''कश्मीर केवल भूभाग नहीं, हमारी संस्कृति व ज्ञान का केंद्र है''
   दिनांक 22-जुलाई-2019
 
 
संगोष्ठी को संबोधित करते डॉ. सुधांशु त्रिवेदी। मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्टजन
पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर विचार मंच एवं भारत नीति प्रतिष्ठान के तत्वावधान में कांस्टीट्यूशन क्लब में 'रीक्लेमिंग कश्मीर द सैक्रेड लैंड' विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे विचारक एवं भाजपा के प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कश्मीर हमारे ज्ञान-विज्ञान के संस्थानों का केन्द्र रहा है। कुछ लोग कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के सूत्रों से कश्मीर समस्या का समाधान निकालना चाहते हैं, लेकिन जो कश्मीरियत है, उसमें अगर हजरतबल है तो अमरनाथ भी है। अमरनाथ पर हमला करना कश्मीरियत नहीं हो सकता। सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने पर जश्न मनाना हैवानियत है, इंसानियत नहीं। जो वार्ता के लिए आना चाहता है वह कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के साथ आए तो जरूर कश्मीर समस्या का समाधान मिलेगा। कार्यक्रम में उपस्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्ट्डीज के अध्यक्ष डॉ. कपिल कपूर ने कहा कि शस्त्र और शास्त्र दोनों चाहिए। हिन्दुत्व की प्रकृति है कि जब वह शक्तिशाली होता है तो हमारा शत्रुबोध कम हो जाता है और फिर हमारा शत्रु की तरफ थोड़ा दया वाला भाव बन जाता है। यह एक कमजोरी है, जिसके कारण हिन्दुओं ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। जम्मू- कश्मीर विचार मंच के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार जवाहर लाल कौल ने कहा कि हमें अपने इतिहास को याद रखना होगा, क्योंकि जो इतिहास को भूल जाता है, इतिहास उन्हें भूल जाता है।