राजस्थान की रग-रग में है भारतीय इतिहास की झलक
   दिनांक 22-जुलाई-2019
 
 
मंच पर उपस्थित (दाएं से) प्रो. कुमार रत्नम, प्रो. अरविंद जामखेड़कर, प्रो. एस.एस.सारंगदेवोत, डॉ. बाल मुकुंद पांडेय एवं प्रो. के.एस. गुप्ता
''हमारे जीवन और राष्ट्र को दिशा देने वाली विभूतियों की जीवनियां भारतीय इतिहास से बाहर हो गई हैं। जहां हम अपमानित हो सकते हैं, ऐसे विषयों को इतिहास से जोड़ा जा रहा है, जो उचित नहीं है और यह बंद होना चाहिए।'' उक्त बातें अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संगठन सचिव डॉ. बाल मुकंुद पांडेय ने कहीं। वे गत दिनों उदयपुर में जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के इतिहास एवं संस्कृत विभाग व भारतीय इतिहास अनुसंधाान परिषद्, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय 'महाराणा कुंभा- व्यक्तित्व एवं कृतित्व' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित इतिहासविद् प्रो. के.एस. गुप्ता ने कहा कि मेवाड़ ऐसा क्षेत्र है, जहां एक लाख साल पहले भी मानव का विचरण माना गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि प्रदेश में जितने दुर्ग हैं, जो महाराणा कुंभा द्वारा बनवाए गए हैं, वे सिर्फ दुर्ग ही नहीं बल्कि उनकी सूझबूझ का अनुपम उदाहरण हैं। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष प्रो. अरविंद जामखेडकर ने कहा कि भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप और महाराणा कुंभा ऐसे दो व्यक्तित्व रहे हैं, जिन्होंने सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को समानांतर रूप में लाने का प्रयास किया।