उत्तराखंड में सर्वाधिक बाघ बढ़े, देश में बाघों की संख्या 2967 दर्ज की गई है
   दिनांक 30-जुलाई-2019
दिनेश मानसेरा

 
देश के जंगलों में बाघों के संरक्षण के सुखद परिणाम सामने आने लगे है।" देश में बाघों की गिनती 2018" को सामने आते ही प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल टाइगर डे,29 जुलाई 2019 के मौके पर देश में बाघों की संख्या 2967 होने की घोषणा की,इस मौके प्रधानमंत्री मोदी ने कहा दुनिया के देशों में सबसे ज्यादा सुरक्षित और संरक्षित बाघ भारत में है।
2018 की बाघों के गणना हमेशा की तरह राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा कैमरा ट्रैपिंग पद्धति से करवाई गई, 2014 में देश के जंगलों में बाघों की संख्या 2226 थी जोकि बढ़ कर अब 2967 हो गई है,उत्तराखंड में बाघ 2014 में 340 थे जोकि बढ़ कर 442 हो गए है ,हालांकि मध्य प्रदेश में अब भी पहले नंबर है जहां बाघों की संख्या 526 दर्ज की गई है और दूसरे स्थान पर कर्नाटक है यहां 524 बाघों की संख्या देखी गई है । महाराष्ट्र में 312 तमिलनाडु में 264 बाघ सीसीटीवी कैमरे में चिन्हित किए गए,
बाघों के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने पिछले कुछ सालों में बेहतर काम किया है 2014 में बाघों के लिए देश मे 692 जंगल संरक्षण श्रेणी में रखे गए उन्हें बढ़ा कर 860 किया गया, सामुदायिक संरक्षित जंगल भी 43 से बढ़ा कर 100 किए गए,जिसकी वजह से बाघों को सुरक्षा और संरक्षण मिला,और बाघों की संख्या चार सालों में 741 बढ़ गई,
उत्तराखंड ऐसा एक मात्र राज्य है जहां सभी 13 जिलों में बाघ मौजूद दिखे। उल्लेखनीय है उत्तराखंड का 65 फीसदी हिस्से में जंगल है और इसकी आबोहवा बाघों के लिए सबसे ज्यादा मददगार रही है।देश के सबसे पहले टाइगर रिज़र्व ,कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व ,बाघों की संख्या की दृष्टि से देश मे पहले नम्बर पर है जहां तकरीबन 250 बाघ हैं।
सवाल सुरक्षा -संरक्षण का:
देश में बाघ बढ़ने की खबर खुशी की है पर साथ ही चुनौतियां भी कम नही है,बाघों की संख्या टाइगर रिज़र्व से बाहर ज्यादा बढ़ रही है और इसके पीछे मूल कारण ये है कि बाघों के भी अपने इलाके होते है,जवान बाघ बूढे बाघ को अपने इलाके से खदेड़ देता है, बूढ़ा बाघ जंगल किनारे गांवों के आसपास पहुंच जाते है और पालतू जानवरों का शिकार करने लगते हैं,यही से शुरू होता है बाघ और मानव संघर्ष,कॉर्बेट और पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में ऐसे ही मामले सामने आए जब ग्रामीणों की भीड़ ने बाघों को मार गिराया।
बाघों की सुरक्षा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण केवल टाइगर रिज़र्व को ही बजट देता है,जबकि बाघ टाइगर रिज़र्व से बाहर बढ़ रहे है उनकी सुरक्षा राम भरोसे है।
इन्हीं इलाकों में बाघों के शिकारी सक्रिय रहते है और जोकि ग्रामीणों की मदद से ,बाघों का शिकार करके नेपाल में चीन में इसके खाल हड्डियां बेच आते हैं। ये देखने मे आया है बाघ यदि किसी पालतू जानवर का शिकार करता है तो वो उसे कई दिनों तक खाता है शिकारी,जानवर मालिक को इस खबर का पैसा देते है,मरे जानवर पर जहर छिड़क देते हैं और बाघ का आसानी से शिकार कर लेते है। जरूरत इस बात की है कि पालतू जानवर के मालिक को सरकार तुरंत मुआवजा दे दे तो उनका भरोसा भी बना रहेगा, सरकार की लालफीता शाही मुआवजा देने में साल भर लगा देती है,जिसकी फायदा शिकारी उठाते रहे है।
बरहाल खबर अच्छी है बाघ बढ़ रहे हैं,देश में बाघ संरक्षित है और इसका फायदा पर्यटन को भी होने जा रहा है दुनिया भर से बाघ प्रेमी भारत में बाघों को देखने आते हैं शोधार्थी उन पर शोध करने आते हैं, कहा जाता है कि जहां बाघ सुरक्षित हैं तो वो जंगल भी महफूज हैं।