सितारे जमीन पर
   दिनांक 26-अगस्त-2019
 
आकाश के तारे और धरती पर चकाचौंध पैदा करने वाले फिल्म, राजनीति, उद्योग जगत के सितारे.. अंतर क्या है?
नक्षत्रों की रोशनी अंधेरी रातों में दिशासूचक का काम करती है। धरती के सितारे अपनी चमक से भीड़, पैसा, कोलाहल पैदा करते हुए और दमकते जाते हैं।
इस फर्क के बावजूद एक बड़ी समानता भी है। आसमान का तारा या समाज का सितारा.. चमक सबकी सदा एक-सी नहीं रहती। सबको एक दिन बुझ जाना है।
खगोलशास्त्र के अनुसार बड़े सितारों का बुझना भी एक परिघटना है। हर सितारा अपनी जिस कक्षा पर स्थिर होता है उसे वह धुरी भीतर खींचते गुरुत्वाकर्षण और बाहर ठेलते दबाव की अनवरत रस्साकशी से ही मिलती है। चमक वहीं ठंडी न हो तो पलड़ा किसी एक ओर झुक जाता है।
-कुछ ‘श्वेत वामन’ होते हैं जो उसी जगह यात्रा का शांति से अंत करते हैं।
-कुछ का अस्तित्व इस अंत को नहीं स्वीकारता और वे सुपरनोवा के रूप में अंतिम तौर पर गुस्से से भभककर शांत होते हैं।
-तीसरी श्रेणी में वे सितारे आते हैं, जो बहुत बड़े होते हैं। वे न शांत होते हैं और न आखिरी तौर पर चमकते हैं। ऐसे सितारे दूसरे करीबी और छोटे सितारों को निगलने वाले अंधे-कुएं या ‘ब्लैक होल’ बन जाते हैं।
आसमान या जमीन.. यह अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है। भारतीय उद्योग और राजनीति के कुछ सितारे आज अपनी चमक खोते दिख रहे हैं!
किंगफिशर के होते सातवें आसमान पर सवार विजय माल्या, हीरे सी चमक रखने वाले नीरव और मेहुल, धरती से जुड़े और धूल में मिले आम्रपाली, यूनीटेक जैसे दिग्गज.. रोशनी बुझ तो गई है! इस अंधेरे की ओर बढ़ते कुछ और नाम देश के पूर्व वित्त और गृहमंत्री पी. चिदंबरम, एनडीटीवी के प्रवर्तक प्रणय तथा राधिका रॉय हो सकते हैं!
चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति 20 बार जमानत पा चुके हैं। सीबीआई तथा प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे इसलिए हिरासत जरूरी है। आरोप है कि चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते आईएनएक्स मीडिया समूह को भारी भरकम विदेशी धनराशि हासिल करने के लिए दी गई अनुमति में अनियमितताएं थीं। और तो और जिन कंपनियों के रास्ते पैसे की बंदरबांट हुई उन पर चिदंबरम के बेटे का साफ या पर्दे के पीछे से नियंत्रण है!
प्रणय रॉय और राधिका रॉय के नियंत्रण वाली कंपनियों में घपलेबाजी और धनशोधन के आरोपों की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सीबीआई का आरोप है कि एनडीटीवी द्वारा लंदन में शुरू की गई कंपनी ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों के उलट विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से निवेश मंजूरी हासिल की और उलझाऊ तरीकों से यह पैसा अपनी सहयोगी कंपनियों में लगाया।
कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए चिदंबरम ने कहा कि वे या उनके परिवार का कोई सदस्य आईएनएक्स मीडिया मामले में आरोपी नहीं हैं। झल्लाए एनडीटीवी ने अपने प्रवर्तकों पर कार्रवाई को ही मीडिया उत्पीड़न ठहरा दिया!
जांच और लुकाछिपी के इस खेल का अंत तय है। किन्तु इस दौरान राजनीति अपनी धुरी पर घूमते हुए आरोप-प्रत्यारोप की धार कुछ और चमकाएगी। मीडिया को भी दाग हटने तक आरोपियों का पक्षकार बनने से बचना होगा। खबर, अखबार और लाला जी की बही का अंतर बताना ही होगा। वरना वह अपनी साख खो बैठेगा। अंतत: सत्य को स्थापित करते हुए सही-गलत का अंतर न्यायपालिका द्वारा बताया जाएगा।
बहरहाल, एक ओर जांच का गुरुत्वाकर्षण है, दूसरी ओर चमक बनाए रखने का भारी दबाव... कुछ तारे थके हैं, कुछ आक्रोश से भभक रहे हैं। कुछ इससे भी बड़े, जिनका आकार गुरुत्व बहुत बड़ा रहा है.. इससे भी आगे बढ़कर गरज रहे हैं।
हम फिल्मों के शौकीन भारतीयों ने कुछ बरस पहले एक फिल्म देखी थी- तारे जमीन पर।
भ्रष्टाचार में लिप्त रसूखदारों से लड़ते हुए भारत कई रोशनियों का बुझना देख रहा है। जांच और न्यायतंत्र के सहारे इनकी नियति बताती संघर्षपूर्ण और रोमांचक पटकथा लिख रहा है- सारे जमीन पर!