आजम खान' की आदत है फूहड़ता से बोलना
   दिनांक 27-जुलाई-2019
अर्मादित और फूहड़ता से भरी हुई भाषा बोलना आजम खान की आदत बन चुका है. कई बार वह ऐसे शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं जिसकी एक सभ्य व्यक्ति से उम्मीद नहीं की जा सकती. 

 
विधानसभा का सदस्य रहते हुए भी आज़म खान बेतुके और विवादित बयान देते रहते थे. वही काम उन्होंने लोकसभा में भी किया मगर यहां पर वह फंस गए हैं. केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का यह तर्क, अत्यंत प्रासंगिक है कि आज़म खान लम्बे समय तक विधानसभा के सदस्य रहे हैं इसलिए उनके इस बयान को नज़र अंदाज नहीं किया जा सकता है. उन्हें हर हाल में माफी मांगनी चाहिए. लोकसभा में माहौल उनके खिलाफ है. माफी न मांगने की दशा में उनके खिलाफ कार्रवाई तय है. उत्तर प्रदेश में भी आजम खान के अमर्यादित किस्म के व्यंग्य और बेतुके बयानों के कारण अक्सर विवाद हुआ. कुछ मामले में एफ.आई.आर भी दर्ज हुई मगर आजम खान ने अपने आचरण में कोई परिवर्तन नहीं किया. ऐसा लगता है -जैसे आज़म खान का यह मौन सन्देश है कि --" मैं नहीं सुधरूंगा."
आजम खान ने 5 अप्रैल 2019 को एक जनसभा में मर्यादा की सभी हदें पार करते हुए भाषण दिया. उसमे उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों के बारे में अमार्यादित टिप्पणी की. अधिकारियों के बारे में उन्होंने कहा कि "लानत है ऐसी मां की कोख पर जिन्होंने ऐसे लोगों को जन्म दिया है." आजम खान के खिलाफ इस मामले में रामपुर जनपद में एफ.आई.आर दर्ज हुई.
27 दिसंबर 2018 को तीन तलाक के मुद्दे पर आज़म खान ने कहा था "मुसलमानों के लिए कोई कानून मान्य नहीं है. मुसलमान सिर्फ कुरान मानता है. जो कुरान में कहा गया है, मुसलमान वही मानेगा. जो लोग कुरान को जानते हैं, उनको मालूम है कि तलाक की पूरी प्रक्रिया कुरान में दी हुई है.” 
वर्ष 2017 में आज़म खान ने सेना के जवानों को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि “कारगिल का युद्ध मुसलमान सैनिकों की वजह से जीता गया था.” उनके इस बयान की जमकर निंदा हुई थी। इस मामले में रामपुर के भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने रामपुर जनपद के थाना सिविल लाइन्स में 30 जून वर्ष 2017 को एफ.आई.आर दर्ज कराई थी. आजम के इस विवादित बयान की सी. डी. भी पुलिस को उपलब्ध कराई गई थी. 
‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाओं पर 24 जुलाई 2018 को प्रतिक्रया देते हुए आज़म खान ने कहा था “मुसलमानों को डेयरी का व्यवसाय बंद कर देना चाहिए. कुछ नेताओं को कहते हुए मैंने सुना है कि मुसलमान गाय को अगर छूएगा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतना पडेगा.” 
22 नवम्बर 2014 को मुलायम सिंह यादव का जन्म दिन भव्य तरीके से मनाया गया था. इसका इंतजाम आजम खान ने कराया था. मीडिया के लोगों ने जब आज़म खान से पूछा कि जन्म दिन को इतने भव्य तरीके से मनाने के लिए पैसा कहां से आया है ? तब आज़म खान ने कहा था “यह पैसा तालिबान और दाउद इब्राहिम ने भिजवाया है.”
अमर सिंह जब समाजवादी पार्टी में वापस आ रहे थे तब आजम खान ने कहा कि “जब तूफ़ान आता है तो कूड़ा - करकट भी साथ में लाता है.” इसके पहले जब अमर सिंह और जयाप्रदा के विवाद में आजम खान समाजवादी पार्टी से निकाले गए थे. उस समय उन्होंने कहा था "एक रक्कासा (नाचने वाली ) के लिए मुझे पार्टी से निकाला गया है." अभी कुछ समय पहले जयाप्रदा के किसी बयान पर प्रतिकिया देते हुए उन्होंने कहा कि "मै नाचनेवाली के मुंह नहीं लगना चाहता हूँ" 
5 अक्टूबर 2017 को एक जनसभा में आज़म खान ने कहा कि " इस देश का नौजवान नौकरी मांग रहा है. गोरखपुर की महिलाएं अपने मासूम बच्चों की मौत का हिसाब मांगती हैं तब बादशाह कहते हैं - रूक जाओ. मुझे गुजरात के कुछ और मासूमों को अभी तेज़ाब में जलाना है. बादशाह झूठ नहीं बोलते और जो झूठ बोलता है वो बादशाह नहीं होता. 
अपने एक दूसरे बयान में आज़म खान ने जहर उगला " मोदी जी की फ़ौज के लोगों को जो ट्रेनिंग दी गयी है. उसी पर अमल शुरू हो गया है. 6 दिसंबर को जब बाबरी मस्जिद गिराई गयी. तब वहां पर एक पक्ष था जो मस्जिद को गिरा रहा था , दूसरे पक्ष के लोगों को पुलिस ने फैजाबाद की सरहदों पर रोक दिया था. एक पक्ष ने अपनी बहादुरी दिखाई थी. जो बहादुरी 6 दिसंबर को दिखाई गयी. वही बहादुरी ,वही मर्दानगी उस समय कहाँ थी ? जिस वख्त बाबर ने या मीर बाकी ने इस मस्जिद को बनवाना शुरू किया था. सवाल सिर्फ इतना है कि यह मर्दानगी उस वख्त कहां थी जो आज है.?