पाकिस्तानी फौज के जुल्मों से त्रस्त बलुचों का सब्र दे रहा जवाब
   दिनांक 02-जुलाई-2019
पाकिस्तान में लगभग हर हफ्ते 10-12 बलूचों को अगवा किया जा रहा है और तीन-चार लोगों की हिरासत में मौत हो रही है। पाकिस्तान बलूचों के साथ ऐसा सलूक कैसे कर सकता है? क्या इस बारे में बात नहीं होनी चाहिए?
ब्रिटेन में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच क्रिकेट विश्वकप के दौरान बलूचों ने लॉडर्स मैदान के बाहर ये पोस्टर बैनर लगाए
 
स्विट्जरलैंड में निर्वासित जीवन बिता रहे जाने-माने बलूच नेता और बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख बरहमदाग बुगती ने पाकिस्तान में लापता लोगों को सामने लाने की मांग की है। उन्होंने कहा, आज इंसान तो क्या जानवरों के भी हक की बात हो रही है और बड़े जोर-शोर से हो रही है। ऐसे में पाकिस्तान बलूचों के साथ इस तरह का सलूक कैसे कर सकता है? आखिर क्या वजह है कि बलूच, सिंधी, खैबर पख्तूनख्वा के लोग ही लापता हो रहे हैं? अगर आपने किसी को किसी जुर्म में उठाया है, तो छिपाना कैसा? उन्हें सामने लाएं, मुकदमा चलाएं, सजा दें। लेकिन सामने तो लाएं।
 
गत 23 जून को जिस समय ब्रिटेन के ऐतिहासिक लॉडर््स के मैदान में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच विश्वकप क्रिकेट का मैच चल रहा था। उसी स्टेडियम के बाहर कुछ लोग पर्चे बांट रहे थे। इन पर्चों के जरिये मांग की गई थी कि लापता लोगों को सामने लाया जाए, उनके साथ इंसाफ हो। इसके अलावा, वहां बैनर-पोस्टर लगाए गए थे। कुछ गाड़ियों पर भी इसी तरह के बैनर लगे थे। स्टेडियम के ठीक बाहर सड़क पर भी नारे लिखे हुए थे। यह सब बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी और वर्ल्ड बलोच संगठन ने मिलकर किया था। जिस समय स्टेडियम के बाहर यह सब चल रहा था, अंदर पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा और पाकिस्तानी हुकूमत के चंद आला अफसर मैच देख रहे थे। बाद में पाकिस्तानी दर्शक जैसे दिखने वाले कुछ लोगों ने ये पोस्टर-बैनर फाड़ डाले और पर्चे बांट रहे लोगों को बुरा-भला कहा। इसे गैरवाजिब करार देते हुए खास बातचीत में बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी प्रमुख बरहमदाग बुगती ने कहा, इस तरह के सलूक का कोई मतलब नहीं। इस तरह की सोच रखने वालों का क्या कहा जाए? यह समझदारी की बात होती है कि जब कोई कुछ कहे तो सुनें, उसे समझने की कोशिश करें और फिर राय कायम करें। अगर आप सुनने को तैयार नहीं तो इसका सीधा सा मतलब है कि आप समझने की मानसिकता में नहीं हैं। बरहमदाग बुगती पाकिस्तानी फौज के कायराना हमले में शहीद हुए अकबर बुगती के पोते हैं और बलूचों के साथ हो रही फौजी दहशतगर्दी की हकीकत को दुनिया तक पहुंचाने के काम में जुटे हैं। उनकी पार्टी यूरोप के विभिन्न देशों में रैली आदि निकालती रहती है। इसी क्रम में उनकी पार्टी लॉर्डस स्टेडियम के बाहर शांतिपूर्वक तरीके से पोस्टर-बैनर के जरिये अपनी बात लोगों तक पहुंचा रही थी। लोगों के हाथों में तख्तियां थीं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिधि अब्दुल नवाज बुगती कहते हैं, ह्यह्यपाकिस्तान में अमूमन हर हफ्ते 10-12 लोगों को अगवा किया जा रहा है और तीन-चार लोगों की हिरासत में मौत हो रही है। क्या इसके बारे में बात नहीं होनी चाहिए? क्या इन लोगों का कोई अधिकार नहीं? क्या मानवाधिकार का मतलब चुनिंदा लोगों को मिली खास सुविधा से है? 
 
