चिदंबरम की “मासूमियत” का सच
   दिनांक 23-अगस्त-2019
चिदंबरम का कानून के चंगुल में आना आसान नहीं था. और अब जब आ गए हैं तो ठोस आरोपों का पहाड़ उनका इंतजार कर रहा है. आमजन खुश हैं. लोगों के मन में दशकों से घर बना चुकी निराशाजनक धारणा कि “बड़े लोगों का कुछ नहीं बिगड़ता” अब बदल रही है. यह चर्चा भी आवश्यक है कि मीडिया में  कपिल सिब्बल और अभिषेक मनुसिंघवी द्वारा दिए जा रहे बयानों में कितना दम है

आखिरकार चिदंबरम रिमांड में पहुंच गए. अदालत ने चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई को सौंपा है, ताकि पूछताछ की जा सके. 20 बार जमानत ले चुके चिदंबरम जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, और टालने वाले उत्तर दे रहे थे. मामला बड़ी हेराफेरी, अरबों के काले धन , पद के दुरुपयोग और एक के बाद एक किए गए गैरकानूनी कामों का है. न्यायालय की टिप्पणी बता रही है कि चिदंबरम पर गंभीर मामला बन रहा है.कोर्ट ने मामले को "बड़ा" और चिदंबरम को "मुख्य साजिशकर्ता " बताया है. मामले की गंभीरता इससे भी पता चलती है कि देश के सबसे बड़े सर्वोच्च न्यायालय वकीलों में गिने जाने वाले कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा मिलकर भी चिदंबरम को गिरफ्तारी से बचा नहीं पाए.चिदंबरम खुद भी सर्वोच्च न्यायालय के वकील हैं.
कांग्रेस सरकार में देश के गृहमंत्री और वित्तमंत्री रह चुके चिदंबरम सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और पुलिस के काम की बारीकियों और कार्यपद्धति को अच्छी तरह समझते हैं. चिदंबरम का कानून के चंगुल में आना आसान नहीं था.
फिलहाल चिदंबरम के खिलाफ धारा 420, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8, 13 और 120 बी के अंतर्गत जांच हो रही है. सीबीआई का दावा है कि कांग्रेस की यूपीए सरकार में मंत्री रहते हुए चिदंबरम ने अपने पद का दुरुपयोग किया और एक कंपनी आई एन एक्स मीडिया को लाभ पहुंचाने के एवज में अवैध धन प्राप्त किया. आईएनएक्स मीडिया एक टीवी चैनल प्रारंभ करने जा रही थी जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( एफडीआई ) की मंजूरी चाहिए थी. इस मंजूरी के बदले चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम द्वारा नियंत्रित काग़जी कंपनियों में काला धन जमा करवाया गया, और फिर इधर-उधर निवेश के माध्यम यह धन कार्ति चिदंबरम को प्राप्त हुआ. संक्षेप में मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से रिश्वत के पैसे को काले से सफ़ेद किया गया. आज देश-विदेश में चिदंबरम और उनके बेटे की अरबों की संपत्ति है.
क्या होती है मनी लॉन्ड्रिंग
मनी लॉन्ड्रिंग काले धन को सफ़ेद करने का तरीका है. इसके लिए पहले काले धन को अपेक्षाकृत छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों के बैंक खातों में जमा करवाया जाता है. फिर इस धन से संपत्तियां खरीदी जाती हैं, जिनकी कीमत वास्तविक से काफी कम दिखाई जाती है. इस धन को खपाने का दूसरा तरीका होता है कागजी कंपनियां (शैल कंपनीज़) बनाकर, जिनका जमीन पर कोई अस्तित्व नहीं होता, उनमें यह पैसा लगाना. तीसरा तरीका होता है ‘प्लेसमेंट’ याने काले धन की गड्डियों को बक्सों में बंद करके तस्करों के माध्यम से देश से बाहर भेजना और उन विदेशी बैंकों में जमा करवा देना जो खातेदारों से पैसे के स्रोत के बारे में जानकारी नहीं माँगते. ऐसे देशों को ‘टैक्स हैवन्स’ कहा जाता है. जैसे स्विस बैंक. सिंगापुर, दुबई, पनामा आदि भी ऐसे ही ‘टैक्स हैवन्स’ हैं. बाहर भेजी गई इस राशि से विदेशों में संपत्तियां भी खरीद ली जाती हैं . विदेशों में इस काले पैसे को अलग-अलग कंपनियों में लगाकर खाते-बही की बाजीगरी से सफ़ेद कर लिया जाता है. अलग –अलग देशों में अलग-अलग कंपनियों के खातों में डालकर धन के असली स्रोत को छिपाने का ये तरीका ‘लेयरिंग’ कहलाता है.
