हृदय नारायण दीक्षित डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान से सम्मानित
   दिनांक 02-जुलाई-2019

 
श्री ह्दय नारायण दीक्षित को डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान से सम्मानित करते हुए राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी(बाएं से तीसरे) एवं श्री राम नाईक। मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्टजन
‘‘आज भौतिकता की आंधी में जो स्थिर हैं, वे ही इस देश की प्रज्ञा को बचाकर चलने का प्रयत्न कर रहे हैं। मातृभूमि का सारस्वत स्वर ही इस देश की प्रज्ञा है। डॉ. हेडगेवार इसी प्रज्ञा का संरक्षण करना चाहते थे।’’ ये उद्गार हैं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी के। वे पिछले दिनों कोलकाता के स्थानीय कला मंदिर में श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय के शताब्दी वर्ष में आयोजित 30वें ‘डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान’ में बतौर अध्यक्ष बोल रहे थे। इस अवसर पर पुस्तकालय की ओर से प्रख्यात चिंतक-लेखक तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री ह्दय नारायण दीक्षित को ‘डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री त्रिपाठी ने कहा कि हमारी सनातन भारतीय संस्कृति और प्रज्ञा पुरुषों के ज्ञान का ही वैशिष्ट्य है जिसके कारण भारतीय संस्कृति की महिमा आज भी बरकरार है, जबकि तमाम विदेशी संस्कृतियोंं का लोप हो गया है। उन्होंने कहा कि यह डॉ. हेडगेवार की प्रज्ञा का ही प्रताप है जिसके कारण आज सारे देश में लाखों की संख्या में लोग समर्पित भाव से राष्ट्र की सेवा में लगे हुए हैं। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने कहा कि वन्देमातरम कहने पर विद्यालय से निकाले जाने वाले डॉ. हेडगेवार के मन में संघ की स्थापना का बीजारोपण कोलकाता में ही हुआ था। डॉ. हेडगेवार ने कार्यकर्ताओं के ह्दय में जो विचारधारा निर्मित की, वह आज साकार होती प्रतीत हो रही है। इस मौके पर उन्होंने कुमारसभा के मार्गदर्शक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल आचार्य विष्णुकांत शास्त्री का भावपूर्ण स्मरण किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री ह्दय नारायण दीक्षित ने सम्मान के लिए कुमारसभा पुस्तकालय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने समाज में व्याप्त विभेद पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि हमारे आपसी अलगाव के कारण ही मुट्ठी भर लोग देश की सम्पदा को लूट ले गये। डॉ. हेडगेवार ने इन सब भेदों को समाप्त करने हेतु ‘भारत माता की जय’ का मंत्र देकर हमें एक माता का पुत्र बना दिया। डॉ. हेडगेवार देश के प्रथम संगठन विज्ञानी थे जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे विराट संगठन का बीज बोया। वे ऐसे चिकित्सक थे जिन्होंने पूरे देश की वास्तविक बीमारी को पहचानकर उसके समुचित इलाज के लिए राष्ट्रीय ऐक्य स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।