‘‘हिन्दू तीर्थस्थलों का विकास ही जम्मू-कश्मीर को बना सकता है स्वर्ग’’
   दिनांक 09-जुलाई-2019
 
बैठक को संबोधित करते श्री विष्णु सदाशिव कोकजे। मंच पर उपस्थित (दाएं) श्री आलोक कुमार एवं अन्य विशिष्टजन
 बैठक को संबोधित करते श्री विष्णु सदाशिव कोकजे। मंच पर उपस्थित (दाएं) श्री आलोक कुमार एवं अन्य विशिष्टजन
गत 29-30 जून को जम्मू में विश्व हिन्दू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर को लेकर दो विषयों-जम्मू कश्मीर में अलगाववादी व हिन्दू विरोधी नीतियों व प्रावधानों, हिन्दू तीर्थस्थलों व तीर्थयात्राओं के विकास पर प्रस्ताव पारित किए गए। पहले प्रस्ताव में कहा गया कि हिन्दू तीर्थस्थलों व तीर्थयात्राओं का विकास ही जम्मू-कश्मीर की धरती को स्वर्ग बना सकता है। जम्मू-कश्मीर केवल प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण धरती का स्वर्ग नहीं है, अपितु विहिप की प्रबंध समिति का यह स्पष्ट अभिमत है कि यहां के तीर्थस्थल, तीर्थयात्राएं, मंदिर एवं ऐतिहासिक स्थल समग्र रूप से मिलकर ही इस स्वर्ग को अलौकिक रूप प्रदान करते हैं। इन पावन स्थलों के बिना यह धरती न स्वर्ग बन सकती है और न यहां का वैशिष्टय बना रह सकता है। इन तीर्थयात्राओं का विकास करके, तीर्थस्थलों को भव्यता प्रदान करके तथा मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करके, वहां परम्परागत रूप से पूजा-अर्चना सुनिश्चित करके ही जम्मू-कश्मीर की आत्मा को पुष्ट किया जा सकता है। पाक-अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के नजदीक स्थित शारदा पीठ न केवल शक्तिपीठ है, अपितु ज्ञानार्जन का बहुत बड़ा केन्द्र रही है। यहां पर स्थित विश्वविद्यालय में एक समय में पांच हजार छात्र पढ़ा करते थे। यह पीठ जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य के साथ भी जुड़ी है। कल्हन व अभिनव गुप्त जैसे प्रकाण्ड विद्वान भी इस विश्वविद्यालय से जुड़े थे। यह पूरे देश के हिन्दुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। इसलिए प्रबंध समिति की यह सभा भारत सरकार से आग्रह करती है कि वह पाकिस्तान सरकार से पुरजोर आग्रह करके शारदा पीठ को हिन्दुओं के लिए खुलवाए और इसके संचालन का अधिकार आस्थावान हिन्दुओं को सौंपना सुनिश्चित करवाए, जिससे परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना की जा सके। विश्व हिन्दू परिषद केन्द्र सरकार से यह भी अपील करती है कि वह शारदा कॉरीडोर का निर्माण करवाए, जिससे यात्री बिना वीजा व परमिट के यात्रा सम्पन्न कर सकें । इसी तरह कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के सैकड़ों मंदिरों और उनकी जमीन पर अवैध कब्जे किए जा चुके हैं। कई मंदिरों के ऐतिहासिक व पवित्र स्वरूपों को खण्डित किया जा चुका है। राज्यपाल से अपील है कि उन सभी मंदिरों व उनकी जमीन को चिह्नित करके उन पर अवैध कब्जे हटाए जाएं। इन मंदिरों की ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे इन सब मंदिरों में परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना प्रारंभ की जा सके तथा जम्मू-कश्मीर में पीड़ित हिन्दू समाज को न्याय दिलाने व जम्मू-कश्मीर की न्याय व्यवस्था में उनका विश्वास लौटाने में उपरोक्त कदम निर्णायक सिद्ध हो सके। दूसरे प्रस्ताव के तहत जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी व हिन्दू विरोधी नीतियों व प्रावधानों के कारण विस्फोटक स्थिति निर्मित हुई है। विहिप शुरू से धारा 370 को समाप्त करने के पक्ष में रही है। क्योंकि इस प्रावधान का स्वरूप अलगाव के पोषक के रूप में ही रहा है। विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति का अभिमत है कि वर्तमान समय इसको हटाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। अलगाववादी तत्वों को परास्त कर शेष देश के साथ जम्मू-कश्मीर का मजबूती से जुड़ाव करने का यह प्रभावी मार्ग है।
विश्व हिन्दू परिषद प्रबंध समिति इस शोषणकारी व अलगाववादी धारा को तत्काल समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह करती है। साथ ही 80-90 के दशक में आतंकवाद से त्रस्त होकर लाखों कश्मीरी हिन्दुओं को अपनी जन्मभूमि से पलायन करना पड़ा था। वे 30 साल बाद भी अपनी जन्मभूमि के दर्शन करने के लिए तरस रहे हैं। इनकी जन्मभूमि पर इनके पुनर्वास का सपना प्रत्येक सरकार ने दिखाया, परन्तु वह अभी भी अधूरा है। विश्व हिन्दू परिषद केन्द्र सरकार व सभी संबंधित पक्षों से यह अपील करती है कि वे इन सबके सुरक्षित पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करे।