इंग्लैंड में जीत गया बलूचिस्तान
   दिनांक 07-जुलाई-2019
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                               अरविंद
 
 खाया-पीया कुछ नहीं, ग्लास तोड़ा पचास पैसा। इंग्लैंड में हुए क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेंट में पाकिस्तान का कुल मिलाकर यही स्कोर रहा। क्रिकेट के मैदान पर पाकिस्तान टीम की कप्तानी के बाद अपनी सियासी पारी में सरकार की कप्तानी कर रहे इमरान खान के लिए झेंप की स्थिति है। एक तो, उनकी टीम सेमीफाइल में जगह नहीं बना सकी और दूसरे, बलूचिस्तान के साथ-साथ खैबर पख्तूनख्वा, अफगानिस्तान से लगते फाटा के इलाकों से लेकर सिंध तक में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन के जाहिर से मामले दुनिया की स्मृति में ताजा हो गए। इसी कारण, इमरान की टीम झुंझलाई हुई है और उनकी सरकार की ओर से इस तरह के प्रचार पर नाराजगी भी जताई गई। लेकिन, इसमें दो राय नहीं कि इस टूर्नामेंट में नहीं खेलकर भी बलूचिस्तान जीत गया।
शनिवार को पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लीड्स में मैच था। टूर्नामेंट में बने रहने के लिए पाकिस्तान को जिस पहाड़ से अंतर से अफगानिस्तान की टीम को हराना था, वह न होना था, न अफगानिस्तान ने होने दिया। मैच के दौरान स्टेडियम के अंदर और बाहर, दोनों जगहों पर इन पड़ोसी देशों के समर्थकों में नारेबाजी के जरिये भी मुकाबला चल ही रहा था कि ऊपर आकाश में काफी नीचे से उड़ान भरता हुए एक छोटा विमान ‘जस्टिस फॉर बलूचिस्तान’ और ‘हेल्प एन्ड एनफोर्स्ड डिसऐप्पियरेंस इन पाकिस्तान’ के बैनर के साथ गुजरा। विमान ने स्टेडियम के कई चक्कर लगाए और लोगों ने विमान के साथ हवा में तैरते ‘जस्टिस फॉर बलूचिस्तान’ के बैनर को देखा। उसके बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान समर्थकों में कहासुनी हुई और फिर झड़प। स्टेडियम के बाहर इस तरह के पोस्टर पर गुस्सा उतार रहे पाकिस्तान पत्रकार के साथ अफगानिस्तान के समर्थकों की भी झड़प हुई। इस मामले में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने खिसियानी बिल्ली कंभा नोचे की तर्ज पर प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ इस तरह से हवाई जहाज से आकाश में बैनर लहराना और दर्शकों के एक समूह द्वारा पाकिस्तान के खिलाड़ियों के साथ अभद्र व्यवहार करना गहरी चिंता की बात है। वैसे, एक पोस्टर में इमरान खान के चित्र के साथ चुनाव से पहले दिए गए उनके उस बयान को भी उद्धृत किया गया था जिसमें उन्होंने कहा था, “मैं इस बात की गारंटी लेता हूं कि अगर कभी सत्ता में आया और अगर किसी एजेंसी ने किसी को अगवा किया तो मैं उसकी जिम्मेदारी तय करते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा वर्ना इस्तीफा दे दूंगा।” जाहिर है, अगर इमरान खान ने अपने इस वादे पर अमल किया होता तो आज उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता। इमरान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी पाकिस्तान में फौज, फ्रंटियर कॉर्प्स और खुफिया एजेंसियों द्वारा लोगों को जबरन उठा लेने का सिलसिला बदस्तूर कायम है।
इससे पहले 26 जून को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच मैच के दौरान बर्मिंघम में भी हर प्रमुख जगहों पर पोस्टर-बैनर के जरिये पाकिस्तान में मानवाधिकार हनन की घटनाओं की ओर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की गई। 23 जून को भी लॉर्ड्स में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच के दौरान स्टेडियम के बाहर पाकिस्तान में लोगों को जबरन लापता कर दिए जाने के खिलाफ पोस्टर-बैनर लगाए गए थे और बलूचिस्तान रिपब्लिक पार्टी और वर्ल्ड बलोच आर्गनाइजेशन के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में इस सिलसिले में पर्चे भी बांटे थे। उस मैच के दौरान तो पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष बाजवा भी स्टेडियम में मौजूद थे।
आपको याद होगा, आज से कुछ साल पहले की बात है। लंदन में ट्राम और टैक्सियों पर “फ्री बलूचिस्तान” के नारे दिखे थे और दुनिया का ध्यान इस ओर गया था। तब बलूचों ने विज्ञापन की यह जगह बाकायदा खरीदी थी। लेकिन तब बौखलाई पाकिस्तान सरकार ने इंग्लैंड पर दबाव बनाकर इस विज्ञापन को रद्द करा दिया था। बरहमदाग बुगती और हरबयार मर्री जैसे तमाम बलोच नेता अरसे से पाकिस्तान से बाहर रहकर बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात उठा रहे हैं। बरहमदाग बुगती जाने-माने बलोच नेता अकबर बुगती के पोते हैं जिन्हें मुशर्रफ के कार्यकाल में फौजी कार्रवाई में शहीद कर दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिध अब्दुल नवाज बुगती भी परिषद की हर बैठक में बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन की बात उठाते रहते हैं।
 इतना तय है कि पाकिस्तान से बाहर रहकर बलूचिस्तान की आवाज बने इन नेताओं ने आज के समय में प्रचार के आधुनिक तौर-तरीके सीख लिए हैं और उन्हें पता है कि कब किस तरह किसी प्रचार अभियान को चलाया जाए जिससे उसका असर सबसे ज्यादा हो। इस बार विश्व कप टूर्नामेंट के दौरान, और वह भी पाकिस्तान के मैचों के दिन वहां हुकूमत की सरपरस्ती में लोगों को अगवा किए जाने का मुद्दा उठाना इसी बात की ओर इशारा करता है। तो माना जाना चाहिए कि विश्व मंच पर पाकिस्तान के लिए झेंप की इस तरह की स्थितियां बनती रहेंगी।