''सशक्त राष्ट्र के लिये सीमा के प्रति अखिल भारतीय समाज का जागरण अनिवार्य''
    दिनांक 29-अगस्त-2019
सीमा जागरण मंच की पत्रिका ‘सीमा संघोष’ के विशेषांक विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ.कृष्णगोपाल ने कहा “राष्ट्र की सीमाएं माता के वस्त्रों के समान पवित्र होती हैं, इनकी रक्षा करना पुत्र का प्रथम कर्तव्य है”

सीमा संघोष पत्रिका के विशेषांक का विमोचन करते रवि के मिश्र, नितिन कोहली, तरुण विजय, डॉ. कृष्णगोपाल,डॉ.जितेंद्र सिंह,विनोट भाटिया और मुरलीधर मिंडा
तीन मूर्ति भवन में आयोजित सीमा जागरण मंच की पत्रिकार ‘सीमा संघोष’ के विशेषांक विमोचन कार्यक्रम में सीमाओं के प्रति सामाजिक चेतना व सीमांत क्षेत्रों में राष्ट्रहित में आवश्यक सामाजिक व प्रशासनिक गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल के साथ-साथ केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, सीमा जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संयोजक मुरलीधर भिण्डा व पूर्व राज्यसभा सांसद तरूण विजय भी उपस्थित रहे। सेना, मीडिया, विधि, चिकित्सा, राजनीतिक व शैक्षणिक क्षेत्रों से जुड़े गणमान्यजनों की उपस्थिति में डॉ. कृष्ण गोपाल ने राष्ट्र की अभेद्य सुरक्षा के लिये सीमांत क्षेत्रों के साथ ही अखिल भारतीय समाज में सीमाओं के प्रति जागरण को आवश्यक बताया।
उन्होंने कहा कि सशक्त सीमा की पहचान में जितनी हमारी सशक्त सेना की भूमिका है उतनी ही भूमिका सीमाओं पर रह रहे नागरिकों की सुदृढ़ता व स्वावलंबन की भी है। महाभारत का वर्णन करते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल ने भीष्म पितामह के कहे शब्दों को दोहराया, “राष्ट्र की सीमाएं माता के वस्त्रों के समान पवित्र होती हैं, इनकी रक्षा करना पुत्र का प्रथम कर्तव्य है”। भारत के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के सशक्तिकरण के लिये शहरों में निवास कर रहे नागरिकों में सीमांत क्षेत्रों के समाज के प्रति आत्मीयता के साथ-साथ परस्पर सहयोग जरूरी है। इन क्षेत्रों में देशविरोधी गतिविधियों व पलायन को रोकना आज भारत के लिये बड़ी चुनौती है और इसका समाधान सामाजिक प्रतिभागिता के बिना असंभव है।
उन्होंने भारत की सीमाओं की ऐतिहासिक महत्ता वर्णन करते हुए कहा कि हमारी राष्ट्रीय सीमाओं का बोध व इसके प्रति आत्मीयता ही थी कि जब ईसा से 300 वर्ष पूर्व सेल्यूकस भारत पर आक्रमण करने आया तब पटना से 2000 किलोमीटर दूर चंद्रगुप्त मौर्य उसे रोकने के लिये देशभर के अन्य राजाओं को साथ लेकर सुदूर पश्चिम में झेलम के पार जाकर विदेशी आक्रांताओं को पराजित करता है। सीमा की मिट्टी, कंकड़, पत्थर व जल हमारे लिये पवित्र हैं और यह भाव केवल भारत में ही विकसित हुआ। देश की सीमाओं पर हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित – कन्याकुमारी, रामेश्वरम श्री जगन्नाथ मंदिर, गंगासागर, परशुराम कुण्ड, पशुपतिनाथ मंदिर, शारदा मंदिर, हिंगलाज देवी मंदिर व द्वारिका मंदिर आदि हमारी सीमाओं को पवित्रता के बोध से परिभाषित करती हैं। कार्यक्रम में यह आह्वान भी किया गया कि सीमा पर पर्यटन व रोजगार को बढ़ावा देने के लिये व पलायन रोकने के लिये आवश्यक है कि हम घूमने के लिये विदेश न जाकर अपने सुंदर व मनोरम सीमांत क्षेत्रों में परिवार सहित जायें व मनोरंजन के साथ साथ राष्ट्र की सीमाओं का ज्ञान भी अर्जित करें।
सीमा जागरण मंच द्वारा सीमा सुरक्षा में अद्भुत जन सहभागिता
सुरक्षित सीमा - समर्थ भारत का नारा लिये सीमा जागरण मंच (स्थापित -1985), भारत में एक मात्र गैर-सरकारी संगठन है जो पूरे देश की सीमाओं के बारे में समग्रता से विचार करता है और प्रत्यक्ष रूप से सीमा पर सीमांत क्षेत्रों के समाज व सीमा की सुरक्षा में तैनात सेना व अर्ध-सैनिक बलों की हर संभव सहायता करता है। सीमा पर रह रहे समाज में राष्ट्रभक्त भाव का जागरण व उनका संगठन करके सेना व समाज में परस्पर सहयोग व आत्मविश्वास की वृद्धि कराने वाली गतिविधियों में मंच अग्रसर रहता है। इसके अतिरिक्त सीमांत क्षेत्रों की मूल-भूत सुविधाओं व रोजगार संबंधित मांगों को राज्य एवं केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखने का कार्य भी करता है। देशभर की सभी सीमाओं पर सीमा जागरण मंच होली, रक्षाबंधन व दीपावली समेत कई त्योहारों पर समाज को साथ लेकर सैनिकों के साथ उत्सवों का आयोजन करने में वर्षों से अग्रसर है। सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों की सर्वाधिक अनुभूति उस क्षेत्र में निवास कर रहे परिवारों को होती है इसलिए इन परिवारों की राष्ट्रीय चेतना का सशक्तिकरण अतिआवश्यक है। इन परिवारों के युवाओं की सेना में भागीदारी बढ़े इस उद्देश्य से सीमांत क्षेत्रों के साथ-साथ देश के कई अन्य इलाकों में ‘सेना भर्ती प्रशिक्षण शिविर’ लगाये जाते हैं। ऐसे जवान जब सेवानिवृत होकर वापस अपने गांव आते हैं तब सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रभक्ति व अनुशासन का वातावरण स्वतः ही निर्मित होने लगता है। देशभर में मंच द्वारा समाज में विशेषत: युवाओं में सीमा, सेना व अर्धसैनिक बलों की जानकारी व भूमिका के बारे में प्रचार-प्रसार भी किया जाता है।