''संस्कृत जाने बिना भारत को समझना मुश्किल''
   दिनांक 29-जुलाई-2019

श्री मोहनराव भागवत
गत दिनों नागपुर में सम्पन्न एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि संस्कृत को जाने बिना भारत को पूरी तरह से समझना मुश्किल है। सभी भारतीय भाषाएं, जिनमें वनवासी भाषाएं भी शामिल हैं, कम से कम 30 प्रतिशत संस्कृत शब्दों से बनी हैं। डॉ. आंबेडकर ने भी इस बात पर अफसोस जताया था कि उन्हें संस्कृत सीखने का अवसर नहीं मिला, लेकिन यह देश की परंपराओं के बारे में जानने के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के किसी भी हिस्से में कोई ऐसी भाषा नहीं है, जिसे तीन से चार महीनों में नहीं सीखा जा सकता। अगर हम पहली बार कोई भाषा सुन रहे हैं और व्यक्ति थोड़ा धीरे बोलता है, तो कम से कम उसकी भावना समझ सकते हैं। इसका कारण संस्कृत है। संस्कृत ज्ञान की भाषा है और (प्राचीन) खगोल विज्ञान, कृषि और आयुर्वेद के सभी ज्ञान संस्कृत में ही मिलते हैं। यहां तक कि भारत के पूर्व-आधुनिक इतिहास के संसाधन भी केवल संस्कृत में हैं। इसलिए संस्कृत को इस तरह से पढ़ाया जाना चाहिए ताकि इसे हर कोई सीख सके और ज्ञान अर्जित कर सके। इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्यजन अपस्थित थे।