यह सच है कि पाकिस्तान में लोगों को जबरन लापता करना मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है। अब तक न जाने कितने लोग लापता किए गए, कितनों की लाशें मिली, इसका कोई हिसाब नहीं क्योंकि पाकिस्तानी हुकूमत इस तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं रखती। बात इसलिए भी सामने नहीं आ पाती कि वहां के मीडिया में वही छपता है जो फ्रंटियर कॉर्प्स और फौज चाहती है। वहां लापता लोगों के लिए एक आयोग जरूर है, लेकिन सिर्फ दिखाने के लिए। बुगती कहते हैं, ह्यह्यहम कोई गैरवाजिब बात नहीं कर रहे। अगर किसी ने कोई गुनाह किया है तो उससे पूछताछ कीजिए, गिरफ्तार कीजिए, अदालत ले जाइए, जुर्म साबित हो जाए तो सजा दीजिए, किसने रोका है? पर पाकिस्तानी फौज जिस तरह दहशतगर्दी पर आमादा है, वह दुनिया में इनसानी हकों के पैरोकारों के लिए फिक्र की बात होनी चाहिए। कोई इक्का-दुक्का वाकया होता तो और बात थी, यहां तो लोगों को अगवा करने का सिलसिला ही चल निकला है। ऐसे में नीयत पर सवाल तो उठेंगे।
 
वैसे, बलूच संगठनों ने जिस तरह पूरे पाकिस्तान में लोगों को लापता किए जाने का मुद्दा उठाया है, उससे लगता है कि पाकिस्तानी फौज के हाथों जुल्म झेल रही कौमें अपने दुख-दर्द की साझा दवा खोजने की ओर बढ़ रही हैं। बरहमदाग बुगती कहते हैं, ह्यह्यइसमें दो राय नहीं कि हम बुनियादी तौर पर बलूचों के साथ हो रही फौजी दहशतगर्दी और इनसानी हकों की नाफरमानी का मसला उठाते रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि जबरन लापता किए जाने का दर्द सिंध, खैबर पख्तूनख्वा के लोगों के साथ मुहाजिर और तमाम मजहबी अल्पसंख्यकों में भी है। हमारा साफ मानना है कि इस तरह का सलूक जिसके भी साथ होता है, गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसे लोगों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए जिनकी वजह से बेकसूर लोगों के साथ दरिंदगी हो रही है और जिन्होंने नाहक यह सब झेला है, उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए। हम उन सभी लोगों के साथ हैं जिनके साथ जानवरों से भी बदतर सुलूक हो रहा है।
 
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की पिछली बैठक में बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के अनगिनत मामलों पर चिंता जताते हुए अब्दुल नवाज बुगती ने परिषद से अपील की थी कि वह बलूचों के साथ हो रहे वहशियाना सुलूक को गंभीरता से ले, क्योंकि पाकिस्तानी फौज जो कुछ कर रही है, वह निहायत हैवानियत है और सभ्य समाज में इस तरह के सलूक की कोई जगह नहीं। उन्होंने अपने संबोधन में साफ कहा था कि बलूचिस्तान में जिस तरह की बर्बरता हो रही है और आएदिन लोगों को अगवा किया जा रहा है, उनकी हत्या की जा रही है, उसे रोकने के लिए परिषद को तत्काल आगे आना चाहिए। बरहमदाग बुगती कहते हैं, लोगों की आवाज दबाने की जिस तरह की कोशिशें पाकिस्तान में हो रही हैं, उसकी मिसाल खोजना मुश्किल है। वे बलूचिस्तान को अपना हिस्सा बताते हैं, लेकिन क्या कभी सुना है कि कोई मुल्क अपने ही लोगों पर हवाई हमले करे? लेकिन बलूचिस्तान में ऐसा हमेशा होता है। कई बार जमीनी फौज और हवाई फौज एक साथ हमले करती हैं। पर हमें पूरा यकीन है कि इस स्याह रात की एक न एक दिन मौत जरूर होगी और उम्मीद की उस सुबह के आने तक हमें अपनी जद्दोजहद जारी रखनी है। पाकिस्तान के साथ दिक्कत यह है कि उसे न तो खैबर पख्तूनख्वा के लोग अपने लगते हैं, न सिंध के, न बलूचिस्तान के। इसी कारण खैबर पख्तूनख्वा में भी पाकिस्तान से अलग होने की मांग लगातार उठने लगी है। हजारों की तादाद में लोग अक्सर आजादी की मांग के साथ सड़कों पर निकल आते हैं। दरअसल, पाकिस्तान ने खुद ही अपनों को दुश्मन बनाया है और बलूचिस्तान के लोगों के साथ जैसा उसका सुलूक रहा है, उसे देखकर बलूचों को ऐसा लगने लगा है कि हुकूमत उनकी नस्लकुशी करना चाहती है। इसी वजह से बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फौज पर घातक हमले बढ़ गए हैं। यह तो समझना होगा कि सब्र की भी कोई सीमा होती है और जब किसी आदमी को इतना धकेलें कि उसकी पीठ दीवार से जा लगे तो उसके लिए पूरी ताकत से सामने वाले पर हल्ला बोलने के अलावा रास्ता नहीं रहता। कहीं बलूच भी उस स्थिति में तो नहीं पहुंचते जा रहे !