इसके बाद ये पैसा भारत वापिस लाया जाता है. यह पैसा विदेशी निवेश के रूप में , या व्यापारिक लेनदेन के रूप में फिर घोटालेबाज के पास लौट आता है. इसे इंटीग्रेशन कहते हैं. इस पैसे को फिल्म जगत, रियल एस्टेट, शेयर मार्किट या अन्य भी कई जगहों पर लगा दिया जाता है. इस तरह मनी लॉन्ड्रिंग करना कोई एक क़ानून तोड़ना नहीं है, बल्कि कानून उल्लंघनों की एक श्रंखला है. ये सारे आरोप चिदंबरम पिता-पुत्र पर हैं.
मनी लॉन्डरिंग के इन तरीकों से मादक पदार्थ, मानव तस्करी, हथियारों की तस्करी, आतंकवाद जैसे जघन्य अपराधों के लिए भी काला धन इधर-उधर किया जाता है. विचारणीय है कि यदि देश के पूर्व गृहमंत्री पर ही अपने दायित्व के समय ऐसे लोगों के साथ लिप्तता का आरोप लग रहा है, जिस पर उच्च न्यायालय भी कठोर टिप्पणी कर रहा है तो मामला कितना संगीन है.
सीबीआई द्वारा लंबे समय से मामले की जांच की जा रही है. दर्ज बयानों से पता चलता है कि कार्ति चिदंबरम द्वारा नियंत्रित कंपनियां फर्जीवाड़े में लिप्त थीं. इन कंपनियों द्वारा किए गए कई लेनदेन फर्जी थे. कंपनी की कमाई के स्रोत नकली थे, कंपनी का राजस्व काल्पनिक लेनदेन और नकली चालानों द्वारा प्राप्त किया गया था, जो कि वास्तव में आईएनएक्स मीडिया से रिश्वत द्वारा प्राप्त काला धन था.

वे सवाल जो सीबीआई ने पूछे
कांग्रेस के वकील नेतागण मीडिया के सामने आकर बयान दे रहे हैं कि चिदंबरम के खिलाफ कोई मामला या सबूत नहीं है, और उन्हें फंसाया जा रहा है. लेकिन सीबीआई ने अदालत से चिदंबरम की हिरासत मांगने के पहले जो 20 सवाल पूछे, उनसे पता चलता है कि सीबीआई के हाथ पुख्ता सबूतों तक पहुंच चुके हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार इन सवालों के चिदंबरम ने गोलमोल और टालने वाले जवाब दिए. इसी के आधार पर सीबीआई ने अदालत से चिदंबरम को रिमांड पर देने का आग्रह किया, ताकि ठीक से पूछताछ की जा सके, और अदालत ने इसे मान लिया. ये सवाल आईएनएक्स मीडिया मामले को तो कुरेदते ही हैं, चिदंबरम पिता पुत्र को दूसरे मामलों के खुलासे की कगार पर लाकर खड़ा भी कर देते हैं. सवाल इस प्रकार हैं -
1.आपकी विदेशों में संपत्तियों के आय का स्रोत क्या है?
2.यूके, स्पेन और मलेशिया में संपत्तियों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आया?
3.बार्सिलोना टेनिस क्लब को खरीदने का पैसा कहां से आया?
4.कार्ति को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड कंपनी से धन क्यों मिला?
5.आईएनएक्स सौदे से रिश्वत में मिले धन को आपने या कार्ति ने कहां निवेश किया?
6.हमारे पास आपके विदेश स्थित शेल कंपनियों के सबूत हैं. आपकी क्या सफाई है?
