बदहाली की स्थिति में पाकिस्तान 180 रुपए प्रति लीटर बिक रहा दूध
   दिनांक 08-जुलाई-2019
 पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तेज ढलान पर फिसल रही है. जहां एक ओर उसकी अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले कहीं टिकती नहीं, वहीँ भारत के खिलाफ जिहाद पर आमादा पाकिस्तानी फ़ौज पाकिस्तान को दीमक की तरह चाट रही है. पाकिस्तान दोहरी मुसीबत में है.

 
पाकिस्तान की भारत से अदावत जग विख्यात है. भारत से तीन शर्मनाक युद्ध लड़ चुकी और चार दशकों से भारत के खिलाफ छद्म युद्ध लड़ रही पाक फ़ौज अपने भारत विरोधी जिहाद पर कायम है और इमरान खान पसीना पोंछ रहे हैं, क्योंकि फौजियों और उनके इकोसिस्टम के इस जूनून की कीमत उन्हें ही चुकानी है. पर वो कुछ बोल नहीं सकते. जेल में पड़े नवाज़ शरीफ और उनकी बेटी की तस्वीरें उनकी आंखों के सामने घूम जाती होंगी. उन्हें पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के मुखिया आसिफ अली ज़रदारी का परेशान चेहरा भी याद आ जाता होगा, या ज़रदारी के ससुर, जुल्फिकार अली भुट्टो की फांसी पर झूलती लाश कल्पना में साकार हो उठती होगी. ये मिसालें ही अपने आप में कम नहीं हैं, फिर उन्होंने तो फ़ौज का नमक खाया है.
इन दिनों पाकिस्तान में इमरान खान की संपत्ति की चर्चा हो रही है, जिसकी हाल ही में उन्होंने घोषणा की है. लोग हंस रहे हैं, कि इमरान झूठ बोलने में सबको मात कर गए हैं. इमरान खान के अनुसार उनकी संपत्ति कुल दस करोड़ है, उनके पास दो लाख कीमत की चार बकरियां भी हैं. आलोचक कह रहे हैं, कि इमरान ने अपनी संपत्ति के बड़े हिस्से का खुलासा नहीं किया है.
तेज ढलान पर अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान के आर्थिक हालात पर लंबे समय से मीडिया में चर्चा जारी है. ‘नया पाकिस्तान’ का नारा देकर और पाक फ़ौज की कृपा से सत्ता में आए इमरान खान के विवादों का स्कोर बढ़ रहा है , और अर्थव्यवस्था की पारी लड़खड़ा रही है.
पाकिस्तानी रुपया लुढ़कते हुए 163 रुपए प्रति डॉलर पहुंच गया है. अरब 'बिरादरान' की मेहरबानी से मिलने वाला पैट्रोल 98 रुपए प्रति लीटर है, जबकि दूध डेढ़ सौ से 180 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है. प्रशासन ने दूध का दाम 94 रुपए प्रति लीटर तय किया है, लेकिन महंगाई से त्रस्त व्यापारी इसे मान नहीं रहे है. खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं. कई कंपनियां पाकिस्तान से अपना कारोबार समेट रही है. पाकिस्तान के बजट का 42 प्रतिशत क़र्ज़ का ब्याज चुकाने में जा रहा है. पाकिस्तान का छः लाख करोड़ का बजट है, जिसमें बजट घाटा 3.5 लाख करोड़ रुपए का है. जीडीपी 9 सालों के सबसे निचले स्तर पर है.
इमरान खान सत्ता में आने से पहले कहते थे, पाकिस्तान ने कर्ज़ मांग-मांग कर अपनी हालत और इज्जत दोनों खराब कर लिए हैं, और चाहे जो भी हो जाए, ‘मैं कर्ज़ नहीं लूंगा’. अब वही इमरान खान आईएमएफ और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सामने झोली फैलाए खड़े है. आईएमएफ ने बेल आउट पैकेज तो दिया है पर कठोर शर्तों के साथ. जिनके अनुसार खान को टैक्स बढाने पड़े हैं. इस बीच, आतंकी फंडिंग को लेकर भी पाकिस्तान पर शिकंजा कस रहा है. आतंकियों को मिलने वाले धन पर लगाम लगाने वाली पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स पाकिस्तान की सफाई से संतुष्ट नहीं है. सितंबर के बाद उस तरफ से भी इमरान खान की मुश्किल खासी बढ़ सकती हैं.

