नेशनल शूटर तारा शाहदेव प्रकरण में जज समेत पांच पर आरोप तय
   दिनांक 01-अगस्त-2019
नेशनल शूटर तारा शाहदेव से धोखे से शादी करने के मामले में रकीबुल उर्फ रंजीत कुमार कोहली और उसकी मां कौशल के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दायर कर दी है

 
 शूटर तारा शाहदेव (बाएं) रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन (दाएं)
अगर तू इस्लाम कबूल नहीं करती है तो तेरा बिस्तर तो यही रहेगा लेकिन आदमी बदलता रहेगा।' यह बातें तारा शाहदेव की सास कौशल रानी ने तारा को रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन से शादी के कुछ दिनों बाद कही थी।  23 साल की रांची की नेशनल शूटर तारा शाहदेव की रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल से 7 जुलाई, 2014 को शादी हुई थी। शादी करने के लिए रकीबुल ने तारा से अपना धर्म छुपाया था। तारा को जब पता चला कि उसके पति का नाम रंजीत नहीं बल्कि रकीबुल हसन है, तो वह दंग रह गई। रकीबुल की सचाई सामने आने पर वह तारा पर अत्याचार करने लगा।तारा का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। ऐसा न करने पर वह तारा को कुत्ते से कटवाता था, मारपीट करता तो कभी जलती सिगरेट से उसका शरीर दागता था।
बाहर से सामान्य सा प्रेमविवाह दिखने वाला यह सम्बंध वास्तव में एक जाल था जिसने तारा को फांसा गया । रकीबुल हसन ने तारा शाहदेव को शादी के लिए मनाने के लिए कई हथकंडे अपनाए। उसने अपना नाम बदल लिया और स्वयं को हिंदू बताया था। वह अफसरों के साथ महंगी गाड़ियों में शूटिंग रेंज पर आता था। तारा के सामने रकीबुल शादी से पहले खुद को बेहतर इंसान दिखाने की हर संभव कोशिश करता था। वह शूटिंग रेंज आने वाली लड़कियों की मदद करता था। रकीबुल की दिखावटी दुनिया से तारा इतनी प्रभावित थी की उसे लगा कि वह दुनिया का सबसे अच्छा इंसान है, लेकिन जब उसे सचाई पता चली तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। दरअसल सोची—समझी साजिश के तहत तारा शाहदेव के साथ की गई थी। बाद में उसे पता लगा कि उसका असल नाम रकीबुल हसन है। तारा ने इस संबंध में मामला दर्ज कराया था। सीबीआई ने जांच के बाद नेशनल शूटर तारा शाहदेव से धोखे से शादी करने के मामले में रकीबुल उर्फ रंजीत कुमार कोहली और उसकी मां कौशल के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। तारा शाहदेव ने आरोप लगाया था कि रकीबुल और उसकी मां जबरन इस्लाम कबूल करवाने पर अड़े थे।
इस मामले के छह आरोपियों के खिलाफ सीबीआइ ने कांड संख्या आरसी 11(एस)/15 दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया था। सीबीआई ने जांच पूरी करते हुए सात अक्तूबर 2016 को चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट भादवि की धारा 120(बी) सहपठित 212 के तहत किया गया था। बताते चलें कि तारा शाहदेव प्रकरण के बाद हिन्द पीढ़ी थाना में कांड संख्या 799/14 दर्ज किया गया था। यह प्राथमिकी सात सितम्बर 2014 को दर्ज की गई थी। हाइकोर्ट ने 19 मई 2015 को तारा शाहदेव प्रकरण से जुड़े मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी थी।
इन छह आरोपियों में गढ़वा के तत्कालीन प्रधान न्यायायुक्त पंकज श्रीवास्तव (अब सेवानिवृत्त), गया सिविल कोर्ट के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राजेश प्रसाद, मुख्य आरोपी रकीबुल हसन, उसकी मां कौशल रानी, झारखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन रजिस्ट्रार (विजिलेंस) मुश्ताक अहमद और कोहली के दोस्त रोहित रमन के खिलाफ अदालत ने आरोप तय किए हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ भादवि की धारा 120(बी)(आपराधिक साजिश) एवं 212(अपराधी को भगाना व संरक्षण देना) के तहत आरोप गठित किए गए।
यह पूरा प्रकरण लव जिहाद का एक जबरदस्त उदाहरण था। जिसमें पहले नाम और धर्म बदलकर लड़की को अपने प्रेमजाल में फंसाया गया फिर अपने रसूख़ का इस्तेमाल कर उस पर कन्वर्जन का दबाव बनाया गया। इस पूरे प्रकरण में एक तरफ जहां झूठा प्रेम प्रदर्शन था वहीं दूसरी तरफ़ दिल दहला देने वाली हिंसा। एक तरफ हिंदू होने का झूठा आवरण था वही दूसरी ओर दर्जनों मौलवी भी थे जो तारा को इस्लाम कबूल करवाने के लिए सारी ताकत लगाए हुए थे।
तारा शाहदेव के साथ झूठ बोलकर शादी रचाने और उसे कन्वर्जन के लिए मजबूर करने वाले आरोपी रंजीत के घर से पुलिस ने 36 सिम कार्ड और 15 मोबाइल फोन जब्त किए थे। इसके अलावा दो सीपीयू, चार प्रिंटर, दो एयर गन और न्यायालय से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस को मिले थे। इस मामले में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी फाइल की गई थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि इस मामले में उसकी जांच अब भी जारी है।असल में रकीबुल एक दलाल था जो अपने सम्बन्धों और रसूख के दम पर न्यायपालिका सहित कई अन्य सरकारी संस्थानों में काम करवाता था। इस पूरे प्रकरण में झारखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन रजिस्ट्रार (विजिलेंस) मुश्ताक अहमद का रोल बड़ा अहम था। रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल से तारा की पहचान मुस्ताक ने ही कराई थी। साथ ही, उससे शादी करने के लिए मुश्ताक अहमद ने उस पर दबाव डाला था। शादी के बाद कन्वर्जन कराने में सहयोग भी किया। रकिबुल अपना रसूख़ दिखाने के लिए मुस्ताक अहमद की लालबत्ती लगी गाड़ी व अंगरक्षक लेकर अकसर घूमा करता था।
तारा हिम्मत और बहादुरी की एक मिसाल है वह न केवल इस बेईमानी और शोषण के ख़िलाफ डट कर खड़ी हुईं बल्कि आज भी वह मामले में गवाही के लिए कोर्ट जाती हैं। तारा कहती हैं कि मेरे साथ जो कुछ हुआ था, उसके बाद मेरे पास दो ही रास्ते थे या तो मैं आत्महत्या कर लूं, या फिर न्याय के लिए लड़ाई करूं। मैंने लड़ने का फैसला किया।
तारा ने कानूनी लड़ाई लड़ते हुए 2014 में ही शूटिंग का अभ्यास शुरू किया। कुछ दिन बाद ही स्टेट चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन किया और पूर्वी क्षेत्र प्रतियोगिता में खेलने का अवसर हासिल किया। तारा बताती हैं कि एक खिलाड़ी होने के साथ इस खेल में भविष्य के लिए मैंने 2017 में डी लाइसेंस कोचिंग कोर्स पूरा किया। अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन द्वारा 2007 के बाद भारत में यह परीक्षा हुई, जिसमें 35 प्रतिभागी शामिल हुए थे। 20 इसमें सफल हुए थे। तारा इस परीक्षा में सफल होनेवाली झारखंड की एकमात्र प्रतिभागी हैं।