7.आपसे और कार्ति से जुड़ी कितनी शेल कंपनियां हैं?
8.ये शेल कंपनियां किस सेक्टर की हैं और इनका क्या कारोबार है?
9.फाइनेंसियल इंटेलीजेंट यूनिट ने मॉरिशस की तीन कंपनियों से आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में 305 करोड़ रुपये से अधिक के एफडीआई निवेश पर सवाल उठाए हैं, जिसका स्वामित्व उस समय पीटर मुखर्जी और उसकी पूर्व पत्नी इंद्राणी मुखर्जी के पास था. आपका इस पर क्या कहना है?
10.क्या आपके बेटे ने एफआईपीबी (फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड) के विभागों पर प्रभाव डाला?
11.आपने वित्त मंत्री होने के नाते आईएनएक्स मीडिया सौदे में अपने बेटे को विदेशी निवेश के नियमों की धज्जियां उड़ाने की अनुमति कैसे दी.
12.आप इंद्राणी मुखर्जी से नार्थ ब्लॉक में क्यों मिले थे?
13.क्या आपने इंद्राणी को कार्ति के संपर्क में रहने को कहा था?
14.क्या आप पीटर मुखर्जी से भी मिले थे?
15.आपकी तरफ से आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी देने में नॉर्थ ब्लॉक के और कौन से अधिकारी शामिल थे?
16.आप नोटिस मिलने के बाद भी क्यों पेश नहीं हुए?
17.दिल्ली उच्चन्यायालय द्वारा आपकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने के बाद से कल शाम तक आप कहां थे और इस दौरान आप किन-किन लोगों से मिले?
18.इस दौरान आपका मोबाइल फोन बंद था, तो आप कौन सा नंबर इस्तेमाल कर रहे थे?
19.अगर आपका इरादा गिरफ्तारी से बचने का नहीं था, तो कल (मंगलवार) सुप्रीम कोर्ट से लौटते वक्त आप अपने ड्राइवर और क्लर्क को छोड़कर क्यों निकले?
20.आप सीबीआई के नोटिस के बावजूद पेश क्यों नहीं हुए?
जब अदालत के सामने दांव-पेंच काम नहीं आए तो जनता को भ्रमित करने के पैंतरे शुरू हुए चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल अदालत के सामने दलील देते रहे कि चिदंबरम हमेशा पूछताछ के लिए उपस्थित रहे, इसलिए उन्हें रिमांड में न भेजा जाए, लेकिन अदालत ने माना कि पूछताछ के लिए ‘उपस्थित रहने वाले’ चिदंबरम वास्तव में सवालों के सीधे जवाब नहीं दे रहे थे. अदालत की इस बात से अच्छी तरह वाकिफ कांग्रेस की वकील फौज के मीडिया बयानों से ऐसा आभास हो रहा था, मानो चिदंबरम बिल्कुल निर्दोष हैं और अदालत चिदंबरम के साथ अन्याय करने पर आमादा है.
अजीबोगरीब बयान दिए गए. इन्द्राणी मुखर्जी आईएनएक्स मीडिया मामले में सरकारी गवाह बन गई है. इन्द्राणी मुखर्जी अपनी बेटी की ह्त्या करवाने के आरोप में सजा काट रही है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी , जो खुद सर्वोच्च न्यायालय के बड़े वकील हैं, ने बयान दिया कि चूँकि इन्द्राणी मुखर्जी खुद सजायाफ्ता है, इसलिए उसके बयान के आधार पर चिदंबरम पर मामला कैसे बनाया जा सकता है . अभिषेक मनु सिंघवी ने ये हास्यास्पद बयान देकर भारत और सारी दुनिया के न्यायालयों और जांच एजेंसियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जो किसी अपराधी को दूसरे अपराधियों के खिलाफ गवाह के रूप मान्यता देती हैं. क्या एक चोर दूसरे चोर के राज़ बताएगा तो अदालत उसे खारिज कर देगी ? क्या आतंकी कसाब से पाकिस्तान के खिलाफ मिले सबूतों को भारत की जांच एजेंसियों को यह कहकर अमान्य कर देना चाहिए था कि कसाब खुद एक आतंकवादी है इसलिए उसके पाकिस्तान के खिलाफ दिए गए बयान का कोई महत्व नहीं है?