 
लोग बेरोजगारी से परेशान है. उधर इमरान के मंत्री उटपटांग बयान देकर लोगों के गुस्से को और भड़का रहे हैं. कुछ समय पहले इमरान सरकार के जल संसाधन मंत्री फैसल वावड़ा ने एक न्यूज़ चैनल को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा था कि आने वाले आठ -दस दिनों के अंदर पाकिस्तान में नौकरियों की बाढ़ आने वाली है. इतनी ज्यादा नौकरियां आ जाएंगी कि पान वाले, ठेले वाले, पेपर वाले भी कहेंगे कि "टैक्स ले लो". लेकिन हकीकत में लोग दूध और राशन के लिए तरस रहे हैं. उधर फ़ौज अभी भी भारत के खिलाफ साजिशें बुन रही है, इस बात से बेपरवाह, कि युद्ध केवल जूनून पर नहीं बल्कि संसाधनों के आधार पर लडे जाते हैं. आइये पहले भारत और पाकिस्तान के संसाधनों की तुलना कर लें.

अतुलनीय तुलना 
भारत की अर्थव्यवस्था आकार पाकिस्तान से 9 गुना अधिक है. आज पाकिस्तान के बजट का 42 प्रतिशत कर्ज़ों ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है, वहीं भारत अपने बजट का 18 प्रतिशत ब्याज चुकाने में खर्च करता है. इसलिए मोदी सरकार बजट का 21 प्रतिशत केंद्र की योजनाओं पर खर्च कर रही है. जबकि खान मात्र 10 प्रतिशत केंद्रीय योजनाओं में लगा पा रहे हैं. मोदी सरकार ने अपने बजट का 9 प्रतिशत सब्सिडी में खर्च किया है, जबकि इमरान खान सिर्फ 4 प्रतिशत सब्सिडी में दे पाए हैं. अर्थव्यवस्था के तुलनात्मक आकार का सीधा फर्क दोनों देश की रक्षा तैयारियों पर भी बड़ा असर डालता है. पाकिस्तान अपने बजट का 17 प्रतिशत सेना और हथियारों पर खर्च कर के भी भारत से कहीं पीछे है. भारत अपने बजट का 8 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करके विश्व के सबसे बड़े रक्षा समझौते कर रहा है. 36 रफाल विमान, रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा तंत्र जैसे समझौते करने के बाद अब भारत एक 1.2 लाख करोड़ कीमत के 114 आधुनिक लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है. साथ ही आधुनिक पनडुब्बियों के निर्माण व सैन्य अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर भी भारत लगातार महत्वाकांक्षी कदम बढ़ा रहा है. रक्षा खर्च की सीधी सीधी तुलना करें तो पाकिस्तान का रक्षा बजट 7 .52 बिलियन डॉलर है, जबकि भारत का रक्षा बजट 44. 6 बिलियन डॉलर है. भारत का बजट घाटा जीडीपी का 3.4 प्रतिशत है, इसके मुकाबले पाकिस्तान का बजट घाटा उसकी जीडीपी का 7.2 प्रतिशत है. पाकिस्तान का फॉरेक्स रिजर्व 17.4 बिलियन डॉलर है, इसकी तुलना में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 420 .1 बिलियन डॉलर है.
अब इमरान खान हों, या नवाज़ शरीफ अथवा आसिफ अली ज़रदारी, भारत की तुलना में पाकिस्तान की हैसियत को खूब अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए उनमें से कोई भी भारत से उलझना नहीं चाहता. लेकिन रावलपिंडी में बैठे जनरलों से कौन उलझे.. इमरान भी जानते हैं कि कुर्सी के आराम और सत्ता से बेदखली की बीच सिर्फ एक फौजी बूट की ठोकर जितनी दूरी है. पिंडी के आका अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं.
