैं। केरल से ही रियाज अबू बकर नामक आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। वह आईएस के इशारे पर केरल में हमले की फिराक में था।
कोलकाता से 4 आतंकी गिरफ्तार
इसी साल, 25 जून को कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने हावड़ा और सियालदाह स्टेशन परिसर में छापेमारी कर आईएस से प्रेरित आतंकी संगठन नियो जमात उल मुजाहिदीन बंगलादेश (जेएमबी) से जुड़े चार आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन बांग्लादेशी हैं, जबकि एक पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले का है। इन आतंकियों के पास से आईएस के दस्तावेज व जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के जिहादी वीडियो मिले हैं।
खुफिया जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने पहले मो. जिया उररहमान मोहसिन और जहीर अब्बास रशीद को गिरफ्तार किया। दोनों बांग्लादेश के रहने वाले हैं। कुछ महीने पहले दोनों अवैध तरीके से भारत आए थे। इनसे पूछताछ के बाद एसटीएफ ने जेएमबी के दो अन्य सदस्यों, मो. शाहीन आलम और रबीउल इस्लाम को गिरफ्तार किया। शाहीन बांग्लादेशी है, जबकि रबीउल इस्लाम बीरभूम के मित्रापुर का निवासी है। पूछताछ के दौरान उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से बंगाल और आसपास के राज्यों में रह रहे थे। इनका काम आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाना और अधिक से अधिक संख्या में आतंकियों की फौज तैयार करना था। इन लोगों ने कई युवाओं को अपने संगठन से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया। इन्होंने जिहाद के लिए उकसाने वाले आॅडियो संदेश भी रिकॉर्ड कर रखे थे, जिन्हें नए सदस्यों से साझा किया जाता था। खासतौर से आॅडियो-वीडियो को ये लोग सोशल साइट पर डालते थे और साथ ही, पर्चे छपवा कर बांटते भी थे।
खुफिया एजेंसियों की सजगता के चलते आतंक के इन मॉड्यूलों पर लगाम कसने में अभी तक सुरक्ष एजेंसियां कामयाब रहे हैं लेकिन खतरा बड़ा है। देश के अलग-अलग कोनों से आतंकियों के पकड़े जाने की खबरें किसी बड़े खतरे और गहरी साजिश का संकेत दे रही हैं।
आरोपपत्र में करतूतों का कच्चा चिट्ठा
एनआईए के आरोपपत्र में 10 लोगों के नाम हैं, जिनका सरगना एक मस्जिद का मौलवी मुफ्ती सुहैल है।
‘दिल्ली अमरोहा मॉड्यूल’ के सभी आतंकी विदेश में बैठे आईएसआईएस के आतंकियों के संपर्क में थे।
आरोपपत्र में दिल्ली में चिह्नित उन स्थानों का उल्लेख है, जहां आईईडी विस्फोट किए जाने थे।
आरोपियों के पास से भारी मात्रा में हथियारों के साथ 25 किलो विस्फोटक रसायन मिला यानी वे आईडी बनाने की विधि जानते थे।
एनआईए को 120 अलार्म घड़ियां मिलीं, जिनका प्रयोग टाइम बम बनाने में किया जाना था।
बम बनाने, फोड़ने और उससे बड़ी संख्या में लोगों को मारने का आईएस का मैनुअल उनके पास मिला।
10 लोगों के पास से कुल 98 मोबाइल फोन मिले।
एक मोबाइल में दो आत्मघाती हमलावरों के वीडियो मिले, जो हमले के बाद जारी किए जाने थे।