लघु उद्योग भारती का रजत जयंती समारोह संपन्न
   दिनांक 27-अगस्त-2019
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत। मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्टजन
‘‘देश की आर्थिक स्वतंत्रता तथा समाज के स्वावलंबन की प्राप्ति के लिए बड़ी संख्या में लघु उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता है।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कही। वे 16 अगस्त को नागपुर में लघु उद्योग भारती के रजत जयंती समारोह के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1994 में लघु उद्योग भारती की स्थापना हुई थी। इसमें मोरोपंत पिंगले जी का बड़ा योगदान रहा। अपने यहां देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए संविधान है। राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए संविधान में प्रावधान है। सामाजिक स्वतंत्रता के लिए कुछ निर्देश दिए गए हैं, वह काम समाज यानी हमारा काम है। ईस्ट इण्डिया कंपनी जैसी बड़ी कंपनियां 200 वर्ष पहले नहीं थीं, पर व्यापार तो होता था। उद्यमिता तो थी। उन्होंने कहा कि मनुष्य की आर्थिक स्वतंत्रता का विषय महत्वपूर्ण है। इसका ध्यान पहले से रखा गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र की सत्ता का महत्त्व है। आज अर्थ एक सत्ता है, राज्य एक सत्ता है, सामरिक शक्ति यह सत्ता है, इनका स्वरूप एक-दूसरे से संपर्क में रहे और मानवहित के लिए सदा एक दिशा में चलता रहे। इस मर्यादा तक विकेन्द्रित होने से स्वतंत्रता का लाभ सबको मिलता है और ऐसी स्वतंत्रता आर्थिक क्षेत्र में लानी है तो हमें लघु उद्योग, सूक्ष्म उद्योग, मध्यम उद्योग और कारीगिरी पर जोर देना पड़ेगा।
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार देश के सकल घरेलू उत्पाद में 50 प्रतिशत योगदान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के क्षेत्र से होना सुनिश्चित करेगी। इसमें पैसे की कमी नहीं होने देगी। केंद्रीय भारी उद्योग राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि सरकार एमएसएमई क्षेत्र की सभी समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास करेगी। तीन दिवसीय (16 से 18 अगस्त तक) समारोह के एक सत्र में इस क्षेत्र में कार्य करने वाले 40 अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था, जिन्हें रा.स्व.संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने संबोधित किया।
समारोह में कलेश्वर (गुजरात) के श्री बल्देवभाई प्रजापति अध्यक्ष एवं सतारा (महाराष्ट) के श्री गोविंद लेले महासचिव निर्वाचित हुए।  प्रतिनिधि
‘‘राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में समस्या हुई गंभीर’’
 
पिछले दिनों रायपुर स्थित महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज के सभागार में राष्ट्रीय सुरक्षा मंच द्वारा भारतीय संसद का नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक श्री दीपक विस्पुते। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संसद द्वारा अनुच्छेद-370 और 35 ए हटाने का निर्णय अभूतपूर्व है। यह निर्णय 72 वर्ष से चली आ रही भ्रम की स्थिति को हमेशा के लिए समाप्त करने वाला है। स्वतंत्रता के बाद से 72 वर्ष तक अनुच्छेद-370 और 35ए पर पाकिस्तान कभी भी भ्रमित नहीं रहा, उसके इरादे पक्के रहे। किन्तु भारत हमेशा भ्रमित रहा और भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह समस्या और गंभीर बनती चली गई।
जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख प्रारम्भ से ही स्पष्ट था, हम उसे ठीक से समझ नहीं पाए। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय ही कश्मीर रियासत के महाराजा हरिसिंह ने अपनी रियासत को भारत में मिलाने के विलय पत्र पर बिना शर्त हस्ताक्षर किए थे। तब तक स्पष्ट था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन बाद में अनुच्छेद-370 और 35ए को पिछले दरवाजे से जोड़ा गया, जिसके लिये संसद के दोनों सदनों का समर्थन भी नहीं लिया गया और यह समस्या आगे बढ़ती चली गई। आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और संसद ने इस अस्थायी अनुच्छेद को समाप्त करते हुए एक बड़ा साहसिक निर्णय लिया है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से पूर्व कर्नल जे. एस. कक्कड़, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एडवोकेट श्री आशीष सोनी और प्रसिद्ध व्यवसायी श्री अमर पारवानी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा मंच के संयोजक डॉ. राजेन्द्र दुबे ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी महानुभावों का आभार व्यक्त किया, तो प्रभात मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रतिनिधि