मुख्यधारा मीडिया का हिन्दू विरोधी चरित्र
   दिनांक 22-जुलाई-2019
 
 
 
केंद्र में भाजपा सरकार की वापसी के बाद मीडिया का बिल्कुल अलग अवतार देखने को मिल रहा है। उसका ये रूप पहले से ज्यादा विचित्र है। मुख्यधारा मीडिया के बड़े वर्ग का मूल चरित्र हमेशा से हिन्दू विरोधी रहा है। लेकिन अब वह हर छोटी-बड़ी सामाजिक समस्या या टकरावों को हिन्दू धर्म के साथ जोड़ने लगा है। बच्चों के खेल के मैदान और पड़ोसियों में होने वाली कहा-सुनी से लेकर शादी-ब्याह जैसे पारिवारिक मामलों को ऐसा रंग दिया जा रहा है, मानो देश किसी सामाजिक संघर्ष के बीच में है। इस कोशिश में मीडिया को हिन्दुओं पर आए दिन हो रहे अत्याचारों की ढेरों खबरें दबानी पड़ती हैं।
 
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक मदरसे से हथियारों का जखीरा निकला तो तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया में सन्नाटा छा गया। जब चैनलों ने इसकी खबर नहीं दिखाई तो सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल पूछने शुरू कर दिए। जवाब में चैनलों के संपादकों ने घर छोड़कर भागे एक लड़के-लड़की की कहानी को तूल देकर ध्यान भटका दिया। आजतक समूह ने एक रणनीतिक संपादकीय फैसले के तहत बिजनौर की घटना से ध्यान बंटाने के लिए बरेली की प्रेमकथा को चटखारे लेकर दिखाया। इसके बाद लगभग सारे चैनल इस भेड़चाल में शामिल हो गए। मानो न्यूज चैनलों के स्टूडियो पारिवारिक न्यायालय में बदल गए हैं और एंकर परिवारों के बीच सुलह करवा रहे हैं। वे समाचार चैनल ही थे, जिन्होंने इस मामले को ‘अनुसूचित जाति बनाम ब्राह्मण’ बनाया, ताकि इसी बहाने सामाजिक टकराव पैदा किया जा सके। यह तथ्य छिपाया गया कि लड़की आजतक समूह के पत्रकारिता संस्थान में प्रवेश लेना चाहती थी। पिता ने इसके लिए मना किया। तात्कालिक रूप से सारा विवाद इसी बात से शुरू हुआ था। पत्रकारिता के पाठ्यक्रम के नाम पर आजतक समूह लाखों रुपये फीस वसूलता है। क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि इसी नुकसान का बदला लेने के लिए आजतक समूह ने लड़की को मंच दिया और उसके पिता की पगड़ी सरेआम उछाली? अच्छी बात यह है कि अब लोग बहुत जागरूक हो चुके हैं। आम लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से आजतक समूह के खिलाफ एक आंदोलन छेड़ दिया। चैनल के बहिष्कार की अपील की गई।
 
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक मदरसे के कुछ लड़कों की पिटाई की खबर को भी मीडिया के इसी जाने-पहचाने वर्ग ने तूल दिया। जोर-शोर से बताया गया कि पीड़ितों से ‘जय श्रीराम’ बुलवाया गया। पुलिस जांच में पता चला कि बजरंग दल के जिन 3 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था वे घटना के समय वहां मौजूद ही नहीं थे। सच सामने आने के बाद मीडिया ने आंख-कान बंद कर लिए। इतनी नैतिकता नहीं बची कि कम से कम सही खबर भी दिखा दें ताकि लोगों को सच पता चले। यही स्थिति राजस्थान के बूंदी में हुई, जहां संघ की शाखा लगा रहे बच्चों को दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया, लेकिन मीडिया ने खबर गायब कर दी। अमेठी में अनुसूचित जाति के एक दंपति को बुरी तरह पीटा गया। उन्हें मुसलमान बनने को कहा गया। लेकिन ‘दलितों का हितैषी’ होने का दावा करने वाली मीडिया को यह ‘लिंचिंग’ का मामला नहीं लगा।
 
मीडिया अक्सर नागरिक स्वतंत्रता का पक्षधर होने का दावा करता है, पर मामला जब हिन्दुओं से जुड़ा हो तो उसका रवैया अलग होता है। रांची में 19 साल की एक लड़की को फेसबुक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया। वह 4 दिन तक जेल में रही, लेकिन कहीं कोई चर्चा नहीं हुई। मजिस्ट्रेट ने जमानत की शर्त के तौर पर कुरान बांटने का फतवा दिया, तब जाकर लोगों को पता चला कि इतना कुछ हो चुका है। आए दिन हिन्दुओं के नरसंहार की धमकी के वीडियो जारी हो रहे हैं, किसी आरोपी को पुलिस ने जेल भेज दिया तो मीडिया कितना हंगामा मचाएगा कल्पना की जा सकती है।
 
किसी हीरो-हीरोइन या मॉडल से जुड़ी कोई आपराधिक घटना हो तो चैनल खूब चटखारे लेकर दिखाते हैं, पर नागपुर में खुशी परिहार नाम की एक मॉडल की उसके दोस्त अशरफ शेख ने बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना चैनलों के देर रात के ‘क्राइम शो’ तक में जगह नहीं पा सकी। शायद इसलिए, क्योंकि ऐसी घटनाओं को दिखाने से लड़कियों में सुरक्षा को लेकर जागरुकता पैदा हो सकती है। बढ़ती जनसंख्या असंतुलन का मुद्दा देश में बहुत लोगों को परेशान कर रहा है, पर मीडिया के लिए यह ‘विवादित विषय’ है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में जनसंख्या विस्फोट की स्थिति है व इसे नियंत्रित करना जरूरी है। जी न्यूज और दैनिक जागरण ने इस बयान को ‘विवादित’ बताते हुए प्रकाशित किया ।