दीमक की बांबी
इमरान खान रोज कुछ न कुछ बोल रहे हैं. लेकिन असली बात ना वह बोल सकते हैं ना उनके पूर्ववर्ती बोल सके. पाकिस्तान की फटेहाल माली हालत के सबसे ज्यादा जिम्मेदार पाक फौज है. कल्पना करें कि भारत के सेनाध्यक्ष रिटायर हों और मीडिया में खबर छपे कि उन्हें मुंबई में, या कोलकाता में 90 एकड़ जमीन सेवानिवृत्ति के बाद दी गई है, तो सारे देश में भूचाल आ जाएगा. आना भी चाहिए. लेकिन पाकिस्तान में ऐसा नहीं होता. 2016 में जब पाक सेना अध्यक्ष राहिल शरीफ रिटायर हुए तो उन्हें लाहौर में 90 एकड़ जमीन दी गई. भारतीय रुपयों में इस जमीन की कीमत 65 करोड़ रुपए है. परवेज मुशर्रफ को भी इसी प्रकार जमीन दी गई थी. यह कोई अपवाद नहीं है. फौज से रिटायर होने वाले जनरल, ब्रिगेडियर, कर्नल सबको इसी प्रकार जमीने दी जाती हैं. पाकिस्तान फौज और उसके फौजी वहां के सबसे बड़े जमींदार हैं, जो पाकिस्तान की 12 प्रतिशत जमीन के मालिक है.जिसमें पाकिस्तान की सबसे उपजाऊ जमीन आती है. सवाल ये है कि इतनी ज़मीन आती कहाँ से है? तो जवाब है भूमि अधिग्रहण. किसानों की जमीनें उनसे लेकर फौजियों को बांट दी जाती हैं. विरोध करने वाले किसानों को शांत करवा दिया जाता है. मार डाला जाता है. पाकिस्तान में आज भी जमींदारी चलती है. दुनिया के अनोखे अजूबों में से एक पाक फौज व्यापार भी करती है. पाकिस्तान की बड़ी बड़ी 50 कंपनियों की मालिक फौज है. इसमें एयरलाइंस, आधारभूत ढांचा, कल पुर्जे से लेकर डेयरी , बेकरी और आटा उद्योग तक शामिल है. इन कंपनियों को सेना के ब्रिगेडियर और जनरल चलाते हैं. चैरिटेबल ट्रस्ट और फौजी फाउंडेशन के नाम से चलने वाली इन कंपनियों में झांकने की हिम्मत भी पाकिस्तान सरकार नहीं करती. हां, यदि घाटा हो जाए, जो कि होता रहता है, तो उसकी भरपाई जरूर पाकिस्तान की जनता के पैसों से चुपचाप कर दी जाती है. इन फौजी कंपनियों में कभी हड़ताल नहीं होती, क्योंकि यहां के कामगारों को हड़ताल करने की इजाजत नहीं है. उनकी आवाज उठाने के लिए कोई नेता या जनप्रतिनिधि कभी सामने नहीं आता. सबको राजनीति करनी है और सबको अपनी जान प्यारी है.
2007 में पाकिस्तान की लेखिका और सैन्य विज्ञानी डॉक्टर आयशा सिद्दीकी की एक किताब आई थी, नाम था ' इनसाइड पाकिस्तांस मिलिट्री इकॉनामी'. इस किताब में आयशा सिद्दीकी ने पाकिस्तानी फौज के आर्थिक व्यवहार और विशेष अधिकारों का विस्तार से वर्णन किया है. आयशा के अनुसार पाक फौज की कुल संपत्ति (नेट वर्थ), पाकिस्तान में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) से चार गुना अधिक है. पाकिस्तान के सौ शीर्ष सैन्य अधिकारियों की संपत्ति ही 30 हजार करोड़ रूपए (भारतीय रुपयों में) से अधिक है. अब पाकिस्तान की सोने और तांबे की खदानों पर भी पाक फ़ौज की नज़र गड़ी हुई है, और इमरान खान बेबस देख रहे हैं, जो इन्हें लेकर सपने संजोए हुए थे. अब वो कहें तो किससे कहें कि जो पाक फ़ौज खुद को पाकिस्तान की सुरक्षा प्राचीर के रूप में प्रस्तुत करती है, बहुसंख्य पाकिस्तानी (या पंजाबी पाकिस्तानी) भी यही समझते हैं, वो हकीकत में पाकिस्तान को चाटकर खा रही दीमक की बांबी है. बची-खुची कसर पाकिस्तान में आधार से लेकर शीर्ष तक व्याप्त भ्रष्टाचार पूरी कर देता है. भ्रष्टाचार यहाँ एक उद्योग है, और दूसरे उद्योगों की तरह, इस उद्योग में भी फौजियों का बड़ा हिस्सा है.
अल्लाह मालिक है.
क्रिकेट के मैदान में पाकिस्तान फ़ौज के बुरे हाल हैं, तो राजनीति के मैदान में पाकिस्तान के इस पूर्व क्रिकेटर की हालत खराब है. रावलपिंडी में बैठी सिलेक्शन कमिटी ने इमरान को जिस मैच में उतारा है, उसकी पिच पहले से ही खुदी हुई है. इन मुश्किल हालात में कोई बाज़ आने को तैयार नहीं है, और इमरान की युक्तियाँ हाथ फैलाने और चीनियों को मुर्गियां और गधे बेचने से आगे जाती नहीं. इस्लाम के नाम पर बने इस मुल्क का अल्लाह ही मालिक है.