10 सरकारी बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनेंगे, नहीं होगी छंटनी
   दिनांक 30-अगस्त-2019
 
सरकार ने शुक्रवार को बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ा ऐलान किया है। इसके तहत 10 सरकारी बैंकों का विलय कर दिया गया है। इस विलय के बाद बाद 4 बड़े सरकारी बैंक बनेंगे, जिनका कुल कारोबार 55.81 लाख रुपए करोड़ का होगा। पंजाब नेशनल बैंक दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की। वर्ष 2017 में देश में 27 सरकारी बैंक थे, अब इनकी संख्या 12 रह जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा- पिछले साल तीन बैंकों के विलय से फायदा हुआ, रिटेल लोन ग्रोथ में 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
विलय का फैसला क्यों ?
सरकार का कहना है कि बैंकों को अंतरराष्ट्रीय आकार का बनाने के लिए यह फैसला लिया गया। यह सही वक्त है कि बैंकों को इस लायक बनाया जाए कि वे 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के लक्ष्य में भागीदार बन सकें। वित्त सचिव राजीव कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक के कर्मचारियों को किसी भी चरण में कोई नुकसान नहीं होगा। बल्कि विलय होने से उनके लिए सुविधाएं बेहतर होंगी।
उल्लेखनीय है कि इस साल जनवरी में कैबिनेट ने देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा का विलय किया जाना मंजूर किया था। इससे पहले 2017 में सरकार ने एसबीआई में 5 सहयोगी बैंकों- स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के साथ ही भारतीय महिला बैंक का भी विलय कर दिया था। 10 बैंकों के विलय का फैसला देश के बैंकिंग इतिहास में दूसरा बड़ा फैसला है। 50 साल पहले इंदिरा गांधी ने 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था।
अब देश में ये 12 सरकारी बैंक होंगे
भारतीय स्टेट बैंक
पंजाब नेशनल बैंक
बैंक ऑफ बड़ौदा
कैनरा बैंक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
बैंक ऑफ इंडिया
इलाहाबाद बैंक
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
इंडियन ओवरसीज बैंक
यूसीओ बैंक
बैंक ऑफ महाराष्ट्र
पंजाब और सिंध बैंक
वित्त मंत्री ने कहा कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि लोन रिकवरी रिकॉर्ड स्तर पर हुई है और 250 करोड़ रुपए से ज्यादा के हर कर्ज पर हमारी नजर है। उन्होंने कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून के जरिए कई भगोड़ों की संपत्तियां जब्त कीं, उन्हें वापस लाने की कोशिशें जारी हैं।