बजट 2019-20: राहत वाला बजट
   दिनांक 06-जुलाई-2019
2019-20 का बजट कुल मिलाकर कई ऐसी खबरें लाया है, जिनका सकारात्मक असर फौरन नहीं मिलेगा, पर दीर्घकाल में इसके सकारात्मक परिणाम देखे जायेंगे

 
बजट से एक दिन पहले आनेवाले आर्थिक सर्वेक्षण ने अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डालर यानी करीब पांच लाख करोड़ डॉलर का बनाने का विमर्श शुरु करा दिया। इस बजट को भी उसी लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी इस बजट ने कुछ ऐसे कदम प्रस्तावित किए हैं, जिनका फौरी नतीजा भले ही ना आये, पर उनके परिणाम दीर्घकाल में जरुर आएंगे।
2019-20 का बजट कुल मिलाकर कई ऐसी खबरें लाया है, जिनका सकारात्मक असर फौरन नहीं मिलेगा, पर दीर्घकाल में इसके सकारात्मक परिणाम देखे जायेंगे। ऐसी आशंका थी अर्थव्यवस्था में सुस्ती के चलते राजकोषीय घाटे का जो लक्ष्य रखा गया था,उसको ध्यान ना रखा जाये। पर 2019-20 के बजट में सकल घरेलू उत्पाद के 3.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा गया है। गौरतलब है कि 2018-19 में यह राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.4 प्रतिशत था। बजट दस्तावेजों में यह मंशा जतायी गयी है कि आगामी वित्तीय वर्षों यानी 2020-21 और 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत ही रहेगा। यानी तीन प्रतिशत की सीमा पार ना होगी। यह बहुत अच्छी खबर है। राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के हिस्से के बतौर सीमा में रहे तो उस देश की ग्लोबल रेटिंग सही रहती है। राजकोषीय अनुशासन का पालन ना सिर्फ इस बजट में किया गया है, बल्कि भविष्य में बजटों में भी अनुशासन रहेगा, ऐसी मंशा जता दी गयी है। यह बहुत अच्छी खबर है। राजकोषीय अनुशासन का पालन ना सिर्फ इस बजट में किया गया है, बल्कि भविष्य में बजटों में भी अनुशासन रहेगा, ऐसी मंशा जता दी गयी है। राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के हिस्से के बतौर सीमा में रहे तो उस देश की ग्लोबल रेटिंग सही रहती है। ग्लोबल अर्थव्यवस्था में अपनी चमक बनाये रखने के लिए जरुरी है कि राजकोषीय़ घाटे पर नियंत्रण रखा जाये। सकल घरेलू उत्पाद का राजकोषीय घाटा से रिश्ता बहुत संवेदनशील रिश्ता है। अगर यह लगातार बढ़ता है तो भारत की रेटिंग ग्लोबल बाजार में कम होती है। रेटिंग कम होने से भारतीय कंपनियों को विदेश से संसाधन जुटाने में दिक्कतें आ सकती हैं, उन्हे संसाधन महंगे दर पर मिलने की आशंकाएं बन जाती हैं।
बजट ने साफ किया है कि बिजली चालित वाहन खरीदने वालों को ऑटो लोन पर डेढ़ लाख रुपये तक के ब्याज पर इनकम टैक्स से छूट मिलेगी। बिजली चालित वाहनों पर बजट में कुछ आ सकता है, इस बात के संकेत बजट से एक दिन पहले आये आर्थिक सर्वेक्षण में मिल गये थे। परिवहन के क्षेत्र में चुनौतियों को रेखांकित करते हुए आर्थिक सर्वेक्षण(2018-19) बताता है कि भारत में विद्युत कारों का कुल कार बाजार में हिस्सा सिर्फ दशमलव जीरो छह यानी .06 प्रतिशत है, चीन में यह 2 प्रतिशत है और नार्वे में तो यह 39 प्रतिशत है। इसके अलावा अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत घर खरीदने के लिए लिए गए लोन के ब्याज पर डेढ़ लाख की अतिरिक्त छूट मिलेगी। यानी अब 45 लाख रुपये तक का घर खरीदने पर लोन के ब्याज पर मिलने वाली कुल छूट अब 2 लाख से बढ़कर 3.5 लाख हो गई है।
यानी इस बजट ने सबको छूट नहीं दी है। छूट उनको मिल रही है, जो या तो बिजली चालित वाहन खरीद रहे हैं या घर खरीद रहे हैं। सरकार की बहुत साफ मंशा इन दो सेक्टरो को लाभ पहुंचाने की है। बिजली से चलनेवाले वाहनों में लोगों की रुचि बढ़े ऐसा सरकार चाहती है। कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में, गृह निर्माण गतिविधियों में तेजी आये, ऐसा सरकार चाहती है। गौरतलब है कि गृह निर्माण कंस्ट्रक्शन से जुड़ी गतिविधियों के विकास के साथ तमाम दूसरे उद्योगों में भी तेजी आती है। अर्थव्यवस्था की सुस्ती को दूर करने के