‘‘ऋषियों ने भारतीय जीवन मूल्यों के मापदंड का अनुसंधान किया’’
   दिनांक 09-जुलाई-2019

दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते श्री हृदय नारायण दीक्षित। साथ में अन्य विशिष्टजन
गत 28 जून को उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य में स्वदेशी जागरण मंच, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड क्षेत्र का राष्ट्रीय विचार वर्ग संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य की पवित्र भूमि इस बात की गवाह है कि प्राचीन भारत में हमने चर्चाएं और पंचायतें की हैं। ऋषि-मुनियों के सान्निध्य में भारतीय जीवन, भारतीय संस्कृति के मापदंड, जीवन मूल्य और जीवनचर्या के लिए आवश्यक मूल्यों का अनुसंधान किया तथा उनको जीवन में उतारने के लिए आवश्यक जीवनचर्या का मार्ग तय किया। नैमिषारण्य की पवित्र तपोभूमि पर स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का यह विचार वर्ग निश्चित तौर पर देश में स्वदेशी के विचार को आगे ले जाने का एक मजबूत वैचारिक मार्ग तय करेगा। कार्यक्रम में उपस्थित स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री अरुण ओझा ने कहा कि भारत की आजादी के बाद जो रास्ता हमारी सत्ता ने तय किया, वह हमारी जमीन से जुड़ा हुआ नहीं था, जिसका परिणाम यह हुआ कि हम विकास के ऐसे पथ पर अग्रसर हुए जो हमारे विनाश का मार्ग साबित हुआ। इसके प्रमाण आपको समाज में, प्रकृति में और हमारी तमाम व्यवस्थाओं में विसंगतियों के रूप में देखने को आसानी से मिल जाएंगे। आजादी के बाद सत्ता की दृष्टि का मतिभ्रम ही था कि हम जनस्वास्थ्य के लिए अपने परंपरागत मार्ग को त्याग कर एक ऐसे रास्ते पर चल पड़े, जिसमें आज हमारा देश शुगर, बीपी और डिप्रेशन के गहन माया जाल में उलझ गया है। एक सत्र में अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल ने दैनिक जीवन में किस प्रकार से स्वदेशी को उपयोग में लाया जाए, इस पर प्रकाश डाला। साथ ही जनसंख्या के आधार पर दैनिक रोजमर्रा के सामान का क्रय करने पर प्रति व्यक्ति की स्वदेशी और विदेशी क्रय की तुलना की गई। इस अवसर पर प्रमुख रूप से स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन उपस्थित रहे।