''देश के इतिहास को संरक्षित करना पत्रकारों की जिम्मेदारी''
   दिनांक 29-जुलाई-2019

सम्मानित पत्रकारों के साथ डॉ. संबित पात्रा (बाएं से तीसरे)
''इतिहास का विस्मरण हो जाए तो आत्मविश्वास नहीं आता और आत्मविश्वास खोने वाला देश कभी आगे नहीं जा सकता। अपने गौरवशाली इतिहास को भूल जाना भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है।'' उक्त बातें भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने कहीं। वे पिछले दिनों विश्व संवाद केंद्र, पुणे और डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि देश ने राजनीतिक नेताओं को अपने सिर पर बिठा रखा है। संपन्नता के लिए संवाद आवश्यक है और इसके लिए विश्व संवाद केंद्र का कामकाज बहुत महत्वपूर्ण है। पश्चिमी लोगों ने हमारे मन में यह बिठाया है कि आपके देश में कोई बड़ा व्यक्ति हो ही नहीं सकता। अंग्रेजों ने जानबूझ कर यहां का ज्ञान नष्ट किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि भारत से भारतीयता निकाल लें तो भारत भारत नहीं रहेगा। इसलिए हर वर्ग को भारतीय परंपराओं में अपने आदर्श खोजने चाहिए। स्वास्थ्य क्षेत्र को चरक और धन्वंतरी को आदर्श मानना चाहिए, नौकरशाही को विश्वकर्मा को आदर्श मानना चाहिए और पत्रकारों के आदर्श नारद होने चाहिए। देश और राष्ट्र दो अलग चीजें हैं और हमें राष्ट्र पर ध्यान देना चाहिए। पत्रकार के रूप में देवर्षि नारद की भूमिका का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता के पास रहते हुए भी सरकार से कुछ नहीं मांगना, यह नारद से सीखना चाहिए। साथ ही आने वाली पीढि़यों के लिए देश के इतिहास को संरक्षित करना भी पत्रकारों की जिम्मेदारी है।