लिए ये कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मोदी सरकार ने आयकर ढांचे में लगभग कोई बदलाव नहीं किये हैं, सिवाय उन बदलावों के जिनके तह 2 से 5 करोड़ रुपये सालाना कमाने वालों पर 3 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगेगा और साथ ही 5 करोड़ रुपये से अधिक कमाने पर 7 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना होगा। यानी अर्थव्यवस्था के अधिकांश करदाता नये कर के बोझ से मुक्त हैं। इस बजट ने अलग तरीके से नकदबंदी का प्रयास किया है। गौरतलब कि तमाम काले सौदों, काली अर्थव्यवस्था के सौदों में नकद की प्रमुख भूमिका होती है। बजट ने घोषणा की है कि अगर कोई बैंक से एक साल में एक करोड़ से अधिक की राशि निकालता है तो उसपर 2% का कर लगाया जाएगा। यानी सालाना 1 करोड़ रुपये से अधिक निकालने पर 2 लाख रुपये टैक्स में ही कट जाएंगे।
आम तौर पर आदमी साल में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बैंक से निकालने की जरुरत नहीं पड़ती। तो इस कदम को पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है।
बजट घोषणा के मुताबिक मुद्रा योजना के तहत स्वयं सहायता समूह की हर वेरीफाइड महिला सदस्य को 1 लाख रुपये तक लोन लेने की अनुमति दी जाएगी। इसका मतलब यह हुआ कि आर्थिक तौर पर बहुत ही कमजोर महिलाओं को वित्तीय मदद देने की एक कोशिश इस बजट में हुई है। कुल मिलाकर यह बजट हरेक को राहत नहीं दे रहा, चुनिंदा समूहों को चुनिंदा तरीकों से ऐसे राहत दी जा रही है जिससे समग्र अर्थव्यवस्था में भी तेजी आ जाये।
सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं पर कस्टम ड्यूटी को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया। यह बिलकुल सही कदम है। इससे सरकार के संसाधनों में इजाफा होगा और सोने की खरीद करनेवालों को अर्थव्यवस्था का एकदम विपन्न तबका नही माना जा सकता।
विनिवेश यानी सरकारी कंपनियों में सरकार शेयर बेचकर एक लाख 5000 करोड़ रुपये वसूलेगी, ऐसा बजट अनुमान है। यहां सरकार ज्यादा महत्वाकांक्षी हो सकती है। एक लंबी सूची है सरकार के पास उन सरकारी कंपनियों की, जहां शेयरों की बिक्री अच्छी खासी रकम दे सकती है। संसाधनों की कमी यहां से पूरी की जा सकती थी और करदाताओं की जेब में कुछ रकम छोड़कर तमाम आइटमों की मांग को मजबूती दी जा सकती थी। सरकार को यहां ज्यादा मजबूत इच्छा शक्ति दिखानी चाहिए थी। सफेद हाथी हो चुके सरकारी उपक्रमों में जनता से वसूला गया पैसा लगाना एक तरह से संसाधनों का अपव्यय है। बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि एयर इंडिया के विनिवेश की कोशिश की जायेगी। यह कोशिश अब कामयाब ही होनी चाहिए। एयर इंडिया पर करदाताओं का पैसा लगातार लगाये जाने का कोई मतलब नहीं है। उस पैसे से सिंचाई परियोजनाएं चलायी जा सकती हैं। नये स्कूल खोले जा सकते हैं। अस्पताल खोले जा सकते हैं। कुल मिलाकर बहुत से सार्थक काम किये जा सकते हैं।
इस बजट ने घोषणा की है सरकार सरकारी बैंकों में 70000 करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी। सरकारी बैकों में पूंजी डालना निश्चय ही स्वागत योग्य है पर यह देख लिया जाना चाहिए कि कौन बैंक अब लाइलाज हो गये हैं। बदलती वित्तीय दुनिया में बहुत पुराने रंगढंग के सरकारी बैंक अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। या तो उन्हे आमूल चूल बदला जाये, या उनका विलय किसी दूसरे ठीक ठाक चलते बैंक में किया जाये। तमाम सरकारी बैको को अब मौजूदा स्वरुप में नहीं चलाया जा सकता। यानी कुल मिलाकर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ फैसले लिये जाने की जरुरत है। हालांकि सरकारी बैंकों से जुड़े फैसले तो बजट के बाद भी लिये जा सकते हैं, बजट में ही उनकी घोषणा करना जरुरी नहीं है। कुल मिलाकर यह बजट चुनिंदा ऐसी राहतें देता हैं, जिनसे अर्थव्यवस्था के चुनिंदा क्षेत्रों में तेजी की उम्मीद की जा सकती है, खासकर कंस्ट्रक्शन और बिजली चालित वाहनों के उद्यमों में