चिदंबरम को रिमांड में लेने के बारे में कांग्रेस के नेता बाहर मीडिया में कहते रहे कि चिदंबरम के खिलाफ ‘चार्जशीट’ तक नहीं है. ये भी आमजन को गुमराह करने का प्रयास है. वास्तव में आरोपपत्र (चार्जशीट) तैयार करने के लिए ही जांच एजेंसियां अदालत से आरोपी को रिमांड में देने की माँग करती हैं. सीबीआई ने अदालत से कहा कि वो चार्जशीट तैयार करने के करीब है, इसलिए उसे आरोपी से गहराई से पूछताछ करनी है, गवाहों से आरोपी का आमना-सामना करवाना है. अदालत ने सीबीआई की बात मान ली.

चिदंबरम को गांधी परिवार का साथ
 
गिरफ्तारी से पहले चिदंबरम की जो प्रेस कांफ्रेंस हुई उसमें सोनिया गांधी के सबसे विश्वस्त सहयोगी अहमद पटेल भी मंच पर उपस्थित थे. कांग्रेसजनों के लिए अहमद पटेल गांधी परिवार के संपर्क सूत्र हैं. पटेल पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव हैं. यूपीए सरकार के 10 सालों के दौरान अहमद पटेल गठबंधन सहयोगियों और कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच सेतु का काम करते रहे. सोनिया गांधी से अपने इस निकटता के कारण वो पर्दे के पीछे से संगठन के सूत्रों का संचालन करते हैं. वो खुलकर बोलते हैं कि वो सिर्फ सोनिया गांधी द्वारा दिए गए एजेंडे पर काम करते हैं.
इसलिए चिदंबरम की बदहवास प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहमद पटेल की मौजूदगी कांग्रेस के लोगों को दिया गया संदेश है कि गांधी परिवार चिदंबरम के साथ है. यानी किसी भी प्रकार की अप्रिय बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसीलिए चिदंबरम के मामले में कांग्रेस के दो-तीन वकील नेता ही मुंह खोल रहे हैं. शेष पार्टी में सन्नाटा है. कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने भाषण में यह कहते हुए अप्रत्यक्ष रूप से चिदंबरम को अपना साथ दिखाया है कि “राजीव जी के पास भी बहुत बड़ा जनमत था लेकिन उन्होंने इसका उपयोग विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए नहीं किया.” राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने भी ट्वीट करके चिदंबरम का बचाव किया. प्रियंका ने सरकार को कोसते हुए लिखा कि “हम चिदंबरम के साथ खड़े हैं.” राहुल गांधी ने चिदंबरम की रिमांड को “शक्ति का दुरुपयोग” कहा.

इकोसिस्टम सक्रिय
चिदंबरम के गिरफ्तार होते ही दशकों से सक्रिय रहा कांग्रेस का इकोसिस्टम सक्रिय हो गया. एक समाजवादी झुकाव वाले पत्रकार, जिन्हें मई 2014 के बाद से देश में अन्धकार ही अन्धकार नज़र आ रहा है, एक पत्रकार ऐसे ही हैं उन्होंने ट्वीट किया है वो काबिले गौर है. -
‘क्या गज़ब का देश है, बिन अदालत औ मुवक्किल के मुकदमा पेश है ,
आदमी भूगोल है जी चाहा नक्शा पेश है.....’
इस मामले में वरिष्ठ पत्रकारों के भी नाम आने की खबर आ रही है. लुटियन दिल्ली की कुछ बैठकों में भूचाल आ चुका है. दांतों से नाखून कतरते हुए कई ‘नोबल्स’ की निगाहें निश्चित ही टीवी पर चल रही खबरों पर अटकी रहेंगी.
आमजन खुश हैं. लोगों के मन में दशकों से घर बना चुकी निराशाजनक धारणा कि “बड़े लोगों का कुछ नहीं बिगड़ता” अब बदल रही है. लेकिन चिदंबरम की गिरफ्तारी से किस-किसको परेशानी हो रही है, और भविष्य में होने वाली है, ये देखना दिलचस्प रहेगा.